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बचाइए बुंदेलखंड की विरासत, वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल की कलम से| Save the Bundelkhand legacy, from the pen of senior journalist Rajesh Badal

Posted on: 26 Oct 2018 15:15 by krishnpal rathore
बचाइए बुंदेलखंड की विरासत, वरिष्ठ पत्रकार राजेश बादल की कलम से| Save the Bundelkhand legacy, from the pen of senior journalist Rajesh Badal

आज़ादी के बाद सब कुछ बदल गया । एक ग़रीब देश संसार में महाशक्ति के तौर पर उभरा है। इसके पीछे सत्तर साल तक इस देश की मेहनत और संकल्प है । लेकिन कुछ इलाके ऐसे भी हैं ,जो अनेक मामलों में अभी भी पचास बरस पीछे हैं । बुंदेलखंड ऐसा ही क्षेत्र है। दरअसल स्वाधीनता से पहले यह एक पूर्ण राज्य था । मुल्क़ अंग्रेजों से रिहा हुआ तो बुंदेलखंड के कलेजे पर बँटवारे की तलवार चल गई।दो टुकड़े हो गए।एक तरफ़ नए नए रसायनों के मिश्रण से नक़ली विरासत के असली राज्य बनते गए तो दूसरी तरफ़ बुंदेलखंड कीअसली विरासत पर नक़ली मुखौटे चिपका दिए गए।

दुनिया की रफ़्तार के साथ देश दौड़ता रहा।यहाँ के लोग भी थकते, हाँफते, भूखे , प्यासे संग संग कदमताल करते रहे,मगर उनके रंजोगम किसी ने न देखे।बुंदेलखंड के घाव रिसते रहे,मरहम पट्टी दूसरे प्रदेशों की होती रही।नए राज्य के लिए नहीं,बल्कि टूटे दिलों और टुकड़ों को जोड़ने के लिए लोग अपना राज्य माँगते रहे।किसी ने न सुनी।यहाँ के राजनेता आपस में लड़ने और अपना घर भरने में मशरूफ रहे।

एक बार फिर दर्द का दरिया बह निकला।अपनी विरासत बचाने के बहाने।अयोध्या के असल रामराजा के अपने शहर ओरछा में सागर, छतरपुर,झांसी,टीकमगढ़,महोबा, हमीरपुर,दतिया,उरई-जालौन,पन्ना और दमोह जिलों से बड़ी संख्या में आए लोग अपने सरोकारों के साथ एकत्रित हुए ।इसे जोड़ने का काम किया सफ़िया ख़ान ने,जो बुंदेलखंड की नहीं हैं । लेकिन उनके कामों ने उन्हें इस राज्य की बेटी बना दिया है । अनेक साल से वे बुंदेली विरासत बचाने के लिए गाँव गाँव भटक रही हैं और लोगों को जोड़ रही हैं ।इस साल इस यज्ञ में एक आहुति देने के लिए उन्होंने मुझे भी न्यौता भेजा था । उनके इस काम में परदे के पीछे से अनेक धुनी-गुनी लोग मदद कर रहे हैं ।

इनमें एक हैं टीकमगढ़ की पूर्व रियासत के उत्तराधिकारी श्री मधुकरशाह और मरुधर शोध संस्थान,राजस्थान से भँवर भादानी । श्री भादानी जानेमाने इतिहासकार और शिक्षाशास्त्री हैं । उनसे मिलने का अवसर मिला । इसके अलावा राजस्थान के श्री गिरिराज कुशवाह से भी भेंट चमत्कारिक रही। श्री कुशवाह पूर्व आईएएस हैं और अपनी विशिष्ट कार्यशैली तथा ईमानदारी के लिए देश भर में विख्यात हैं ।श्री गुणसागर सत्यार्थी, श्री अवस्थी,श्री रज्जुराय,श्री हर गोविंद विश्व,उत्तर प्रदेश बौद्ध विकास केंद्र के हरगोविंद कुशवाह ,झांसी के पूर्व मंत्री ओम प्रकाश रिछारिया और अनेक मनीषियों तथा पुराने मित्रों से मिलने का सौभाग्य मिला ।

इस अवसर पर हुए एक परिसंवाद में भावुक वक्ताओं के विचार सैलाब की तरह बह निकले । पंडित इसहाक ख़ान ने अपनी चंग पर जिस तरह ओरछा के रामलला की कहानी सुनाई,लोगों के आँसू बह निकले । साहित्य,संस्कृति,कविता,लोकगीत, कलाएँ , परंपराएँ,ऐतिहासिक इमारतें,पर्यटन,खेती से लेकर आज़ादी के आंदोलन तक सभी कुछ । फेसबुकिया नोट में सारा कुछ लिखना मुमकिन नहीं ,लेकिन लब्बोलुबाब यह कि बुंदेलखंड अब जाग उठा है । दोनों बड़ी पार्टियाँ छोटे राज्य बनाती रही हैं । मानती हैं कि छोटे राज्य तेज़ी से विकास करते हैं ।लेकिन बुंदेलखंड के मामले में उनकी नानी मर जाती है । कुछ चित्र इसी अवसर के हैं । बेतवा नदी के किनारे अपना चित्र लेने का लोभ संवरण न कर पाया ।

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