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शिवराज की बेबसी का वीडियो और सिंधिया का जूता खोना, ब्रजेश राजपूत की टिप्पणी

Posted on: 14 May 2018 04:25 by Ravindra Singh Rana
शिवराज की बेबसी का वीडियो और सिंधिया का जूता खोना, ब्रजेश राजपूत की टिप्पणी

शीर्षक पढकर हैरान नहीं होईये। हैरान तो हम हो गये थे जब सिहोर के गांव बीजला का वाइरल हुआ वो वीडियो देखा जिसमें सीएम शिवराज सिंह अपने मंत्रियों अफसरों और अपनी पार्टी के नेताओं के बीच बेबस नजर आये। सिहोर जिले की तहसील नसरूल्लागंज का गांव है बीजला। यहां के लोगों की शिकायत थी कि उनके विधायक शिवराज सिंह सीएम बनने के बाद एक बार भी नहीं आये। इसलिये सीएम ने गांव वालों को समय दिया और जनसंवाद रखा। बीच गांव में मंच सजा और सीएम शिवराज अपनी पूरी बेतकल्लुफी के साथ सामने आयी जनता से मंच से संवाद कर रहे थे।

सरकारी योजनाओं का जिक्र करते करते अचानक सीएम को मजदूर पंजीयन योजना याद आ गयी। उन्होंने मंच से पूछा यहां पर सात तारीख को ग्राम सभा हुयी की नहीं। कोई जबाव नहीं। इस पर ये सवाल दो तीन बार सीएम ने अलग अलग तरीके से पूछा तो पीछे से आवाज आयी, हो गयी होगी। इस पर सीएम ने फटकारा क्या पता हो गयी नहीं सच बताओ हुयी कि नहीं। अरे भाई हमने तय किया था कि ग्राम सभा में मजदूरों के नाम पढे जायेगे जिनके नाम छूट जायेंगे उनको जोडा जायेगा। यहां मजदूरों के पंजीयन हुये कि नहीं। सीएम ने कलेक्टर की तरफ देखा तो कलेक्टर ने जिला पंचायत सीईओ की तरफ और आखिर में जबाव आया कि पंचायत सचिव के पास पंजीयन वालों की सूची होगी। कहां है पंचायत सचिव बुलाओ। सहमा से पंचायत सचिव मुरली तिवारी मंच के सामने आता है।

सीएम ने सचिव से पूछा लाओ सूची मैं यहां मंच से नाम पढ दूं। मगर ये क्या सूची ही नहीं थी सचिव के पास। शिवराज ने फिर फटकारा मुख्यमंत्री आया है और तुम सूची नहीं लाये अरे मुख्यमंत्री माला पहनने थोडी आया है यहां। इस बीच में भीड से आवाज आने लगीं आज ही आया है सचिव, भाई साब शौचालय के काम भी आधे अधूरे पडे हैं, लोग बाहर जा रहे हैं शौच करने स्कूल भी अधूरा पडा है। मगर सीएम इन सबको अनसुनी करके फिर जनता से मुखातिब होते हैं यहां कौन कौन मजदूरी करता है हाथ उठाओ। पंडाल में कई हाथ उठ जाते हैं। आपने आवेदन जमा किये थे मजदूरी के रजिस्टेशन के लिये। किसी ने बताया था या नहीं। अब सीएम के तेवर बदलने लगते हैं। अफसरों की तरफ देख कर कहते हैं भाई ये बिलकुल ठीक नहीं। ये गलत बात हैं। जिम्मेवारी किसकी है।

मैं बहुत गंभीरता से लूंगा इसको। अफसरों की ओर से जबाव आता है सर सूची तो बनी है। मगर शिवराज भी इस विषय को छोडने को तैयार नहीं थे बोले यदि सूची बनी है तो इनको मालुम क्यों नहीं। ऐसा तो नहीं वोटर लिस्ट उठाकर अंध सटट में भर दी सूची। ये मेरे बर्दाश्त के बाहर है। आज रात में ही यहां सूची पढी जायेगी। बेटियों की शादियों में जा रहा हूं वरना रूकता और सूची पढवाकर ही जाता। अफसरों के बाद बारी आती है नेताओं की जो मंच पर कलफ लगे कुर्ते पहनकर बैठे थे। सीएम बडी सहजता से उनकी तरफ मुखातिब होते हैं पूछते हैं आप लोग कहीं गये थे ग्राम सभा में। वन विकास निगम के गुरूप्रसाद तिवारी और पीडब्लूडी मंत्री रामपाल सिंह उठकर बगलें झांकते हुये कुछ बोलते हैं जिससे शिवराज संतुष्ट नहीं दिखे।

अफसर और मंत्रियों के बाद बारी आती है संगठन की। भगवा पटटा गले में डाले माइक के बगल में ही खडे पार्टी के एक पदाधिकारी की ओर मुखातिब होकर सीएम फिर बोलते हैं भाई आप लोग भी जाओ गांव। ऐसे नहीं चलेगा कि यहां खडे रहें। मैं मेहनत कर करके मरा जा रहा हूं और यहां ये हाल है। अफसर फिर कुछ सफाई देते हैं मगर सीएम का धीरज अब जबाव दे जाता है दुखी होकर कहते हैं मुझे तो बडा अविश्वास हो गया भाई मैं तो बडे भरोसे में था। ये तो एक गांव है बाकी गांवों का क्या होगा क्या एक एक गांव जाउं मैं। उफ असीम धीरज के धनी तेरह साल से सीएम शिवराज की अपने ही गृह जिले के अफसरों और नेताओं के सामने ये दशा देख मन दुख गया। सीएम शिवराज सिंह की जनता के प्रतिबद्वता और उसको लेकर की जाने वाली मेहनत बेजोड है मगर सरकार का डिलीवरी सिस्टम बीमार और थका हुआ है ये बात कुछ मौकों पर हम पत्रकार सीएम को बता भी चुके हैं।

उधर शिवराज सरकार को उखाड फेंकने के मकसद से परिवर्तन यात्रा करने निकले कांग्रेस के नेता और सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया उज्जैन के महाकाल पहुंचे। महाकाल से उन्होंने क्या मांगा होगा ये तो सब जानते ही हैं मगर खबर उनके जूते खोने की बनी। बात यहीं नहीं रूकी िंसंधिया ने महाकाल के दर्शन के बाद उज्जैन के मशहूर ज्योतिषी आनंद शंकर व्यास से मुलाकात की जिन्होंने बाद में भविष्यवाणी की है कि जूते खोना सिंधिया के लिये शुभ है इससे उनकी पनौती यानिकी अपशकुन टल गया। क्या इस भविष्यवाणी को आने वाले विधानसभा चुनाव से जोडकर देखा जाये। सिंधिया की पनौती कहीं और तो नहीं चली गयी।

पुनश्च : हमारे सिहोर के साथी नितिन ठाकुर ने बताया कि बीजला गांव में रात में 212 मजदूरों के पंजीयन की सूची पढी गयी।

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