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मैथ्य में सप्लीमेंट्री, लेकिन अब महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जा रही किताबें

Posted on: 28 May 2018 07:11 by hemlata lovanshi
मैथ्य में सप्लीमेंट्री, लेकिन अब महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड के पाठ्यक्रम में पढ़ाई जा रही किताबें

इंदौर: घरवाले मुझे डॉक्टर बनाना चाहते थे, पर मुझे मैथ्स सब्जेक्ट में ही सप्लीमेंट्री आती थी। पढ़ाई में एवरेज स्टूडेंट रही लेखिका ज्योति जैन आज एक ऐसा मुकाम हासिल कर चुकी हैं जिसकी तमन्ना सभी को रहती है।
कोल्हापुर यूनिवर्सिटी में ज्योति जैन के समग्र साहित्य में जीवन मूल्य विषय पर पीएचडी हो रही है। महाराष्ट्र स्टेट बोर्ड के पाठ्यक्रम में दो लघुकथाएं बाबा और नीम भी शामिल हैं। इसके साथ ही तीन किताबों का मराठी, बांग्ला और अंग्रेजी में अनुवाद भी हो चुका है।

घमासान डॉटकॉम आज रूबरू करा रहा है, इंदौर शहर की ऐसी ही सुप्रसिद्ध लेखिका ज्योति जैन से। ज्योति जी  भारतीय वांग्मय पीठ कोलकाता द्वारा गुरूदेव रविन्द्रनाथ ठाकुर सारस्वत सम्मान सहित अनेक राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर पर सम्मान प्राप्त कर चुकी हैं।

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मां ने समझा
लेखिका ज्योति जी ने बताया कि मुझे पढ़ाई के दौरान कई बार सप्लीमेंट्री आती थी। एवरेज स्टूडेंट ही थी। मुझसे करीब 10 साल बड़े भाई यूएस तिवारी नेत्ररोग विशेषज्ञ मुझे भी डॉक्टर बनाना चाहते थे। मगर उनकी सारी कोशिशों के बावजूद गणित में, मैं हमेशा फिसड्डी ही रही। मुझे आर्ट्स सब्जेक्ट ही भाता था। मां ने मुझे समझा और आर्ट फील्ड में कॅरियर बनाने में मदद की। मां के अलावा श्रीराम ताम्रकर सर ने भी सपोर्ट किया।jyoti 2

एक हजार से अधिक प्रकाशन
लेखन से जुड़ावा तो बचपन से ही था। आज 35 साल हो गएं है और 32 सालों से लगातार मेरे लेख प्रकाशित हो रहे हैं। मेरी कई रचनाएं पंजाबी और गुजराती में भी अनुवादित हो चुकी हैं। देश की प्रतिष्ठित समाचार पत्र—पत्रिकाओं में एक हजार से अधिक लेख, कहानी, लघुकथा व समीक्षाएं प्रकाशित हो चुकी है। आकाशवाणी में सतत सक्रिय हूं वहीं मीडिया स्टूडेंट्स को हिन्दी पड़ा रही हूं।

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