एक देश-एक भाषा बवाल : शाह की सफाई- कभी नहीं कहा क्षेत्रीय भाषाओं पर थोपी जाए हिंदी

0
67

नई दिल्ली। केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाही ने हिंदी दिवस पर हिंदी भषा को लेकर दिए गए अपने बयान पर अब स्पष्टीकरण दिया है। उन्होने कहा कि ‘मैंने क्षेत्रीय भाषाओं पर हिंदी भाषा को थोपने की बात कभी नहीं कही। मैंने सिर्फ इतनी अपील की थी कि मातृभाषा के बाद दूसरी भाषा के रूप में हिंदी को सीखना चाहिए। मैं खुद गैर हिंदी भाषी राज्य गुजरात से आता हूं। अगर कुछ लोग इस पर राजनीति करना चाहते हैं, तो यह उनकी पसंद है।‘

शाह ने दिया था ये बयान

अमित शाह ने कहा था कि पूरे देश की एक भाषा होना चाहिए और हिंदी का विस्तार होना चाहिए। राजभाषा खत्म होने से इसका असर हमारी संस्कृति पर पड़ेगा। ऐसे में हमें इसमें लगातार सुधार करना होग। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि ‘आज हिंदी दिवस के अवसर पर मैं सभी नागरिकों से अपील करता हूं कि हम अपनी-अपनी मातृभाषा के प्रयोग को बढ़ाएं और साथ में हिंदी भाषा का भी प्रयोग कर देश की एक भाषा के पूज्य बापू और सरदार पटेल के स्वप्न को साकार करने में योगदान दें।’

रजनीकांत भी कर चुके हैं विरोध

शाह के इस बयान का अभिनेता रजनीकांत ने भी विारोध किया था। उन्होने कहा, ‘हिंदी को थोपा नहीं जाना चाहिए। न केवल तमिलनाडु बल्कि कोई भी दक्षिण राज्य हिंदी थोपे जाने को स्वीकार नहीं करेगा। केवल हिंदी ही नहीं किसी भी भाषा को थोपा नहीं जाना चाहिए। यदि एक आम भाषा होती है तो यह देश की एकता और प्रगति के लिए अच्छा होगा लेकिन किसी भाषा के जबरन थोपे जाने को स्वीकार नहीं किया जाएगा।’ उन्होंने आगे कहा, ‘विशेष रूप से, यदि आप हिंदी थोपते हैं, तो तमिलनाडु ही नहीं, बल्कि कोई भी दक्षिणी राज्य इसे स्वीकार नहीं करेगा। उत्तर भारत में भी कई राज्य यह स्वीकार नहीं करेंगे।’

कमल हासन ने भी जताई आपत्ति

गौरतलब है कि इससे पहले अभिनेता कमल हासन ने भी अमित शाह के बयान का विारोध किया था। हासन ने 16 सितंबर कोएक वीडियो अपलोड कर कहा था कि एक और भाषायी आंदोलन किया जाएगा जो कि तमिलनाडु में किए गए जल्लीकट्टू विरोध प्रदर्शनों की मुकाबले बहुत बड़ा होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने 1950 में लोगों से उनकी भाषा और संस्कृति की रक्षा करने का वादा करके गणतंत्र

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here