शशिकांत गुप्ते के कविता संग्रह ‘शब्दों के शहतीर’ का विमोचन आज हुआ

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शहर के प्रसिद्ध ज्योतिष , समाजवादी प्रखर नेता शशिकांत गुप्ते द्वारा लिखित काव्य संग्रह ‘शब्दों के शहतीर’ का विमोचन शनिवार 1 जून 2019 की संध्या के अवसर पर हिंदी साहित्य समिति के शिवाजी सभागार में एक बेहद गरिमामय कार्यक्रम में हुआ।

अतिथियों के द्वारा सरस्वती पूजन, दीप प्रज्वलन के पश्चात विमोचन कर्ताओं में राष्ट्रीय कवि सत्यनारायण सत्तन जिन्होंने कार्यक्रम की अध्यक्षता की विशेष अतिथि कांतिलाल बम निर्देशक आई कान सोसाइटी इंदौर, लॉ कॉलेज इन्दौर, विशेष अतिथि प्रख्यात साहित्यकार सूर्यकांत नागर एवं अतिथि इंटक के नेता सुंदर लाल यादव ने सम्मिलित रूप से किया। साहित्यकार रमाशंकर कपूर ने अतिथियों का परिचय देते हुए एक सारगर्भित उदबोधन दिया। शशिकांत गुप्ते ने अपनी साहित्य यात्रा के बारे में विस्तार से बताया।

सूर्यकांत नागर द्वारा शशिकांत गुप्ते पर प्रकाश डाला उन्होंने बताया कि ‘शब्दों के शहतीर’ एक काव्य संकलन ही नहीं वरन उनकी लघुकथाएं, कविताएं, व्यंग रचना आदि का सम्मिश्रण है। गुप्ते अपने रचना संसार में समाज को और बेहतर बनाने की प्रक्रिया से गुजरते हैं।

गुप्ते समाज में लुप्त होती मानवीय संवेदना के लिए विशेष चिंतित है। नागर ने संग्रह की ‘रोटी‘ कविता का जिक्र किया। पर्यावरण की दुर्गति के लिए भी गुप्ते परेशान नजर आते हैं। काव्य संकलन के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

कांतिलाल बम ने भी अपने उद्बोधन में शशिकांत गुप्ते की पुस्तक प्रकाशन हेतु उल्टे गुप्ते का ऋणी होना बताया। उन्होने उत्कृष्ट साहित्य प्रकाशन हेतु सदैव सहयोग के लिए कहा।

राष्ट्रीय कवि सत्यनारायण सत्तन ने अपने आशीर्वचन में और शब्दों के शहतीर की विवेचना की। सूर्यकांत -शशिकांत की मंच उपस्थिति उन्होने रेखांकित की।

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