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आँखों से कमजोर व्यक्ति को डॉक्टर बना दिया जाये या नही, SC करेगा फैसला

Posted on: 16 Jun 2018 11:16 by Ravindra Singh Rana
आँखों से कमजोर व्यक्ति को डॉक्टर बना दिया जाये या नही, SC करेगा फैसला

नईदिल्ली: सर्वोच्च न्यायालय इस विषय पर विचार के लिये सहमती दी है की क्या ‘कमजोर दृष्टि’ की दिव्यांगता से पीड़ित व्यक्ति को MBBS पाठ्यक्रम की पढ़ाई करने और मरीजों का उपचार करने की अनुमति दी जा सकती है।न्यायमूर्ति उदय यू ललित और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष यह पेचीदा सवाल आज आया, पीठ ने अचरज व्यक्त करते हुये कहा कि क्या इस तरह की कमजोर रोशनी वाले व्यक्ति को डाक्टर बनने और मरीजों का उपचार करने की अनुमति देना व्यावहारिक है।

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वर्ष 2018 में नीट की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले एक विद्यार्थी की याचिका पर केन्द्र और गुजरात सरकार को नोटिस जारी किये, इस याचिका में अनुरोध किया कि उसे कानून के मुताबिक दिव्यांगता प्रमाण पत्र जारी किया जाये ताकि वह MBBS पाठ्यक्रम में प्रवेश ले सके।

पीठ ने कहा , ”यदि आप वकालत या शिक्षण जैसे किसी अन्य पेशे के बारे में बात करें तो समझ में आता है कि एक दृष्टिहीन व्यक्ति सफलतापूर्वक इस क्षेत्र में काम कर सकता है। लेकिन जहां तक एमबीबीएस का संबंध है तो हमें देखना होगा कि यह कितना व्यावहारिक और संभव है। न्यायमूर्ति ललित ने एक दृष्टिहिन इंटर्न के साथ अपने अनुभव याद करते हुये कहा कि उसे दस्तावेजों को पढ़ने में दिक्कत होती थी और वह डिजिटल दस्तावेजों को पढ़ने और उन्हें समझने के लिये ब्रेल रूप में परिवर्तित करता था।

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इस पर पीठ ने कहा। ” शिक्षण और वकालत के पेशे के संदर्भ में कोई समस्या नहीं है लेकिन जब मेडिकल शिक्षा का सवाल आता है तो क्या ‘ लो विजन की दिव्यांगता वाले व्यक्ति को अनुमति दी जा सकती है?हमे इस पर विचार करना होगा।पीठ ने विद्यार्थी को 3 दिवस के अन्दर अहमदाबाद के बी. जे. मेडिकल कालेज की समिति के समक्ष इस आदेश की प्रति के साथ पेश होने का निर्देश दिया।

पीठ के द्वारा इस मामले की सुनवाई आने वाली 3 जुलाई की तारीख निर्धारित करते हुए बताया की याचिका की मेडिकल जांच होगी और उसके ‘ लो विजन से ग्रस्त होने संबंधी दावे के बारे में उचित चिकित्सा प्रमाण पत्र 4 दिवस के अन्दर शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री में पहुंचाया जाये।

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