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पुत्रदा एकादशी: पुत्र रत्न चाहते है तो कीजिए ये व्रत

Posted on: 18 Aug 2018 14:11 by shilpa
पुत्रदा एकादशी: पुत्र रत्न चाहते है तो कीजिए ये व्रत

Shravan maas ekadashi vrat katha.

क्या होती है पुत्रदा एकादशी?
हिन्दुओं में एकादशी का एक विशेष महत्व है. पुत्रदा एकादशी हिन्दुओं के लिए एक पवित्र दिन है. ये दो तरह की होती है. एक श्रावण मास में आती है और दूसरी पौष मास में. शाब्दिक पुत्रदा एकादशी का मतलब है बेटे का योगदान.

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विशेष रूप से मानते है वैष्णव
श्रवण में अन्य पुत्रदा एकादशी जो जुलाई-अगस्त में आती है उसी को पुत्रदा एकादशी कहा जाता है. इस दिन जोड़े से पति-पत्नी व्रत रखते है और एक बेटे के लिए भगवान विष्णु की पूजा करते है. ये दिन विशेष रूप से वैष्णव, विष्णु के समर्थकों द्वारा मनाया जाता है.

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एक निश्चित लक्ष्य के लिए
हिन्दू समाज में बेटे को महत्वपूर्ण सोचा जाता है क्योंकि वो अपने जीवन में अपने माँ-बाप के बुढ़ापे में उनकी देखभाल करता है. प्रत्येक एकादशी का व्रत एक निश्चित लक्ष्य के लिए किया जाता है. बेटा होने का लक्ष्य इतना बड़ा होता है की दो पुत्रदा एकादशियां उसके लिए समर्पित है.

श्रावण और पौष
प्रत्येक एकादशी का व्रत आश्वस्त लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए किया जाता है. बेटे का होना इतना महत्वपूर्ण उद्देश्य है कि दो पुत्रदा, बेटों के दाता, एकादशी इस उद्देश्य के लिए समर्पित है. एक जुलाई-अगस्त के दौरान, श्रावण के महीने में आती है और दूसरी दिसंबर -जनवरी के दौरान, पौष के महीने में आती है. पौष पुत्रदा एकादशी उत्तर भारत में अधिक लोकप्रिय है, जबकि अन्य राज्यों में श्रावण पुत्रदा एकादशी लोकप्रिय है.

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पुत्रदा एकादशी की पूजा विधि
पुत्रदा एकादशी का व्रत 24 घंटे के लिए बिना कुछ खाये-पिए रखना. अगर आप एक पूरे दिन का उपवास रखने में समर्थ नहीं है तो आप एक आंशिक उपवास यानि की दूध और फल का सेवन करके हुए और भगवान विष्णु की पूजा करके, विष्णु सहस्त्रनाम को सुनके पुत्र की प्राप्ति कर सकते है.

पति और पत्नी दोनों व्रत और पूजा करे
आप खाने में चावल और अन्य अनाज का उपयोग न करे. बेऔलाद दंपति के मामले में पति और पत्नी दोनों को एक साथ भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और इस व्रत को रखना चाहिए.

पुत्रदा एकादशी जागरण और भजन कीर्तन करे
व्रत के दौरान जागरण करके समय बिताना चाहिए. रात का समय भगवान विष्णु का जाप करके और भजन कीर्तन करके बिताना चाहिए. भगवान विष्णु की विशेष पूजा करनी चाहिए. विष्णु या कृष्ण मंदिरों में जाएं और प्रसाद आदि चढ़ाये.

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