श्रीनगर में इस साल भी मोहर्रम को लेकर कड़ी पाबंदी, कर्फ्यू जैसी हालत

कश्मीर में 1990 में जबसे आतंकवाद का दौर शुरू हुआ है तबसे मुहर्रम के जुलूसों को निकालने की अनुमति नहीं है।

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श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने शुक्रवार को कहा कि पिछले साल की तरह ही इस साल भी मुहर्रम का जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दी जाएगी। मोहर्रम के सभी रीती रिवाज इमामबाड़ों में ही होंगे। उच्च प्रशासनिक की माने तो श्रीनगर, बडगाम, पुलवामा, अनंतनाग, गांदरबल, बांडीपोर और बारामुला के जिला उपायुक्तों से कहा गया कि वह संवेदनशील इलाकों में मुहर्रम के जुलूस निकालने की अनुमति बिलकुल ना दें।

बता दे, सरकार ने पुरानी परंपरा को कायम रखते हुए जुलूस निकालने की इजाजत नहीं देगी ताकि कोई असामाजिक तत्व सुरक्षा बलों के साथ झड़प भड़काने के लिए उसका इस्तेमाल ना कर सकें। इसलिए प्रशासन ने इसपर पाबंदी लगा दी हैं। सरकार के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा की शिया समुदाय के सभी सम्मानित सदस्यों को सूचित कर दिया गया है कि वे इन 10 दिनों में अपने सभी रीत-रिवाज संबंधित इमामबाड़ों में करें। मुहर्रम में शिया समुदाय 10 दिन का शोक मनाता है।

यह एक सितंबर से शुरू हुआ है। बता दे, श्रीनगर में पुलिस ने सुबह से ही शहर में चारों ओर से लाउडस्पीकरों के माध्यम से घोषणा की कि “निवासियों को अपने घरों से बाहर न निकलने की सूचना दी जाए”। साथ ही पुलिस ने कहा की कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि अनुच्छेद 370 हटाने के बाद राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के केन्द्र की घोषणा के बाद कश्मीर में पहली बार 5 अगस्त को पाबंदियां लगाई गई थीं। हालांकि समय बीतने के साथ स्थिति में हुए सुधार को देखते हुये घाटी के कई हिस्सों से पाबंदियों को हटा लिया गया था। लेकिन बता दे, कश्मीर में 1990 में जबसे आतंकवाद का दौर शुरू हुआ है तबसे मुहर्रम के जुलूसों को निकालने की अनुमति नहीं है।

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