सेवा ही मेरा लक्ष्य: टिपानिया | Service is my Goal: Tipaniya

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Prahlad tipaniya-

देश की सबसे बड़ी संस्था जिसे संसद कहा जाता है। संसद के दोनों सदनों में से एक लोकसभा के चुनाव देश में होने जा रहे है। इस बार देवास-शाजापुर सीट पर कांग्रेस ने प्रहलाद सिंह टिपानिया को लोकसभा प्रत्याशी बनाकर जहां सबको चौंका दिया है, वही भाजपा को कहीं न कहीं मात देने की तैयारी कर ली है। ऐसा कांग्रेस के अधिकतर लोगों का मत है। टिपानिया पेशे से शिक्षक रहे एवं इस क्षेत्र में उनका जीवित जनसंपर्क रहा है। मृदुभाषी टिपानिया एक लोकप्रिय शिक्षक के साथ ही शुरू से ही सेवा भावी स्वभाव के रहे है।

एक ओर विशेषता टिपानिया को अलग ही स्थान प्रदान करती है, उनकी भजन गायकी। उनकी भजन गाने की कला एवं मां सरस्वती की असीम कृपा के कारण टिपानिया मालवा क्षेत्र में तो अत्यंत लोकप्रिय है ही। विदेशों में भी उनके भजन के शौंकीन मौजूद है। इसलिए विदेशी धरती पर भी टिपानिया ने कबीर भजनों की प्रस्तुति से अपनी व्यापक पहचान बनाई है। टिपानिया भजनों के माध्यम से समाज सुधार का व्यापक अभियान चलाते रहे है। समाज में व्याप्त बुराइयों को समाप्त करने का संदेश वे भजनों के माध्यम से जनजन को देते रहे है। टिपानिया से चर्चा के दौरान उन्होंने एक ही बात पर जोर दिया है- ‘सेवा ही मेरा लक्ष्य’।

जीवनभर दूसरों को शिक्षा देने का पुनीत कार्य करने वाले टिपानिया का लंबे समय से सेवा करना ही मुख्य लक्ष्य रहा है। विशेषकर समाज में उपेस्क्षित, गरीब-पिछड़े वर्ग के प्रति ईमानदारी से कार्य कर उन्हें समाज की मुख्य धाराओं में शामिल करना तो प्रमुख लक्ष्य होगा ही। समाज में सभी वर्गों को बिना भेदभाव के एक साथ लेकर चलने का भी टिपानिया का लक्ष्य है। मालवा क्षेत्र औद्योगित दृष्टि से पिछड़ा हुआ है। साथ ही लंबे समय से रेल सुविधा की भी बाट यह क्षेत्र जोह रहा है।. साथ ही बेरोजगारी की भी एक बड़ी समस्या है। अनेक समस्याओं से जूझ रहे इस क्षेत्र के लोगों को सेवा के माध्यम से सक्षम बनाने का लक्ष्य टिपानिया का है। पहले शिक्षा एवं भजनों के माध्यम से वे समाज सेवा करते रहे है। अब सरकार के एक प्रतिनिधि के रूप में जनता की सेवा करना चाहते है।

वैसे टिपानिया का राजनीतिक अनुभव नहीं के बराबर है लेकिन सरस्वती पुत्र होने के कारण वे क्षेत्र में सबसे लोकप्रिय है। टिपानिया पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के करीबी माने जाते है। निश्चित ही उनके करीबी होने का फायदा भी टिपानिया को इस लोकसभा क्षेत्र में मिल सकता है। सन 1998 में दिग्विजय एक धार्मिक कार्यक्रम में लुनियाखेड़ी आए थे तब से ही टिपानिया उनके संपर्क में है। इस नजदीकी के कारण उन्हें लोकसभा [रत्याशी कांग्रेस ने बनाया है। टिपानिया को 2011 में पद्मश्री सामान से भी नवाजा जा चुका है। इससे जनजन में उनकी पहचान बढ़ी है। साथ ही समाजिक समीकरण के कारण भी उनकी राह आसान बन सकती है। कुल मिलाकर टिपानिया का मूल उद्देश्य सेवाभाव है जो भविष्य में भी इसी तरह बना रहेगा। क्षेत्र के लोगों की सेवा ही टिपानिया का मुख्य लाश्य है और रहेगा।

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