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स्टूडेंट ऑफ द ईयर -2 : फार्मूला पुराना लेकिन स्वाद न दे पाया | Student of the Year-2: Formula Old but Could’nt gave Taste

Posted on: 10 May 2019 16:27 by bharat prajapat
स्टूडेंट ऑफ द ईयर -2 : फार्मूला पुराना लेकिन स्वाद न दे पाया | Student of the Year-2: Formula Old but Could’nt gave Taste

निर्देशक – पुनीत मल्होत्रा,
अदाकार – टाइगर श्रॉफ, तारा सुतारिया, अनन्या पांडे, हेमांष कोहली, आदित्या, सना सईद, फरीदा जलाल, समीर सोनी
संगीत – विशाल शेखर, सलीम सुलेमान
लेखन – अरशद सैयद

दोस्तो क्योकि फिल्म का नाम की वापसी हुई है तो जिक्र पहली फिल्म का तो होगा ही। 2012 में आई फिल्म स्टूडेंट में आलिया भट्ट, वरुण धवन, सिद्धार्थ मल्होत्रा थे,फिल्म हिट साबित हुई थी, करण ने उसी फॉर्मूले को दोहराने की कोशिश की गई।

कहानी –

रोहन शर्मा (टाइगर) सेंट एलिसा कालेज में स्पोर्ट्स कोटे में एडमिशन लेता है और धीरे-धीरे उसकी प्रसिद्धी बढ़ने लगती है जो कि कॉलेज के पोस्टर बॉय मानव(आदित्य सिंह) को खलने लगती है, और आदित्य रोहन को नीचा दिखाने की कोशिश में लग जाता है। इसमे उसका साथ देती है उसकी बहन श्रेया (अनन्या पांडे) जो रोहन को नीचा दिखाने का कोई मौका नही छोड़ती। लेकिन एक पुरानी कहावत है कि नफरत महोब्बत की पहली सीड़ी होती है और श्रेया रोहन की काबिलियत पर फिदा हो जाती है। चूंकी फिल्म में त्रिकोणीय प्रेम है तो अगली एंट्री मिया मृदला (तारा) की होती है।

अब कालेज में शुरू होता है डांस, स्पोर्ट्स चेम्पियनशिप का फूल डोज। कौन बनता है कॉलेज का चेम्पियन? और रोहन किसका होता है? इन सवालों के जवाब के लिए फिल्म देखनी पड़ेगी। लेकिन कुछ नया नही देखने को नही मिला, एक्शन, डांस, स्पोर्ट्स का तड़का और त्रिकोणीय प्रेम कहानी के अलावा।

बजट –

फिल्म 70 करोड़ से ऊपर के बजट की है जो कि 120 करोड़ तक जाती नही लग रही है, इसके तीन मुख्य कारण है पहला आईपीएल, दूसरा रमजान, तीसरा देश मे चुनाव यह तीन कारण निश्चित ही कलेक्शन पर प्रभाव छोड़ेंगे। फिर भी फिल्म 7 से 11 करोड़ की ओपनिंग दे जाएगी लेकिन 100 करोड़ी होना थोड़ा मुश्किल होगा।

अदाकारी पर बात करे तो टाइगर जिस तरह के डांस, एक्शन के लिए जाने जाते है, वह बखूबी निभाया है, तारा को अभी लम्बी दूरी तय करना है, अदाकारी सीखना पड़ेगी, अनन्या चंकी पांडे की बिटिया है और अभिनय की विधिवत शिक्षा लेकर आई है तो वह उसके अभिनय से साफ झलकता है। हर्ष बेनीवाल को आप याद रख आएगे, आदित्य सिंह भी किरदार में छाप छोड़ते दिखे।

आर डी बर्मन की कम्पोजिशन और आनन्द बक्शी लिखित गाना ‘ये जवानी है दीवानी‘ आज भी उतना ही जवान गाना है जितना 35 साल पहले था रीमिक्स बढ़िया बन पड़ा है, फकीरा गाना भी कर्णप्रिय लगता है, विशाल शेखर ने संगीत पर बढ़िया काम किया है।

कमजोर पक्ष –

फिल्म में कॉलेज का जो माहौल दिखाने की कोशिश की गई वह हजम नही होता, छोटे कपड़े कभी भी उन्नति के प्रतीक नही हो सकते हा वह पाश्चात्य सभ्यता के परिचायक जरूर है। काॅलेज के माहौल अति आधुनिक दिखाने के चक्कर मे पुनीत पाश्चात्य फिल्मो को नकल कर गए जो कि भारतीय दर्शकों को पसन्द आएगा या नही ये बड़ा सवाल बनता है जो कि फिल्म को पारिवारिक श्रेणी से बाहर करता है जो कि फिल्म के कलेक्शन पर असर डालेगा।
फिल्म को हमारी तरफ से 3 स्टार्स

फिल्म समीक्षक
इदरीस खत्री

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