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चमकी बुखार पर SC का दखल, केंद्र-बिहार सरकार से मांगा जवाब

Posted on: 24 Jun 2019 11:55 by Surbhi Bhawsar
चमकी बुखार पर SC का दखल, केंद्र-बिहार सरकार से मांगा जवाब

पटना: बिहार में लगातार बढ़ रहा चमकी बुखार का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। चमकी बुखार की चपेट में आने से लगातार बच्चों की मौत हो रही है और अब मौत का ये आंकड़ा 152 पर पहुंच गया। बुखार को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और बिहार सरकार को फटकार लगाते हुए इस मामले में 10 दिन में रिपोर्ट मांगी है।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों सरकार से तीन मुद्दे पर हलफनामा दायर करने को कहा है जिसमें हेल्थ सर्विस, न्यूट्रिशन और हाइजिन का मामला है। कोर्ट ने कहा कि ये मूल अधिकार हैं, जिन्हें मिलना ही चाहिए। इतना ही नहीं कोर्ट ने सरकार से ये भी पूछा कि क्या इसको लेकर कोई नीति बनाई गई है?

शीर्ष अदालत ने कहा कि हमने कुछ रिपोर्ट्स में पढ़ा है कि कई गांव ऐसे हैं, जहां पर कोई बच्चा ही नहीं बचा है। उत्तर प्रदेश में भी कुछ ऐसी ही स्थिति थी, वहां पर सुधार कैसे आया. अदालत ने सरकारों को दस का समय दिया है और इस मामले में जवाब मांगा है।

नीतीश सरकार की पहली कार्रवाई

नीतीश सरकार ने चमकी बुखार के संबंध में कार्रवाई करते हुए श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर भीमसेन कुमार को निंलबित कर दिया है। डॉ पर ये कार्रवाई कार्यस्थल पर लापरवाही बरतने के आरोप में की गई है। प्रशासन का कहना है कि तैनाती के बाद भी बच्चों की मौत के मामले सामने आए और हालात पर काबू नहीं पाया जा सका।

बिहार से स्वास्थ्य विभाग ने पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के बाल रोग विशेषज्ञ भीमसेन कुमार को 19 जून को एसकेएमसीएच में तैनात किया था। उनकी तैनाती के बाद भी अस्पताल में बच्चों की मौतों का सिलसिला नहीं रुका।

अस्पताल की स्थिति

डॉक्टर्स का कहना है कि चमकी बुखार से हो रही बच्चों की मौतों को रोका जा सकता है, यदि अगर मुजफ्फरपुर में गरीब परिवारों के पास अच्छा खाना, साफ पानी और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिलें। दिमागी बुखार कहे जाने वाले चमकी बुखार से 16 जिले में करीब 600 बच्चें प्रभावित है। अस्पतालों का हाल बेहाल है। मरीजों के उपचार के लिए अस्पताल प्रशासन के पास सही ढंग से बेड तक नहीं है।

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