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ऐसे करे भाई का सत्कार, नहीं रहेगा यमराज का भय

Posted on: 09 Nov 2018 12:08 by shilpa
ऐसे करे भाई का सत्कार, नहीं रहेगा यमराज का भय

भैया दूज का त्यौहार कार्तिक मास की द्वितीया को मनाया जाता है।इस पर्व से जुड़ी कई किवदंतियां हैं, जो इस पर्व की महत्ता को दर्शाती हैं। भैया दूज पर भाई अपनी बहनों के घर जाते हैं और उन्हें ढेर सारे तोहफों के साथ अपना प्यार और आशीर्वाद देते है।

धार्मिक पुराणों में और पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस पर्व का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि भाई का इस दिन बहन के घर भोजन करने का अपना खास महत्व है। भोजन में चावल जरूर शामिल करना चाहिए और भाई को टिका करने का भी विशेष महत्व है। इस दिन यमराज तथा यमुना जी के पूजन का भी विशेष महत्व है।

वैसे तो भैया दूज से जुड़ी कई कथाए है-
यमुना और यमराज भगवान सूर्य की पत्नी छाया के बच्चे थे। दोनों भाई-बहन में बहुत प्यार था। यमुना हमेशा आग्रह करती थी की यमराज उनके घर आए और भोजन करें, लेकिन यमराज कभी जा नहीं पाए थे। जब एक बार उन्होंने जाने का तय किया तो वह दिन कार्तिक मास की द्वितीया तिथि का था। उस दिन प्रसन्नचित यमराज ने यमुना के घर जाते हुए यमलोक में जितने जीव कष्ट भोग रहे थे, सभी को छोड़ दिया।

बहन यमुना के घर यमराज ने भोजन किया। उसके आदर सत्कार से प्रसन्न होकर उन्होंने यमुना से वर मांगने को कहा। तब यमुना ने वर मांगते हुए कहा कि आज के दिन जो बहन अपने भाई का आदर-सत्कार करके उसका टीका करे, उसे आपका भय न हो। तब यमराज ने भी उपहार स्वरुप यह वरदान यमुना को दे दिया। यह दिन यम-द्वितीया के नाम से भी जाना जाता है।

ऐसे करे भाई का सत्कार, नहीं रहेगा यमराज का भय

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