भारत के ऐसे गाँव जहाँ एक बार जरूर जाना चाहेंगे, विचित्रता जानकर हो जायेंगे हैरान

भारत ऐसा देश है जहां हर नई जगह के पीछे उसकी अपनी एक अलग कहानी छुपी हुई है। हर जगह की अपनी एक रूमानियत है। तो आज घुमक्कड़ी के इस सफर में आपको लिए चलते हैं भारत के कुछ ऐसे गांव के सफर पर जिनके बारे में जान कर आपकी घुमक्कड़ी की किताब में एक नया चैप्टर जुड़ जाएगा।

यूँ तो भारत में सबसे ज्यादा गाँव पाए जाते हो और यह भी कहा जाता है कि शहर में वो बात कहाँ जो गाँव में है. लेकिन आज आपको ऐसे अजब गज़ब गाँवों के बारे में बतायंगे जिनके बारें में अगर जानेगे तो एक बार जरूर जाना चाहेंगे।

1. खोनोमा गांव

नागालैंड में स्थित खोनोमा गांव को एशिया का पहला ‘ग्रीन विलेज’ माना जाता है। यह नागालैंड की राजधानी कोहिमा से 20 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है. चारों ओर हरियाली से घिरा ये गांव लगभग 700 साल पुराना है। खोनोमा राज्य का पहला गांव है, जिसने शिकार और अवैध कटाई पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है. अगर आप गौर से इस गांव को देखेंगे तो पाएंगे कि खोनोमा में बना हर घर एक दूसरे से जुड़ा है.

2. मत्तूर गांव

मत्तूर गांव कर्नाटक के शिवमोग्गा जिले में स्थित है। भले ही कर्नाटक की आधिकारिक भाषा कन्नड़ है, लेकिन इस गांव के निवासी संस्कृत के साथ सहज हैं.
इसमें विचित्र बात यह है कि संस्कृत एक प्राचीन भारतीय भाषा है, जो अब सक्रिय रूप से बोली जाने वाली भाषा नहीं है. भारत के कुछ स्कूलों में एक विषय के रूप में संस्कृत है, लेकिन भारत में कहीं भी संस्कृत का इस्तेमाल धार्मिक समारोहों तक सीमित है.

3. शेतफल,महाराष्ट्र

अगर मैं कहूं भारत में एक गांव ऐसा है जहां हर घर में सांप रहते हैं, तो क्या आप मानेंगे? जी हां। महाराष्ट्र के शोलापुर जिले का शेतफल गांव इस बात का जीता जागता उदाहरण है. पुणे शहर से करीब 200 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र का यह गांव कोबरा सांप का घर है. यहां हर घर में सांप रहते हैं. इस गांव में लोग सांपों से साथ खुशी खुशी रहते हैं। ना सांप उनका कुछ बिगड़ते हैं और ना ही लोग सांपों से कोई दुश्मनी रखते हैं. यहां सांपों के चलने फिरने में भी कोई पाबंदी नहीं है। उल्टा लोग हर रोज़ सांप की पूजा करते हैं और उनके अच्छे के लिए कामना करते हैं। इस गांव में 2600 से ज़्यादा लोग रहते हैं और हर एक जन का एक ख़ास दोस्त ज़रूर है. और वो है सांप

4. लोंगवा गांव
लोंगवा गांव नागालैंड के मोन जिले में स्थित है। यह राज्य के सबसे बड़े गांवों में से एक है. इस गांव की अनोखी बात यह है कि यहां के ग्राम प्रधान का घर भारत और म्यांमार के बीच भौगोलिक सीमा में स्थित है। वहीं, इस गांव के निवासियों के पास दोहरी नागरिकता है. बता दें कि इस गांव में ग्राम पंधान को स्थानीय रूप से राजा के नाम से भी जाना जाता है.

5. शनि शिंगणापुर गांव
अमूमन घरों में दरवाजे इसलिए होते हैं ताकि उनका घर सुरक्षित रहे, लेकिन महाराष्ट्र के शनि शिगनापुर गांव के निवासियों को इस बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है. यह गांव बिना दरवाजे वाले गांव के रूप में लोकप्रिय है. यहां के निवासी हिंदू देवता शनि के सच्चे भक्त हैं. निवासियों का मानना ​​है कि जो कोई भी इस गांव में किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाएगा, वह शनि देव का प्रकोप सहन करेगा.

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6. बड़वां कला गांव
बिहार के कैमूर हिल्स के बड़वां गांव की असामान्य लेकिन सच्ची कहानी है कि 50 वर्षों तक इस गांव में कोई शादी नहीं हुईं. इस गांव में इतने सारे अविवाहित पुरुषों के लिए यह स्थान मुख्य कारण था. दरअसल, 2017 से पहले इस गांव तक पहुंचने का एकमात्र तरीका 10 किमी का ट्रेक करना था. इसने कई दुल्हनों और उनके परिवारों को विचलित कर दिया, लेकिन ग्रामीणों ने आखिरकार एक सड़क खोद दी, जिससे अब यहां शादी संभव हो गई.

7. जम्बुर, गुजरात

क्या आप जानते हैं गुजरात में गुजारती बोलने वाले अफ्रीकी रहते हैं? यहां बात हो रही है गुजरात की सिद्धि समुदाय की. यह लोग मूल रूप से अफ्रीका के हैं. यह लोग सदियों पहले जूनागढ़ के नवाब द्वारा भारत लाए गए थे. अब चूंकि उस समय इस्लाम धर्म का काफी प्रचलन था इसलिए इन लोगों ने भी अपने आप को समय और स्तिथि के हिसाब से ढाल लिया. वैसे तो सिद्धि समुदाय के लोग अफ्रीका से ताल्लुक रखते हैं, पर ये अपने रहन सहन, बोल चाल से एकदम भारतीय और ठेठ गुजराती हैं। कर्नाटक के भी कुछ हिस्सों में सिद्धि लोग आपको आराम से मिल जाएंगे.