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शिप्रा की दुर्दशा देख कमलनाथ को लिखा खत | After seeing Shipra’s Plight: Vishwas Vyas has written Letter to CM Kamal Nath

Posted on: 24 May 2019 12:21 by Surbhi Bhawsar
शिप्रा की दुर्दशा देख कमलनाथ को लिखा खत | After seeing Shipra’s Plight: Vishwas Vyas has written Letter to CM Kamal Nath

इंदौर: महाकाल की नगरी उज्जैन में शिप्रा नदी का पानी इतना गंदा हो गया है कि लोग वहां नहाना तो दूर खड़े तक नहीं हो सकते। शिप्रा की दुर्दशा देश इंदौर के विशवास व्यास ने मुख्यमंत्री कमलनाथ को ख़त लिखा है।

आदरणीय कमलनाथ जी, माननीय मुख्यमंत्री,
मध्य प्रदेश ,
सादर वंदे ,

उम्मीद है आप चुनाव की व्यस्तता से फारिग हो गए होंगे ।
यह पत्र पिछले ही सप्ताह प्रेषित करना चाह रहा था परंतु आपकी व्यस्तता को ध्यान में रखकर अब भेज रहा हूं ।
मेरे विगत कर्मफल जनित दुर्भाग्य से , विगत दिनों मेरी प्रिय धर्मपत्नी श्रीमती प्राची व्यास का देहावसान हो गया। परंपरा अनुसार उनके उत्तर कार्य हेतु उज्जैन स्थित सिद्धवट तीर्थ जाना हुआ। आपको अवश्य ही जानकारी होगी कि सिद्धवट तीर्थ की पौराणिक, धार्मिक महत्ता है तथा अपने परिजनों की मुक्ति हेतु यहां प्रतिदिन सैकड़ों व्यक्ति उत्तर कार्य , पिंड दान इत्यादि करने आते हैं।

बेहद अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि वहां हर तरफ बेहद गंदगी का आलम है । नदी का पानी जिसका उपयोग उत्तर कार्य हेतु धार्मिक आस्था के निमित्त पूजन ,पिंड निर्माण इत्यादि में के लिए किया जाता है , वह नहाने तो ठीक पास खड़े रहने लायक भी नहीं है । नदी के किनारों पर घाटों से चार से पांच फीट तक गाद, कचरा इत्यादि जमा है।सीढ़ियों पर निर्माण सामग्री से लेकर राख, पूजन सामग्री पुष्प और मानव जनित गंदगी फैली है। पिंडदान के समय व्यक्ति को एकाधिक बार स्नान करना होता है , जिसके लिए वहां एक बड़ी पानी की टंकी है ,जिसमें मात्र दो नल है और उस से निकले पानी की निकासी की भी कोई उचित व्यवस्था नहीं है। सुलभ शौचालय पूजन स्थल से दूरी पर है। परंपरानुसार लोगों द्वारा छोड़े गए कपड़े इत्यादि यहां वहां फैले है।घाट पर कोई डस्टबिन नहीं है और नजदीकी डस्टबिन लगभग 50 मीटर से ज्यादा दूरी पर है।

आप समझ सकते हैं कि ऐसे में अपने परिजनों का उत्तर कार्य करना कितना बड़ा धर्मसंकट होता होगा। अपने पितरों की मुक्ति की उम्मीद पर यहां की अपवित्रता भारी पड़ती है । पहले से दुखी परिजन, इस माहौल में केवल आस्था से उपजे संस्कारों की वजह से उत्तर कार्य करता है अन्यथा यह अपवित्रता मन पर बोझ ही बढ़ाती है।

मैं ,उम्र, अनुभव, समझ और हैसियत में आपसे छोटा हूं सो आपको सलाह देने की धृष्टता तो नहीं कर सकता परंतु आपको, मध्य प्रदेश के कुटुंब का प्रमुख होने के नाते मैं अपना परिजन मानकर अधिकार पूर्वक आपसे अनुरोध करता हूं कि आप स्वयं या आपका कोई प्रतिनिधि वहां जाकर इस दृश्य को देखें और इन संभावनाओं पर विचार करें कि क्या वहां पुष्प इत्यादि के विसर्जन के लिए पृथक कुंड नहीं बनाए जा सकते? घाट पर स्नान और पूजन हेतु स्वच्छ जल की व्यवस्था नहीं की जा सकती ? लोगों द्वारा छोड़े गए वस्त्र ,राख इत्यादि का उचित उपचार नहीं किया जा सकता? क्या सिंहस्थ में करोड़ों रुपए खर्च करने वाला शासन अपने मृत नागरिकों के इस अंतिम अधिकार को पवित्रता से संपादित करने की सुविधा नहीं दे सकता?

यद्यपि मैं जानता हूं कि यह कार्य स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी में आता है परंतु अपनी व्यथा घर के बड़े के समक्ष कहना , मुझे उचित प्रतीत हुआ अन्यथा आपको किंचित भी कष्ट नहीं देता ।
श्रीमान, बैंकों से लिए भौतिक ऋण की माफी तो आप ने कर दी है पर हम लोगों पर इस अपवित्रता में किए, उत्तर कार्य से चढ़े पितृ ऋण की माफी कैसे होगी?

उम्मीद है,भविष्य में वहां जाने वाले लोगों के मन में मेरी तरह क्षोभ नहीं रहेगा , आप ऐसी व्यवस्था करेंगे।

यही सादर अनुरोध है और अपेक्षा भी,
आपका
विश्वास व्यास,
68 मिश्रा नगर, अन्नपूर्णा रोड, इंदौर

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