सेल्फी लेने वाले एक बार जरुर पढ़ ले, हो सकती है ये खतरनाक समस्या

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आज के समय में लोग स्मार्टफोन का बहुत उपयोग करते है. स्मार्टफोन का हद से ज्यादा उपयोग मस्तिष्क पर गहरा असर डालता है. जिन्हें सेल्फी लेने की लत होती है उन्हें सेल्फीटिस कहा जाता है.

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कई बार ऐसा होता है कि व्यक्ति का मोबाइल आसपास न होने पर घबराहट होने लगती है. ऐसी स्थिति को नोमोफोबिया कहा जाता है. थोड़ी-थोड़ी देर में उन्हें फोन देखने की इच्छा होती है. हर जगह वे फोन को अपने साथ लेकर जाते हैं. ऐसा न करने पर चिड़चिड़ापन व बैचेनी होने लगती है. स्मार्टफोन ही नहीं इंटरनेट न होने पर भी इस प्रकार के लक्षण दिखाई देते हैं.

लगातार मोबाइल की स्क्रीन को देखने से दृष्टिदोष उत्पन्न हो सकते हैं. गर्दन झुकाकर फोन में देखते रहने से उसमें अकड़न आ जाती है जिससे टेक्स्टिंग नेक की समस्या हो सकती है. ज़्यादा टाइपिंग से कलाई में दर्द होने लगता है जिसे कार्पल टनल सिंड्रोम कहते हैं. कोहनी को मोड़कर रखने से टेनिस एल्बो की समस्या हो सकती है. सेल्फी की अधिकता के कारण कंधों में दर्द बढ़ सकता है.

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स्मार्टफोन बढ़ती उम्र के बच्चों पर प्रतिकूल असर डालता है. कम उम्र में ही बच्चों के स्मार्टफोन चलाने को उनकी होशियारी मान लिया जाता है. धीरे-धीरे उनमें यह आदत आक्रामक रूप ले लेती है. ऐसे कई मामले सामने आए है कि गेम की ज़िद वजह से बच्चे हिंसा पर उतारू हो जाते हैं और ख़ुद को नुक़सान पहुंचाने लगते हैं. ब्लूव्हेल गेम जैसे ख़तरनाक गेम्स के लोकप्रिय होने के पीछे कारण हमारा जागरूक न होना ही है.

इन सब परेशानियों से बचने के लिए सबसे पहले यह समझ ले कि हम इसे पूरी तरह से नहीं छोड़ सकते है, क्योंकि यह एक हद तक ज़रूरी भी है. इसके लिए सामंजस्य बैठाकर चलाना जरुरी है. दूसरा यह कि हमें पहचानना होगा कि हम इससे बंधे हुए हैं. बचपन से ही बच्चों में स्मार्टफोन से दूर रहने की आदत डालनी होगी क्योंकि 15-16 की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते वे इसके आदी हो जाते हैं. जब परिवार साथ हो तो बच्चों को ही नहीं बड़े भी फोन से दूर रहें.

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