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सपना के ठुमके, सत्ता की रागनी और कांग्रेस, अजय बोकिल की कलम से

Posted on: 26 Jun 2018 09:44 by Ravindra Singh Rana
सपना के ठुमके, सत्ता की रागनी और कांग्रेस, अजय बोकिल की कलम से

घटिया आरोप-प्रत्यारोप, निचले स्तर पर उतरती राजनीति और हरदम सियासी स्वार्थों के बीच झूलते देश में एक ‍दिलचस्प देसी कमेंट पढ़ने को मिला। खबर उड़ी कि कांग्रेस इस बार चुनाव में हरियाणा की मशहूर रागनी डांसर सपना चौधरी से चुनाव प्रचार करवाने वाली है। वो रोहतक से चुनाव भी लड़ सकती हैं। ये खबर पढ़कर कई शौकीनों की बांछें खिल गई। खबर का आधार यह था कि सपना ने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और श्रीमती सोनिया गांधी से मिलने की कोशिश की।

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इस पर हरियाणा के भाजपा सांसद अश्विनी कुमार चोपड़ा ने कटाक्ष किया कि ‘कांग्रेस में ठुमके लगाने वाले जो हैं, वही ठुमके लगाएंगे। उनको तय करना है कि ठुमके लगाने हैं या चुनाव जीतना है।‘ इसका सीधा मतलब यह है कि ठुमके लगाने भर से चुनाव नहीं जीता जाता। ठुमके चुनाव में भीड़ जुटाने में मददगार हो सकते हैं। लेकिन वो वोटों में भी तब्दील हों, यह जरूरी नहीं है।

सपना चौधरी ‍हरियाणा की बहुचर्चित और विवादित रागनी डांसर हैं। 28 साल की सपना अपने ठुमकों और झटकेदार डांस से हरियाणा के मर्द श्रोताअों को रिझाती रहती हैं। उनके डांस के क्रिकेटर क्रिस गेल तक दीवाने हैं। हरियाणा में रागनी से तात्पर्य एक लोकप्रिय लोकगीत विधा से है। स्थानीय भाषा में इसका उच्चारण ‘रागणी’ किया जाता है। यह लोक मंचों पर देसी वाद्यों और देहबोली के साथ गाए जाने वाले सस्ते और चटखारेदार लोकगीत होते हैं।

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इस तरह की रागनियां रचने में पंडित लखमीचंद का नाम आदर के साथ लिया जाता है। रागनी भी लोक नृत्य और लोकगीत का ही एक प्रकार है। इसका मूल भाव मनोरंजन है। इसे पेश करने के लिए शरीर में लोच, गले में मिठास और बोल्डनेस की दरकार होती है। शास्त्रीय रागनी से इसका दूर से रिश्ता है। हरियाणा में ऐसे रागणी मुकाबले और नृत्य कार्यक्रम बेहद लोकप्रिय हैं। इसमें डांसर महिला होती है, लेकिन दर्शक पुरूष ही होते हैं।

रागनी का चरित्र और मार शील और अश्लील की सीमारेखा पर झूलती रहती है। ज्यादातर दर्शक द्विअर्थी गीतों और डांसर द्वारा फेंके गए डायलाॅग पर झूमते हैं। नोट भी उछाले जाते हैं। हरियाणा में सपना के अलावा और भी रागनी डांसर हैं। जैसे कि पायल चौधरी। इसके अलावा एक और रागनी डांसर थी बीनू चौधरी। बीनू तो स्टेज पर अश्लील जोक्स भी बेधड़क सुनाती थी। बाद में उसका मर्डर हो गया। चूं‍कि हरियाणा की संस्कृति मूलत: ग्रामीण संस्कृति है, इसलिए इस तरह के डांसरों की खूब मांग और शोहरत भी है। लिहाजा चुनाव में भीड़ जुटाने और लोकरंजन के लिए ऐसी रागनियों का खूब सहारा लिया जाता है।

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सपना चौधरी ने अन्य रागनी डांसरों के मुकाबले काफी ऊंचा मुकाम हासिल कर लिया है। सपना को बाकी देश ने तब जाना, जब उसने अपनी ही एक रागनी के विवादित होने के बाद मिली आलोचनाअों से क्षुब्ध होकर जहर खा लिया था। लेकिन वह बच गई। इस रागनी में दलितों पर कुछ कमेंट था। इस पर सपना के खिलाफ एफआईआर भी हो गई थी। लेकिन चूंकि बदनामी भी नामवर होने का शाॅर्ट कट है, इसलिए सपना चौधरी बाॅलीवुड की चहेती भी बन गई।

उसने बिग बाॅस में अपने पंगेबाजी से शोहरत कमाई। हाल में वह फिल्म ‘वीरे दी वेडिंग ‘ फिल्म में अपने आयटम डांस के कारण विवादों में घिरी। विवाद का कारण जिस रागनी ‘तेरी आंख्या का यो काजल’ पे सपना नाची है, उस पर हरियाणा के ही एक और लोक गायक ने काॅपी राइट का केस कर दिया है। इसके पहले सपना और राखी सावंत के बीच एक डांस मुकाबला भी खूब वायरल हुआ। इस तरह के डांस के जानकारों का कहना है कि इसमें सपना ने महफिल लूट ली।

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जाहिर है कि इतनी शोहरत और सुर्खियां बनने की काबिलियत राजनीति में न्योते का बेस तो बनाती ही है। शायद इसी के चलते कांग्रेस को हरियाणा में अपनी खोई राजनीतिक जमीन फिर से पाने की संभावना दिखी हो। इस चर्चा को बल तब मिला, जब सपना दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय पहुंची। हालांकि मीडिया से उसने कहा कि मेरी मुलाकात का कोई राजनीतिक अर्थ न निकाला जाए।

मुझे सोनिया गांधी अच्छी लगती हैं, इसलिए मैं उनसे मिलने आई हूं। इसी संदर्भ में हरियाणा कांग्रेस के एक पदाधिकारी ने कमेंट किया कि सपना कांग्रेस से प्रभावित हैं। वे राज्य में कांग्रेस के बढ़ते ग्राफ को महसूस कर रही हैं। लेकिन सपना ने इस बात से इंकार किया कि वो कांग्रेस में शामिल हो सकती हैं। लेकिन वो प्रचार कर सकती हैं। जहां तक लोक कलाकारों के राजनीति में आने की बात है तो यह कोई नई बात नहीं है। हर पार्टी ऐसे कलाकारों की समाज में लोकप्रियता को राजनीतिक दृष्टि भुनाती है। ऐसे में सपना भी कांग्रेस के मंच पर सियासी रागनी गाती दिखे तो इसमें गलत क्या है?

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सवाल यह है कि अगर सपना कांग्रेस का प्रचार करेंगी तो वह कैसा होगा? क्या वो ठुमके लगाएंगी और इसके जरिए कांग्रेस के लिए वोट मांगेंगी? क्या लोग ठुमकों पर झूम कर कांग्रेस को फिर सत्ता के सिंहासन पर बिठा देंगे? क्या ठुमकों और वोटो में कोई सीधा रिश्ता है? कहा यह भी जा सकता है कि राजनेता सत्ता हासिल करने के बाद जुमलो और वादों के ‘ठुमके’ ही तो लगाते हैं, ऐसे में सपना यही काम पहले कर रही हैं, तो गैर क्या है? लेकिन भाजपा सांसद ने जो कटाक्ष किया है, उसका आशय यह है कि कांग्रेस पहले यह तय कर ले कि चुनाव को लेकर वह कितनी गंभीर है, क्योंकि ठुमकों से ही चुनाव जीते जाते तो ‍हरियाणा में कई रागनी गायक गायिकाएं आज राजनीति में होते।

भाजपा सांसद का तात्पर्य यह है कि चुनाव अब मैनेजमेंट से जीते जाते हैं। इस पद्धति में ठुमके लगाए नहीं, लगवाए जाते हैं। इन ठुमकों के लिए वोटर के ‘मन’ से लेकर मीडिया तक हर शै का इस्तेमाल ‍िकया जाता है। इसमें पार्टी नाचती नहीं, नचाती है। रागनी गाती नहीं, गवाती है। सत्ता के लिए बेकरार कांग्रेस ने सपना पर कितना भरोसा किया है, पता नहीं, लेकिन उसे समझना होगा कि सत्ता की रागनी ठुमके लगाने से नहीं, जनता जनार्दन को ठुमके लगवाने से मिलती है।

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