शत-शत नमन उस समाजवादी योद्धा, जार्ज फर्नांडिस को

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George-Fernandes

जयशंकर गुप्ता

जो सत्तर-अस्सी के दशक में हमारे जैसे लाखों छात्र युवाओं के हीरो, संघर्ष की प्रेरणा और आश्वासन थे। जहां अन्याय, शोषण और उत्पीड़न और कुव्यवस्था के लिए संघर्ष था, वहां जार्ज थे। जार्ज साहेब के साथ समाजवादी युवजन सभा के एक छात्र युवा सिपाही से लेकर पत्रकार के रूप में भी हमारा गहरा जुड़ाव था। वह हमारे पिता समाजवादी नेता,स्वतंत्रता सेनानी, पूर्व विधायक स्व. विष्णुदेव के मित्र, नेता होने के साथ ही हमारे हीरो भी थे लेकिन संबंध मित्रवत ही थे। हमने उनके निवास पर रहकर फीचर एजेंसी, लेबर प्रेस सर्विस का काम किया था। बिहार प्रवास के दौरान भी लगातार उनसे जुड़ाव रहा। उनके साथ कई कार यात्राएं की। बहुत सारी स्मृतियां हैं। संजोकर लिखने की कोशिश करूंगा। एक मुश्किल यह है कि जिनके बारे में आप बहुत कुछ जानते हैं, उनके बारे में कुछ लिखना उतना ही दुरुह होता है। जिनकी दहाड़ से बड़े से बड़े सत्ता प्रतिष्ठान दहल जाते थे, जिनके भाषणों और लेखनी से संसद हिल जाती थी, जिनके एक इशारे पर बंबई का जनजीवन ठप हो जाता था, रेल का चक्का जाम हो जाता था, वह जार्ज फर्नांडिस चुपचाप इस दुनिया से चले गए। पिछले एक दशक से अलजाइमर की बीमारी के चलते रोग शैया पर पड़े न कुछ बोल समझ पाते थे और न ही किसी को पहिचान सकते थे। यह अलजाइमर भी उन्हें रक्षा मंत्री के रूप में हमारी सेना के जवानों की विकट जीवन दशा को जानने समझने के लिए बार बार उनकी सियाचिन ग्लेशियर यात्राओं की भी देन था। इस हिसाब से देखें तो उनका निधन हम सबके लिए दुखद होने के साथ ही पिछले एक दशक से मेडिकल साइंस की त्रासदी झेल रहे जार्ज साहेब की आत्मा की मुक्ति भी है लेकिन वह जिस हालत में भी थे, हम जैसे लोगों और दुनिया भर के, खासतौर से दक्षिण पूर्व एशिया के संघर्षशील लोगों के लिए प्रेरणा और आश्वासन थे कि जार्ज अभी जिंदा है।
जार्ज साहेब से जुड़ी स्मृतियों को सलाम। विनम्र श्रद्धांजलि।

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