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मेघालय का तुर्रा ही है संगमा परिवार | Lok Sabha Election 2019 Profile Of Agatha Sangma Family Contesting From Tura

Posted on: 05 May 2019 18:43 by Surbhi Bhawsar
मेघालय का तुर्रा ही है संगमा परिवार | Lok Sabha Election 2019 Profile Of Agatha Sangma Family Contesting From Tura

मेघालय से निकलकर देशभर में छा जाने वाले पुर्णो अंगिटोक संगमा यानी पीए संगमा का परिवार आज भी समूचे मेघालय की राजनीति में छाया है। इस परिवार की पहचान कलगी में लगे तुर्रा की तरह ही है। बतौर लोकसभा अध्यक्ष उनका सदन चलाने का तरीका आज भी लोगों के जेहन में बसा है। विदेशी मूल का प्रधानमंत्री बनने के विरोध में कांग्रेस से बगावत कर पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस और फिर नेशनल पीपुल्स पार्टी बनाने वाले संगमा की बेटी अगाथा संगमा महज 29 साल की आयु में केंद्रीय मंत्री बन गई थी।

अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित तुर्रा संसदीय क्षेत्र से उनका मुकाबला राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के प्रत्याशी डॉ. मुकुल संगमा से हुआ। राजनीतिक उठापटक के लिहाज से डॉ. संगमा मजबूत प्रत्याशी हैं, लेकिन जिस प्रत्याशी का भाई राज्य का मुख्यमंत्री हो उसके लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं रहती। सत्तातंत्र का जो लाभ मिल सकता है वह सारा अगाथा को मिला ही है। इसके साथ ही उनकी पार्टी का भाजपा से गठबधन है, लिहाजा मोदी फेक्टर काम करेगा तो उसका लाभ भी अगाथा को मिलकर ही रहेगा।

हालांकि अगाथा पूरे दस साल बाद कोई मैदानी चुनाव लड़ रही है। इसके चलते उन्हें अपनी पहचान बताने में ही काफी परिश्रम करना पड़ा। जहां तक तुर्रा संसदीय सीट का सवाल है यह सीट 1971 में बनी और राज्य के 24 विधानसभा क्षेत्र इसमें आते हैं। इस सीट पर बारह चुनाव में से नौ तो खुद पीए संगमा ने ही जीते। उनके निधन के बाद हुए उपचुनाव में उनके पुत्र कारनॉड संगमा ने विजय हासिल की जो इन दिनों राज्य के मुख्यमंत्री है।

2008 में जब संगमा ने इस्तीफा दिया तो उपचुनाव में बेटी अगाथा संगमा चुनी गई। 2009 के चुनाव में भी वही इस सीट से चुनी गई। 2014 में उन्होंने पिता के लिए सीट खाली कर दी, लेकिन दो साल बाद ही उनका निधन हो गया। तब हुए उपचुनाव में अगाथा के भाई कारनॉड यहां से जीते। संगमा परिवार के अलावा यहां से चुनाव जीतने वालों में केआर मारक (1971) और सेनफोर्ड मारक (1989) ही शुमार है। बाकी पूरी सूची संगमा उपनाम से समाप्त होती है। पीए संगमा 1988 से 1998 तक एक दशक से कुछ ज्यादा समय तक राज्य के मुख्यमंत्री रहे औऱ राज्य के पहले पद्मविभूषण से अलंकृत नागरिक भी हुए। अब तुर्रा से कौनसा संगमा निर्वाचित होगा इसके लिए मतदान तो अप्रैल में ही हो चुका है।

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