सरदार सरोवर तेरी यही कहानी, आंसू ज्यादा कम भरा है पानी,

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पिछले साल के वो दिसंबर के दिन थे। जब हम गुजरात में विधानसभा चुनावों के दौरान गुजरात के गांव गलियों की खाक छान रहे थे। हमारे एमपी से लगे इलाके में पहले दौर का मतदान होना था। मुझको नर्मदा जिले के चुनाव कवरेज की जिम्मेदारी मिली थी। भोपाल से उज्जैन फिर मेघनगर होकर हम मनीष गिरधानी से मिलते हुये वाइब्रेंट गुजरात के दाहोद भरूच होते हुये नर्मदा पहुंच गये थे। इसी नये बने जिले में केवडिया पडता था। केवडिया यानिकी वो जगह जहां सरदार सरोवर बांध और उसका बिजलीघर बना हुआ था। सरदार सरोवर इसलिये याद आ रहा है कि कल 17 सितंबर को ही पीएम नरेद्र मोदी ने अपने जन्मदिन पर पिछले साल इस विशाल परियोजना को देश को समर्पित की थी तो कायदे से कल सरदार सरोवर पूरे होने की कल पहली सालगिरह है।

राजपीपला यानि की नर्मदा जिले का मुख्यालय ऐतिहासिक शहर है। हर थोडी दूर पर पुराने गेट, गढी और महल दिख जाते हैं। यहां हमारे साथी राहुल पटेल ने जब बताया कि थोडी दूर पर ही केवडिया गांव है। जहां पर सरदार सरोवर बना है तो मन हो चला कि चलकर देखा जाये वो सरोवर जिसके खिलाफ कई बार कलम चलायी है अनेक बार इस परियोजना को लेकर हुये आंदोलनों का कवरेज किया है, साथ ही हमारे एमपी के हरसूद कस्बे से लेकर सैकडों गांवों, हजारों हेक्टेयर के जंगल और लाखों हेक्टेयर खेती की जमीन को डुबोने वाले सरोवर में ऐसी क्या ताकत है कि इसके खिलाफ उठे सारे विरोध उसी के सरोवर में ही डूब गये। राजपीपला से तीस किलोमीटर दूर है केवडिया की डेम साइट मगर उस विशाल बांधस्थल के थोडी दूर पहले ही एक और विशाल झांकी के दर्शन हो गये।

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ये स्टेच्यू आफ यूनिटी का ढांचा खडा था। कंक्रीट का 240 मीटर उंचा ढांचा जिसमें 182 मीटर की प्रतिमा लग रही है सरदार वल्लभ भाई पटेल की। पहले कंक्रीट की उंची दीवार फिर उस पर कसने को तैयार स्टील का जाल और उसके बाद उस पर चढे जाने थे कांसे यानिकी ब्रांज की बडी बडी मेड इन चाइना की चादरें। ये दुनिया की सबसे उंची प्रतिमा कहलायेगी जिसके बनने में तकरीबन तीन हजार करोड रूप्ये का खर्चा आ रहा था। लागत सुनकर हैरान नहीं होईये। अब प्रदेश और राप्ट के नये गौरव पुरूष की गौरव गाथा बताने में कुछ हजार करोड खर्च हो भी जायें तो क्या। राष्ट और उसका छिपा हुआ गौरव बताने में पिछली सरकारें भले ही चूक गयीं हों मगर मोदी जी की सरकार इन मामलों में समझौता नहीं करती ये हम इतने दिनों में देख चुके हैं। आपको बता दें कि अगले महीने की तीस तारीख को इस प्रतिमा का अनावरण भी मोदी जी करने वाले हैं। हमारे राहुल ने बताया कि पिछले एक महीने में दो बार स्वयं मोदी जी आकर तैयारियों का जायजा ले चुके हैं। आम आदमी सरोवर और प्रतिमा के गांवों की तरफ जा नहीं सकते सारे रास्ते खोद दिये हैं नये रास्ते बनाने के लिये।

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सरदार पटेल की ये विशाल प्रतिमा सरोवर की ओर मुंह किये हुये हैं। ऐसा लगता है कि सरदार पटेल कमर पर हाथ रखकर उस विशाल सरोवर की ओर निहार रहे हैं जो उनके नाम पर ही बना है और इसे गुजरात की जनता की आन बान शान का प्रतीक बना दिया गया है। सरदार सरोवर पहुंच कर सबसे पहले हम सुरंग से उस बिजलीघर में पहुंचे जहां पर बने हुये टरबाइनों को पानी से घुमाकर बिजली पैदा की जा रही है। वहां बने नक्शों में दावा किया जा रहा था कि इस परियोजना की 57 प्रतिशत बिजली मध्यप्रदेश, 27 फीसदी महाराष्ट और सिर्फ 16 वां हिस्सा ही गुजरात को मिल रहा है। बिजलीघर से निकल कर जब हम बांध की विशालकाय दीवार पर चढे तो एक तरफ विशाल सरोवर तो दूसरी तरफ बांध की दीवार से रिसकर बहता पानी दिख रहा था। दीवार पर बांध के 30 गेटों में से किसी एक को खोलकर उसकी मरम्मत का काम क्रेन से जारी था।

350 टन के इन गेटों को हटाना आसान काम नहीं होता यहां बहुत शोर हो रहा था मगर मेरा मन तो बार बार शांत पडे सरोवर के पानी में जा रहा था। दूर दूर तक इस पानी का ओर छोर नहीं दिख रहा था। ना पानी में लहरें थी ना उल्लास ना ही बहाव। देखकर ऐसा लग रहा था कि लाखों लोगों के घर बार खेती बाडी और जंगल को अपने में समाये ये पानी अपनी बेबसी दिखा रहा था। कह रहा था कि मुझ पानी का क्या कसूर मैं तो खुलकर बहना चाहता हूं। कसकर और बंधकर रहना मेरी आदत नहीं है। अब जब तुमने मुझे बांध बनाकर बांध ही लिया है तो तुम्हीं खुश हो तो इतरा लो मेरी विशालता देखकर। सर एक फोटो हो जाये। ये हमारे कैमरामेन होमेंद्र और राहुल थे जो इस असीम जलराशि के सौंदर्य को अपने मोबाइल के कैमरों में कैद करने को बेताब थे मगर मुझे तो इस पानी में नर्मदा घाटी के लाखों लोगों के अांसू दिख रहे थे। कोई नही हटेगा बांध नहीं बनेगा के नारों के गूंज सुनाई दे रही थीं। ले मशालें चल पडे हैं लोग मेरे गांव के, अब अंधेरा काट लेगे लोग मेरे गांव के ,,, मगर जब वो गांव ही नहीं रहे तो किस अंधेरे को हटाने के लिये बिजली की बात करें हम। लौटते में राहुल ने कहा कि सर इस बांध से बनी बिजली हमारे पीपलया और यहां के गांवों को नहीं मिलती और यहां गांव की पानी की टंकियां भी अक्सर खाली ही रहती हैं, नदी के पानी का बहाव कम होने से भरूच शहर में दरिया आ गया है और वहां के लोग खारा पानी पीते हैं,,,मैं कुछ सुन नहीं पा रहा था,,

ब्रजेश राजपूत,

एबीपी न्यूज,

भोपाल

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