Breaking News

शिवराज बोले- मैं सात जनवरी को कोई शिव-तांडव नहीं करूँगा

Posted on: 02 Jan 2019 19:14 by Amit Shukla
शिवराज बोले- मैं सात जनवरी को कोई शिव-तांडव नहीं करूँगा

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भले ही शिरडी में पत्रकारों से चर्चा करते हुए कहा कि जीत और हार लोकतंत्र का हिस्सा है, शिवराज ने कहा कि हाल ही में हुए चुनाव में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत पाने में विफल रही जबकि भाजपा को पहले से अधिक मत मिले हैं। मैं जोड़-तोड़ अथवा घटिया राजनीति में विश्वास नहीं रखता हूं। सबसे अधिक सीटों वाली पार्टीै (सबसे बड़ी) को सरकार चलाने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर सरकार जनहित के काम करती है तो प्रमुख विपक्षी पार्टी होने के नाते भाजपा सहयोग करेगी लेकिन ऐसा नहीं होने पर पार्टी विरोध करेगी। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे तो उन्होंने कहा कि मैं पार्टी का ईमानदार कार्यकर्ता हूँ, पार्टी मुझे जो कहेगी मैं वो करूंगा। लेकिन मेरा व्यक्तिगत तौर पर मानना है कि मैं मध्यप्रदेश की साढ़े पांच करोड़ जनता से जुड़ा रहूँ। यह पूछे जाने पर कि सात जनवरी से शुरू होने वाली विधानसभा सत्र में शिवराज का क्या रुख रहेगा इस पर पूर्व मुख्यमंत्री ने हल्के अंदाज में कहा कि मैं सात जनवरी को कोई शिव-तांडव नहीं करूँगा। लेकिन भारतीय जनता पार्टी के अंदरखानों में जो रणनीति चल रही है उस रणनीति के चलते तो भाजपा से जुड़े सूत्र यही बताते हैं कि शिवराज को सत्ता से दूर होने का जितना गम सता रहा है वह कुछ न कुछ ऐसी रणनीति बनाने में लगे हुए हैं कि वह इस तरह की परिस्थितियां निर्मित करेंगे कि भाजपा पुन: सत्ता में आ सके और इस तरह के संकेत वह अपने मुख्यमंत्री निवास छोडऩे के समय दे चुके हैं। भले ही कमलनाथ और कांग्रेस पार्टी के नेता इसे हल्के में ले रहे हों लेकिन हकीकत यही है कि शिवराज और उनके रणनीतिकारों की छवि यह बताती है कि शिवराज और भाजपा के नेताओं को विपक्ष में बैठना रास नहीं आ रहा है और वह इस प्रयास में हैं कि आखिर सत्ता कैसे हासिल हो? जहाँ तक पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह का सवाल है तो शिवराज सत्ता पाने के लिये क्या कुछ कर सकते हैं, यह तो वह उमा भारती ही अच्छी तरह बता सकती हैं जिन्होंने कर्नाटक के तिरंगा विवाद के चलते मध्यप्रदेश की कुर्सी किस तरह से छोड़ी थी और बाद में जब वह उस मामले से निपटकर आ गई थीं तो शिवराज और शिवराज के रणनीतिकारों ने कैसे उन्हें भाजपा से बाहर निकालकर सत्ता हासिल की थी। तो वहीं प्रदेश के वह वयोवृद्ध और वरिष्ठ भाजपा नेता बाबूलाल गौर भी भुक्तभोगी हैं और वह यह जानते हैं कि सत्ता की खातिर शिवराज और उनकी मण्डली क्या कुछ नहीं कर सकती, क्योंकि उनके मुख्यमंत्रित्वकाल के समय एक छोटे से विवाद को शिवराज के रणनीतिकारों ने कितना तूल दिया था और किस प्रकार से दिया था तो राजधानी के वह राजनीतिज्ञ पंडित भी इस घटना से भलीभांति परिचित हैं कि तत्कालीन बाबूलाल गौर के खिलाफ आंदोलन कर रहे आंदोलनकारी धरना प्रदर्शन करने के पूर्व ७४ बंगले के किस बंगले से निकलकर उन सभी को अंजाम देते थे। इस बीच खबर यह भी है कि अपने शासनकाल में जिन ब्राह्मण नेताओं गोपाल भार्गव और नरोत्तम मिश्रा के सामने समस्याएं खड़ी कर उन्हें उनके कार्य में बाधा डाल उनका वर्चस्व कम करने की जो रणनीति शिवराज सिंह चौहान ने बनाई थी उसी रणनीति के चलते कमलनाथ की सरकार में नेता प्रतिपक्ष का भार शिवराज सिंह अपने प्रिय मित्र और पूर्व परिवहन व गृह मंत्री भूपेन्द्र सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाकर इन नेताओं के हक मारने की रणनीति शिवराज सिंह करने की तैयारी में हैं। अंदरखानों में खबर यह भी चल रही है कि शिवराज सिंह चौहान भले ही भाजपा के राष्ट्रीय नेताओं की शह पर कमलनाथ की सरकार को गिराने की रणनीति भले ही रच रहे हों लेकिन उन्हें पता है कि यदि सरकार गिरी तो भाजपा का केन्द्रीय नेतृत्व शिवराज सिंह को पुन: मुख्यमंत्री बनाने के पक्ष में नहीं है और उनकी बजाए नरोत्तम मिश्रा इस प्रदेश के मुख्यमंत्री बन सकते हैं। इस तरह की चर्चाओं के चलते भाजपा में चल रही चर्चा और उनके नेताओं के दावे में कितना दम है यह तो वही जानें लेकिन खबर यह भी है कि पार्टी हाईकमान शिवराज सिंह को दिल्ली बुलाना चाहता है, लेकिन शिवराज सिंह इस पक्ष में नहीं हैं कि वह दिल्ली जाएं कुल मिलाकर प्रदेश में पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व और शिवराज सिंह के बीच जिस तरह की रणनीति चल रही है उसके चलते इस प्रदेश में गोवा की तरह इतिहास दोहराए जाने की फिराक में भाजपा चल रही है। रणनीति यह है कि गोवा की तरह तीन-चार कांग्रेसी विधायक इस्तीफा देकर बहुमत साबित करने की संख्या घटा दें, दूसरी रणनीति यह भी है कि शिवराज जनता के बीच जाकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ माहौल बनायें। लेकिन वहीं भाजपा से जुड़े कुछ लोगों का यह भी कहना है कि यदि शिवराज की अपनी उठापटक और सत्ता पाने की राजनीति का जो इतिहास रहा है उस इतिहास के चलते उन्हें यह मालूम है कि अब पार्टी के राष्ट्रीय ने उन्हें प्रदेश की सत्ता पर वापिस भेजने के पक्ष में नहीं है और यदि शिवराज और भाजपा के नेताओं की रणनीति सफल रही तो इस प्रदेश की सत्ता की कमान शिवराज सिंह की बजाय नरोत्तम मिश्रा के हाथों सौंपी जा सकती है। शायद यही सब सोचकर शिवराज सिंह कांग्रेस सरकार के खिलाफ चल रही पार्टी की मुहिम में अंदरुनी तौर पर सक्रिय होते नहीं दिखाई दे रहे हैं बल्कि उसकी बजाय अपनी पार्टी के हाईकमान की मंशा को समझते हुए कि वह कितनी उठा-पटक करें उनकी अब प्रदेश की सत्ता में वापसी नहीं हो सकती इसलिए वह कुछ दिनों से कमलनाथ सरकार से गलबहियां करने का मूड बना चुके हैं और उसी गलबहियां की राजनीति के चलते अपने मित्र भूपेन्द्र सिंह को नेता प्रतिपक्ष बनाने के लिये सक्रिय हैं। देखना अब यह है कि उठा-पटक कर अभी तक सत्ता हासिल करने का जो रिकार्ड शिवराज सिंह का रहा वह इस बार सफल हो पाता है या नहीं

Latest News

Copyrights © Ghamasan.com