संसद के मानसून सत्र में हुए हंगामे पर स्पीकर ओम बिरला ने उठाया सख्त कदम, कांग्रेस के चार सदस्यों को किया निलंबित

लोकसभा के मानसून सत्र में हुए हंगामे के बाद स्पीकर ओम बिरला ने कड़ा कदम उठाया है.

संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में हंगामे पर स्पीकर ओम बिरला ने सख्त कदम उठाया है. उन्होंने हंगामा करने वाले कांग्रेस के चार सदस्यों को निलंबित कर दिया है यह चारों कांग्रेस के सदस्य पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिए गए हैं.

बता दें कि ज्योतिमणि, माणिकम टैगोर, टीएन प्रथापन और राम्या हरिदास लोकसभा की कार्रवाई के दौरान हंगामा कर रहे थे. लगातार चल रहे हंगामे के बीच 2:30 बजे लोकसभा की कार्रवाई स्थगित की गई और स्पीकर ओम बिरला ने कड़े कदम उठाते हुए तख्तियां दिखाने वालों को सदन से बाहर करने के संकेत दिए थे.

Must Read- सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए गांधी जी की जीवन शैली की जरूरत 

इसके बाद स्पीकर ओम बिरला के कक्ष में विपक्षी दलों के साथ सभी दलों की बैठक हुई. जहां पर विपक्ष की ओर से सदन में तख्तियां नहीं दिखाने और हंगामा नहीं होने का आश्वासन दिया गया था. इसके बावजूद भी सदन में तख्तियां लहराई गई और जमकर हंगामा हुआ. इसी के चलते स्पीकर ओम बिरला ने कड़ा कदम उठाते हुए 4 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया.

बता दें कि इससे पहले संसदीय मामलों के मंत्री प्रहलाद जोशी ने संसद में किए जा रहे हंगामे पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि स्पीकर के सख्त रूप से मना करने के बाद भी तख्तियां लहराई जा रही है, ऐसे सदस्यों पर कार्रवाई होनी चाहिए. ताकि वह बिना किसी कारण के सदन की कार्यवाही में बाधा ना डालें.

आज लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दल के सदस्य ने हाथों में तख्तियां लेकर अपनी मांगों को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी. लगातार हो रही है हंगामे के बाद ओम बिरला नाराजगी जताते हुए दिखाई दिए. इस दौरान उन्होंने कहा कि मेरी सहृदयता का गलत मतलब ना निकाले. 3 बजे के बाद में सदन में कार्रवाई शुरू करने के लिए तैयार हूं. लेकिन अगर तख्तियां दिखानी है तो सदन के बाहर दिखाएं. आगे उन्होंने कहा कि देश की जनता चाहती है कि सदन चले. लेकिन सदन इस तरह से नहीं चल सकता, ऐसी स्थिति मैं यहां नहीं रहने दूंगा.

बता दें कि लगातार बढ़ रही महंगाई और जरूरी वस्तुओं पर लगाए गए जीएसटी के मुद्दे को लेकर विपक्ष लगातार हंगामा करते हुए पीएम नरेंद्र मोदी को संसद में आने की मांग कर रहा है. 18 जुलाई से मानसून सत्र की शुरुआत की गई ताकि विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की जा सके लेकिन विपक्ष के हंगामे के चलते अब तक कार्रवाई बाधित होती आई है.