सावन माह: शिव की पूजा में कभी ना रखें ये चीज, बनते काम बिगड़ जाएंगे

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सावन का महीना चल रहा हैं और इस पूरे महीने में भक्त भगवान शिव की पूजा आराधना कर कें उन्हें खुश करने में लगे हुए हैं। भगवान भोलेनाथ को खुश कर उनका आशिर्वाद पाना कौन नहीं चाहता, हर कोई यही चाहता हैं कि भगवान भोलेनाथ की कृपा हमेशा उन पर बनी रहे हैं। भगवान भोलेनाथ भोले हैं उन्हें खुश करने के लिए ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ती हैं बस रखना होता हैं तो थोडा ध्यान इस बात पर कि भोलेनाथ की पूजा में क्या सामान नहीं होना चाहिए।

इन चीजों को रखें शिव की पूजा से दूर

1- पुराणों में भगवान शिव की पूजा में हल्दी का प्रयोग करने पर मनाही हैं। हिन्दू मान्याओं के अनुसार मांगलिक एवं धार्मिक कार्यों में हल्दी को शुभ माना जाता है। हल्दी का सौंदर्य प्रशाधन में भी महत्वपूर्ण स्थान हैं और शिवलिंग पुरुषत्व का प्रतीक है, इसलिए भोलेनाथ को हल्दी अर्पित नहीं की जाती है।

2- भगवान शिव की पूजा करते समय इस बात का खास तौर पर ध्यान दें कि उनकी पूजा में तुलसी के पत्तों का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए। शिव को तुलसी अर्पित ना करने के पीछे एक कथा हैं मान्यता हैं कि भगवान शिव ने वृंदा के पति जलंधर का वध किया था, इसमें भगवान विष्णु ने जलंधर का रुप धारण करके वृंदा के पतिव्रता धर्म को तोड़ दिया था। यह बात जानने पर वृंदा ने आत्मदाह कर लिया, उस जगह पर तुलसी का पौधा उग गया। वृंदा ने शिव पूजा में तुलसी के न शामिल होने की बात कही थी।

3- पुराणों में माना गया हैं कि नारियल के पानी से भगवान शिव का अभिषेक नहीं किया जाना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार नारियल को लक्ष्मी का स्वरुप माना जाता है और लक्ष्मी भगवान विष्णु की पत्नी हैं।

4- भगवान भोलेनाथ की पूजा में रोली भी नहीं लगाई जाती है। भगवान शिव भस्म को धारण करते हैं और इसलिए ही उन्हें रोली नहीं पहलाई जाती हैं।

5- भक्तों को इस बात का खास तौर पर ध्याान रखना चाहिए कि भगवान शिव की पूजा में शंखनाद कभी नहीं किया जाता हैं और न ही शंख से उनका जलाभिषेक किया जाता है। उन्होंने शंखचूर नामक राक्षस का वध किया था, इसलिए उनकी पूजा में शंख निषेध है।

6- भगवान शिव की पूजा में कुछ फूलों को चढ़ाना निषेध माना जाता हैं। भोलेनाथ को कभी कनेर, कमल, लाल रंग के फूल, केतकी और केवड़े के फूलों को नहीं चढ़ाना चाहिए।

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