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खुले में सड़ रहे गेहूं पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े की टिप्पणी

Posted on: 19 May 2018 08:38 by krishna chandrawat
खुले में सड़ रहे गेहूं पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े की टिप्पणी

इंदौर: किसान के खून पसीने से सींचा गेहूं खुले में सड़ रहा है, और सरकार के पास इसके भण्डारण के लिए  व्यवस्था नहीं है।

आपको बता दे देश में गेहूं की बम्पर आवक के बाद सरकार ने अभी तीन करोड़ से भी ज्यादा गेहूं खरीद की थी।

लेकिन सरकार के पास उसे संभालने के लिए पुख्ता इंतजाम नहीं है, ऐसे में यदि प्री मानसून बरसात शुरू होती है तो गेहूं का सड़ना तय है।

सुप्रीम कोर्ट ने देश की सरकार को फटकार लगते हुए कहा था की अगर इतना गेहूं है तो उसे गरीबो में क्यों नहीं बाट देते।

इसके बाद भी सरकार अपना पुराना तरीका अपनाएं हुए है, आइये जानते हैं इस पर वरिष्ठ पत्रकार अशोक वानखेड़े की टिप्पणी ।

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