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शिवराज की चेतावनी- “आदिवासियों का पसीना गिरेगा तो मामा खून बहाएगा”

Posted on: 18 Jun 2019 21:46 by Mohit Devkar
शिवराज की चेतावनी- “आदिवासियों का पसीना गिरेगा तो मामा खून बहाएगा”

भोपाल में आज आदिवासियों ने अपनी मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया था, जिसमे पूर्व सीएम शिवराज सिंह चौहान भी शामिल हुए थे. प्रदर्शन के दौरान शिवराज सिंह ने सीएम कमलनाथ पर जानकर धावा बोला था और मांगे पूरी ना होने पर धरना जारी रखने और आंदोलन की चेतावनी दी थी. कमलनाथ को जब इस प्रदर्शन के बारे में पता चला तो उन्होंने आदिवासियों से मुलाकात की.

इस वार्ता के दौरान कमलनाथ से मिलने शिवराज सिंह भी पहुंचे थे. यहां उन्होंने अपनी मांगे रखी और कमलनाथ ने उनकी सभी मांगों को पूरा करने का विश्वास भी दिलाया.वही आदिवासियों ने अपनी मांगें पूरी होने के बाद विजय जुलूस भी निकाला. इस मामले की जानकारी खुद शिवराज सिंह ने मीडिया को दी है. उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि, सीएम ने आदिवासियों की सभी मांगे पूरी होने का विश्वास दिलाया है. उन्होंने कहा कि सरकार के होश ठिकाने आ गए, अक्ल ठिकाने लग गई. आदिवासी अभी संतुष्ट हैं लेकिन प्रशासन गड़बड़ी न करे, हम कदम कदम पर लड़ेंगे और पीछे नहीं हटेंगे. शिवराज ने बताया कि भोपाल कलेक्टर ने आकर कहा कि सीएम बात करने को तैयार हैं चलो, तब जाकर हमने अफसरों के साथ सीएम से बात की.

शिवराज ने कहा कि, “आदिवासियों का पसीना गिरेगा तो मामा खून बहाएगा. वन विभाग और आबकारी विभाग ने जो फर्जी मामले बनाए हैं, सरकार वो जांच के बाद वापस लेगी. वन जमीन पर गेहूं चना की तुलाई जो बची है, सरकार वो खरीदेगी. आदिवासी वन भूमि पट्टे से बेदखल नहीं किये जाएंगे.जमीन से कब्जा नहीं हटेगा, उसी जमीन पर रहेंगे. सरकार मक्का की फसल और कुए में ब्लास्टिंग की परमिशन भी देगी. मुख्यमंत्री ने पंचायतों का सीमांकन और तेंदूपत्ते को लेकर भी भरोसा दिलाया है.” इसके बाद शिवराज ने कमलनाथ पर निशाना साधते हुए कहा कि कमलनाथ गरीबों की हाय तुम्हें तबाह और बर्बाद करके रख देगी.

उन्होंने आगे कहा कि, “पकड़ना है तो बड़े माफियाओं को पकड़ों।वल्लभ भवन के दलालों पर कार्रवाई करो. अगर आदिवासियों के हक को किसी सरकार ने छिनने की कोशिश की तो हम उस सरकार को भी नही छोड़ेंगे. सुन ले सरकार अगर आदिवासी की जमीन पर हाथ लगाया तो हम छोड़ेंगे नही।अगर आदिवासियों की मांगे सरकार नहीं मानेगी तो हम आंदोलन करेंगे. आदिवासियों के साथ मैं लड़ूंगा चाहे प्राण भी क्यों न चले जाए. अगर हम आदिवासियों के हित में तीर कमान हाथ में उठाएंगे तो ज़िम्मेदारी तुम्हारी होगी. जीना है अपने हक़ में लड़ना सीखो और इनकी लड़ाई में लड़ूंगा.”

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