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परंपराओं को बदलने में लगा इंटरनेट, अब हुई ‘ई-उठावने’ की शुरुआत

Posted on: 01 Jul 2019 14:27 by Surbhi Bhawsar
परंपराओं को बदलने में लगा इंटरनेट, अब हुई ‘ई-उठावने’ की शुरुआत

इंदौर: इंटरनेट की दुनिया में सबकुछ ऑनलाइन हो रहा है। खाने से लेकर कपड़े तक सबकुछ ऑनलाइन उपलब्ध है। शादी के कार्ड भी अब ऑनलाइन होने लगे है। उठावना ही एक मात्र परंपरा रह गई है जिसमे इंसान समय पर पहुंचने की कोशिश करता है लेकिन अब इंदौर में ये प्रथा भी ख़त्म हो रही है। इंदौर में अब ई-उठावने की शुरुआत हो गई है।

वरिष्ठ पत्रकार कल्पेश याग्निक के भाई नीरज याग्निक के द्वारा अपने जीजा की मृत्यु होने पर कल ई-उठावना रखा गया। फेसबुक पर एक मैसेज में नीरज याग्निक ने कहा कि ‘सालभर में परिवार में दो उठावने करने के बाद फैसला लिया है कि अब परिवार में कोई गमी होने पर उठावने की रस्म न करते हुए हमारा परिवार अब ई-उठावना और ई-शोक बैठक करेगा। भीड़ भरे रास्तों पर होकर निश्चित समय पर पहुंचना होता है। वहां पहुंचकर उपस्थिति दर्ज कराने के लिए चेहरे को गंभीर बनाना होता है और भी कुछ करना होता है।

उठावने को लेकर काफी कुछ लिखा जा सकता है व लिखा जा चुका है। समय, पेट्रोल, पर्यावरण जैसे अनेक फायदे व ई शोक संदेश से उपस्थिति निश्चित तौर पर दर्ज होगी क्योंकि उठावने व बैठक में सभी की उपस्थिति याद रख पाना संभव नहीं। जीजाजी के निधन की “ई शोक बैठक” की शुरुआत आज शाम करने जा रहा हूं, ऐसा शायद पहला अवसर हो। कुछ इसे मजाक में ले सकते हैं तो कुछ गुस्से में। किन्तु मैं इस विषय को गंभीरता से ले रहा हूं। और हां… एक लिंक भी शेयर करुंगा जिसमें कैसे और क्यों हो गया… यह सब होगा। ताकि बार बार एक ही बात बताने से भी बचा जा सके।’

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