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सोनीपत प्रतिष्ठा हुड्डा की और चर्चा विधानसभा चुनाव की | Sonipat Chief Minister Bhupinder Singh Hooda and Assembly Elections Discussions

Posted on: 16 May 2019 14:28 by Surbhi Bhawsar
सोनीपत प्रतिष्ठा हुड्डा की और चर्चा विधानसभा चुनाव की | Sonipat Chief Minister Bhupinder Singh Hooda and Assembly Elections Discussions

हरियाणा की चर्चित लोकसभा सीटों में सोनीपत प्रमुख है। इसके कई कारण भी है। एक तो इसका दिल्ली से सटा होना और दूसरा जाट राजनीति का गढ़ होना। इतना ही नहीं कांग्रेस ने यहां दो बार के मुख्यमंत्री दिग्गज नेता भूपेंद्रसिंह हुड्डा को बतौर उम्मीदवार यहां से चुनाव मैदान में उतारना है। उनका मुकाबला भाजपाई दिग्गज रमेश कौशिक, इंडियन नेशनल लोकदल के सुरेंद्र छिक्कारा जेजेपी के दिग्विजय चौटाला औऱ एलएसपी की राजबाला सैनी से होना है।

सोनीपत सीट के बारे में कहा जाता है कि यहां से राज्य की राजनीति की दिशा तय होती है। इसी कारण यहां यह सवाल आम है कि ‘कौण जीत रह्या से…’। सोनीपत के जाट राजनीति का केंद्र होने का कारण यहां के पंद्रह लाख से कुछ ज्यादा मतदाताओं में से एक तिहाई से ज्यादा यानी साढ़े पांच लाख वोटर्स का जाट होना है। इनसे एक तिहाई ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग के मतदाता भी बड़ी संख्या में हैं।

यहां हुड्डा के प्रभाव से भाजपा भी अनजान नहीं। इसी कारण नरेंद्र मोदी से लेकर अमित शाह तक यहां चुनाव प्रचारर में झोंके जा चुके हैं। यह माना जा रहा है कि राज्य में कांग्रेस को कमजोर करने के लिए यहां से हुड्डा को हराना होगा। अन्यथा इसी साल सितंबर-अक्टूबर में होने वाले विधानसभा चुनाव तक कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखना ही मुश्किल हो जाएगा। हुड्डा के पक्ष में सबसे प्रबल बात यह है कि सोनीपत जिले की छह विधानसभा सीटों में से पांच पर जाट विधायक हैं और सभी हुड्डा गुट से ही संबंधित है। यह स्थिति एक दशक से है। वैसे लोकसभा में कुल नौ विधानसभा सीटे हैं।

हुड्डा हालांकि रोहतक के बाहर पहला चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन वे इस क्षेत्र के दामाद हैं। उनकी ससुराल खरखौंदा इसी लोकसभा क्षेत्र में आती है। तमाम अनुकूल परिस्थितयों के बाद भी बीते चुनाव में यह सीट भाजपा के रमेश कौशिक ने पौन लाख से ज्यादा मतों के अंतर से जीती थी। वे दूसरे गैर जाट नेता थे जो यहां से लोकसभा का चुनाव जीते। उनसे पहले यह कारनामा १९९६ में अरविंद शर्मा ने बतौर निर्दलीय प्रत्याशी किया था। भाजपा के लिए सोनीपत ही नहीं हरियाणा की सभी दस सीटें महत्वपूर्ण है।

इसका कारण बीते लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी का बहुमत स्थापित करने में इस राज्य का महती योगदान रहा था। तब यहां की दस में से सात सीटें भाजपा के हाथ लगी थी। महज एक कांग्रेस को और दो इंडियन नेशनल लोकदल को मिल सकी थी। इसी कारण भाजपा सोनीपत सहित एक-एक सीट को टारगेट कर जीतने की रणनीति पर काम कर रही है। यहां उसकी राज्य सरकार होना भी उसके पक्ष में है।

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