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यह घोषणा पत्र देश के लिए तो नहीं, लेकिन भाजपा के लिए खतरनाक साबित होने वाला है | This announcement is not for the country but it is going to be dangerous for the BJP

Posted on: 03 Apr 2019 12:55 by shivani Rathore
यह घोषणा पत्र देश के लिए तो नहीं, लेकिन भाजपा के लिए खतरनाक साबित होने वाला है | This announcement is not for the country but it is going to be dangerous for the BJP

कांग्रेस ने मंगलवार को घोषणा पत्र जारी कर दिया। घोषणा पत्र जारी करने के बाद राहुल गांधी को अब पप्पू मानना भाजपा के लिए मुश्किल होगा। घोषणा पत्र पूरी तरह व्यावहारिक है। इसमें हवा हवाई बातें नहीं है। जनता को यही समझाने की कोशिश है कि जो वादे कांग्रेस कर रही है, वे पूरे किए जा सकते हैं। घोषणा पत्र जारी होने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता बम-बम हैं और भाजपा के कार्यकर्ताओं को बगलें झांकनी पड़ रही है। मोदी सरकार की नोटबंदी और जीएसटी लागू करने की घोषणा से अर्थव्यवस्था की जो धज्जियां उड़ी हैं, उसे वापस पटरी पर लाने के लिए राहुल गांधी ने व्यावहारिक उपाय बताए हैं।

गरीबों के लिए न्यूनतम आय योजना, सरकार में खाली पड़े 22 लाख पदों पर नियुक्तियों की घोषणा, करीब 10 लाख लोगों को पंचायतों में रोजगार मिलने की संभावना, युवाओं को स्वरोजगार शुरू करने में सहूलियत, मनरेगा के तहत रोजगार की गारंटी 100 दिन से बढ़ाकर 150 दिन, किसानों के लिए अलग बजट बनाने की घोषणा, जीडीपी की 6 फीसदी राशि शिक्षा के क्षेत्र में लगाने की घोषणा, स्वास्थ्य योजना, राष्ट्रीय सुरक्षा और आंतरिक सुरक्षा पर विशेष ध्यान।

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वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस के इस घोषणा पत्र पर अपनी वकील बुद्धि से अंग्रेजी में पलटवार किया है। उनका कहना है कि कांग्रेस के घोषणा पत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया है और जम्मू-कश्मीर को लेकर घोषणाएं सही नहीं है। अर्थव्यवस्था सुधारने संबंधी बातों पर ज्यादा नहीं बोलते हुए उन्होंने जनता से अपील की है कि कांग्रेस से सावधान रहें। यह घोषणा पत्र खतरनाक है। राहुल गांधी ने कहा है कि अंग्रेजों के जमाने का देशद्रोह का कानून कांग्रेस खत्म करेगी। इस पर जेटली का कहना है कि जो पार्टी ऐसी घोषणा करती है, वह एक वोट की भी हकदार नहीं है। उन्होंने कांग्रेस की न्यूनतम आय योजना को भी असंभव बताते हुए कहा कि इस अर्थव्यवस्था को फायदा होने वाला नहीं है। जेटली के प्रलाप को समझा जा सकता है, क्योंकि पूरी भाजपा अब तक यही मानकर चल रही थी राहुल गांधी पप्पू हैं और वे लोकसभा चुनाव में हमको चुनौती कैसे दे सकते हैं?

लोकसभा चुनाव के लिए अब तक के हुए प्रचार में भाजपा ही बाजी मारती हुई दिख रही है, क्योंकि नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री पद संभाल रहे हैं और वे अब तक के सबसे बड़े भाषणवीर नेता हैं। वे अपने भाषण मात्र से चुनावी माहौल को उलट-पलट कर देते हैं। यह 2014 के लोकसभा चुनाव में लोगों ने देखा है। उन्हें मौका मिला और वे योजनाबद्ध तरीके से प्रधानमंत्री पद पर इस तरह जम गए कि अब लंबे समय तक देश को अपने हिसाब से चलाना है। उन्होंने भारतीयों को बुद्धिहीन लोगों का समूह समझा और ऐसे तमाम झंझट पैदा किए, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को तकलीफ हो, लोगों में मनमुटाव बढ़े, लोग डरते रहें और हमेशा भाजपा को वोट देते रहें। उन्होने नोटबंदी कर दी जिससे अर्थव्यवस्था चौपट हुई। उसे संभालने के लिए उन्होंने कई नियम बनाए और बदले। उन्होंने जीएसटी लागू करने की घोषणा को ऐतिहासिक बनाने के लिए आधी रात को संसद का सत्र बुलाया और इसे दूसरी आजादी का नाम दिया। जीएसटी लागू होने के बाद व्यापारियों की शामत आ गई। जो झंझटें पैदा हुईं, उससे पार पाने के तरीके अब तक खोजे जा रहे हैं।

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पिछले तीन-चार साल से जारी आर्थिक नीतियों से रोजगार के क्षेत्र में जो गड्ढा पड़ा है, उसे भरने की बजाय सरकार अपनी ही संस्थाओं के सर्वेक्षणों की रिपोर्ट रोक रही है। वे लीक होकर अखबारों में छपती हैं, जिससे पता चलता है कि बेरोजगारी कितनी बढ़ रही है। मोदी सरकार यह मानने के लिए तैयार नहीं है कि कोई गलती हुई है। अगर अरुण जेटली कांग्रेस के घोषणा पत्र को खतरनाक बता रहे हैं तो गलत नहीं है। यह घोषणा पत्र देश के लिए तो नहीं, लेकिन भाजपा के लिए खतरनाक साबित होने वाला है। अगर लोगों ने इस घोषणा पत्र पर भरोसा करते हुए कांग्रेस को वापस लाने का विचार कर लिया तो भाजपा के सारे मंसूबे धरे रह जाएंगे, जो कि वह वायुसेना से पाकिस्तानी इलाके में बम फिंकवाने के बाद से पाले हुए है।

अगर भारतीयों को एक कल्पित भय से मुक्त होना है तो सरकार भी लोकतंत्र के हिसाब से होनी चाहिए। दो ढाई लोग अपनी मर्जी से देश को चलाने लगें, यह ठीक नहीं है। पहले जनता को वर्गों में बांटना और फिर उनमें एक-दूसरे के प्रति डर की भावना पैदा करना शासन करने की इच्छा रखने वालों का बहुत पुराना आजमाया हुआ तरीका है। इस समय चुनाव जीतने के लिए हिंदुओं में मुसलमानों से भय और मुसलमानों में हिंदुओं से भय पैदा करने का काम हो रहा है। यह भय अनावश्यक लड़ाइयों को जन्म देता है, जो यह देश लंबे समय से भुगत रहा है। जब लोग धीरे-धीरे समझदार हो रहे हैं तो उनको फिर से भयभीत लोगों के झुंड में तब्दील करने की तरकीबें भिड़ाई जा रही हैं। क्या इस देश के भारतीय, जिनमें हिंदुओं की संख्या सबसे ज्यादा है, क्या इतने गए गुजरे हैं कि उन्हों कोई भी भेड़ों के झुंड में तब्दील करके अपनी राजनीति कर ले?

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जो भी ऐसा करने की कोशिश करता है, देश की जनता उससे अहिंसक तरीके निबट लेती है। भारतीय लोग सदियों से यही करते आए हैं। उन्होंने बड़े-बड़े राजाओं को निबटाया, बादशाहों को सड़क पर बैठाया, अंग्रेजों को यहां से रवाना किया, कांग्रेस मनमानी करती दिखी तो उसे भी तीन बार सबक सिखाया। अपने एकतरफा बड़बोलेपन में प्रधानमंत्री मोदी यह भूल गए हैं कि जिस कांग्रेस को सबक सिखाने के लिए जनता ने उन्हें सत्ता सौंप दी है, वही जनता उन्हें सत्ता से हटा भी सकती है। सत्ता से चिपटे रहने के लिए भाजपा ने हिंदुत्व का सहारा लिया और उसके हिंदुत्व की परिभाषा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने तय की है। हिंदुत्व की यह परिभाषा स्वामी विवेकानंद और महात्मा गांधी की परिभाषाओं से बहुत अलग है। इसमें किसी न किसी के खिलाफ एक उन्माद की स्थिति बनाए रखने का कुचक्र है, जो सभ्य समाज में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

आगामी लोकसभा चुनाव में अगर कोई हिंदुत्व के नाम पर मोदी सरकार को वापस लाने के लिए वोट देता है, तो यह हिंदुत्व के खिलाफ होगा। इस सरकार ने हिंदुत्व की प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला कोई कार्य नहीं किया है। उलटे जनसाधारण को कंगाल बना देने की नीतियां अपनाई हैं, जो कि हिंदुत्व को कलंकित करने जैसी हैं। अब हिंदुत्व को राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम से परिभाषित किया जा रहा है। वह पाकिस्तान, उसमें आतंकी अड्डे, राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है, राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भाजपा को जिताना है, जो लोग पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं, उन्हें हराना है। भाजपा नेता इसी तरह का प्रचार कर रहे हैं। हकीकत यह है कि पाकिस्तान खुद अपनी मुसीबतों में घिरा हुआ है। उसका नाम ले-लेकर भारत में चुनाव जीतने की कोशिशें कब तक चलती रहेंगी?

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कांग्रेस का घोषणा पत्र जारी करते हुए राहुल गांधी ने जो समझदारी दिखाई है, उससे भारतीयों में फिर से भरोसा बनेगा कि यह देश सुरक्षित है। देश की सुरक्षा इसी में है कि लोग खुशहाल रहें, आपसी भाईचारे से जीवन गुजारें और तरक्की में योगदान दें। जहां लड़ने-मरने की, धमकियों की बातें होती रहेंगी, वहां लोग खुशहाल कैसे रह सकते हैं? कांग्रेस का घोषणा पत्र देश में खुशहाली के पैगाम की तरह है। इससे दुबारा सरकार बनाने पर आमादा भाजपा कितना बौखलाती है, यह आने वाले दिनों में देखने की बात होगी। लोगों की सावधान रहने की भी जरूरत है कि कोई प्रायोजित उपद्रव न हो जाए, जिससे कि सत्ता फिर गलत हाथों में चली जाए।

वरिष्ठ पत्रकार ऋषिकेश राजोरिया…

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