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प्रदेश भाजपा में बड़े बदलाव के संकेत

Posted on: 15 Mar 2019 09:33 by Pawan Yadav
प्रदेश भाजपा में बड़े बदलाव के संकेत

राघवेन्द्र सिंह
मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी में बड़े बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। विधानसभा चुनाव में पार्टी को मिली पराजय पर भले ही दिल खोलकर समीक्षा नहीं की गई हो, मगर हाईकमान कुछ कड़े निर्णय करने का मन बना चुका है। पिछले दिनों प्रदेश भाजपा के सहसंगठन महामंत्री अतुल राय को पार्टी ने दायित्व से मुक्त कर बदलाव की शुरूआत कर दी है। हालांकि यह परिर्वतन पार्टी के भीतर देर से उठाया गया सही कदम माना जा रहा है।

विधानसभा चुनाव के पहले से संगठन के निरंतर कमजोर होने की खबरें दिल्ली तक जा रही थी। बदलाव की शुरूआत अतुल राय की विदाई से हुई है। इसके बाद प्रदेश अध्यक्ष और संगठन महामंत्री को लेकर भी कानाफूसी चल रही है। आम चुनाव कि घोषणा हो चुकी है। ऐसे में मान्य परंपराओं के मुताबिक कोई भी पार्टी नेतृत्व परिवर्तन का जोखिम नहीं उठाती है। इस स्थिति में संघ और भाजपा के उच्च सूत्रों से मिल रही खबरें बताती है कि संघ परिवार से कोई वरिष्ठ पदाधिकारी लोकसभा चुनाव में पार्टी को सहयोग करने के लिए भेजे जाएंगे। संघ की ग्वालियर में संपन्न हुई प्रतिनिधि सभा की बैठक में इस बावत बढ़ा फैसला लिया गया है। जानकारी के अनुसार डॉ. अशोक वार्ष्णेय भाजपा को मदद करेंगे। संभव है संगठन महामंत्री और उनकी टीम डॉ. वार्ष्णेय के निर्देशन में काम करंे। प्रदेश भाजपा में लगातार कमजोरी आने की खबरें और विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार को देखते हुए संघ परिवार और भाजपा नेतृत्व सकारात्मक परिवर्तन की योजना पर विमर्श कर रहा है, इसलिए अतुल राय को जब भाजपा से पदमुक्त किया गया तब यह कहा जा रहा था। इस निर्णय से संगठन मजबूत नहीं होने वाला।

पहले तो खबरें यह थी आधी से ज्यादा टीम के बदलने की मगर निर्णय में देरी और लोकसभा चुनाव आने के कारण इसे थोड़ा सीमित किया जा रहा है। बहुत संभव है लोकसभा चुनाव के बाद प्रदेश पदाधिकारियों के साथ जिले और संभाग के संगठन मंत्रियों में से बहुतों की विदाई हो जाए। असल में प्रदेश में 15 साल की सत्ता के दौरान भाजपा संगठन में कुछ लाईलाज बीमारियां घर कर गई। इसके चलते देशभर में मजबूत मानी जानी वाली प्रदेश भाजपा चाल, चरित्र और चेहरे के मामले में कमजोर हो गई, इसलिए डॉ. वार्ष्णेय को नए दायित्व के साथ भाजपा में लाने के संकेत मिले हैं और चुनाव बाद उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। उनकी वरिष्ठता को देखते हुए भाजपा में जो पद उनके लिये तय किया जा रहा है वह छोटा है, लेकिन संगठन में कमजोरी ज्यादा है संभवतः इसीलिए संघ और भाजपा ने बड़े कद के प्रचारक को दायित्व देने का मन बनाया है।

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