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समोसे का आलू और राबड़ी देवी का विरह गीत | Rabri Devi’s Unique Song

Posted on: 10 Apr 2019 12:09 by shivani Rathore
समोसे का आलू और राबड़ी देवी का विरह गीत | Rabri Devi’s Unique Song

जब तक रहेगा समोसे में आलू, बिहार में रहेगा लालू… जी हां यही नारा दिया था राष्ट्रीय जनता दल सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने खुद के लिए। लालू यादव का यह कोई अकेला योगदान नहीं है बिहार या देश पर। फिलवक्त झारखंड की जेल में चारा घोटाले के विभिन्न मामलों में जेल काट रहे लालू कई मामलों में चर्चा में रहे हैं। कभी अपनी खास अदाओं से तो कभी गंभीर राजनीतिक तिकड़मबाजियों से राजनीतिक हलचल मचाकर।

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बहरहाल, इन दिनों उनकी पत्नी राबड़ीदेवी औऱ दो बच्चे तेजस्वी और तेजप्रकाश यादव उनकी कमी को पूरा करने के प्रयास कर रहे हैं। वैसे यह सच है कि लालू की कमी को इस तरह पूरा करना तो शायद परमात्मा के लिए भी संभव न हो। जहां तक राबड़ीदेवी का सवाल है जुलाई 1997 में जब चारा घोटाले में लालू यादव पहली बार गिरफ्तार किए गए थे तब उन्होंने तमाम राजनीतिक साथियों को दरकिनार कर अपनी धर्मपत्नी राबड़ी देवी को बिहार का मुख्यमंत्री घोषित कर दिया था। वह दौर था जब राबड़ीदेवी चार शब्द ठीक से नहीं बोल पाती थी।

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उनके मुख्यमंत्री बनने के तीन सप्ताह के भीतर ही पंद्रह अगस्त का दिन आ गया। तब वे राज्य की जनता को ठीक से संबोधित भी नहीं कर पाई थी। एक-दो वाक्य बमुश्किल कह सकी थीं। फिर भी लालू यादव(LaluYadav) की तिकड़मों का प्रताप था कि वे तीन बार राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। समय बदला औऱ अब लालू यादव की कोई तिकड़म काम नहीं कर रही है। केवल न्यायपालिका का कड़वा सच यानी जेल उनके सामने है। लालूजी की जुदाई और पारिवारिक बिखराव ने उन्हें भी कवि बना दिया है। हाल ही में उनकी एक कविता सुर्खियां बटोर रही है। इसमें लालूजी की याद है तो नरेंद्र मोदी(PMNarendraModi) के लिए श्राप भी है।

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कविता के बोल इस प्रकार हैं-

नैना थोड़े हैं नम, दिल में है ज़रा सा गम
पर हिम्मत न टूटी, न हुआ है हौसला कम।

बड़बोले पापी को लाएंगे जमीन पर हम,
इस साज़िश का बदला, बदलाव से लेंगे हम।

कोई कैसे करेगा जुदा, कोई कैसे करेगा जुदा।
जीवन में लालू हैं, जन जन में लालू हैं,
कण कण में लालू हैं, हर मन में लालू हैं।

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