अबोध उम्र में घर से निकले और ऊंचाइयों को छुआ संबित ने

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राजेश राठौर

सिर्फ तीन साल की उम्र थी। वह अबोध बालक घर से निकला था। उसको ये पता भी नहीं था कि वो एक दिन देश के प्रधानमंत्री के साथ उठेगा-बैठेगा। देश के हर टीवी चैनल का मुख्य पात्र होगा। समय ने ऐसी करवट ली कि बहुत कम उम्र में ही वह उन बुलंदियों पर जा पहुंचा जिसकी उसने कभी उम्मीद ही नहीं की थी।

हम बात कर रहे हैं संबित पात्रा की, जो भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं और कांग्रेस के खिलाफ हल्ला बोल अभियान के इन दिनों मुखिया बने हुए हैं। पात्रा को लेकर कहा जाता है कि वह राहुल गांधी पर सीधे हमले करते हैं। जोर से बोलने के साथ ही नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर लगने वाले आरोपों का जवाब भी दे देते हैं।

इन दिनों वह चुनाव के सिलसिले में इंदौर यात्रा पर हैं। संबित पात्रा से बातचीत शुरू हुई। कुछ नई बातों का खुलासा हुआ। उड़ीसा के सामान्य परिवार में जन्मे संबित के घर स्वामी चिन्मयानंद महाराज पहुंचे। महाराज ने संबित के माता-पिता से कहा कि ये बालक आगे जाकर बहुत कुछ बनेगा, इसको मुझे सौंप दो। उस समय संबित की उम्र महज तीन साल थी। उसके बाद वे महाराज के साथ चले आए। महाराज विश्व हिन्दू परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। महाराज के साथ रहकर संबित ने हिन्दी सीखी और बोलने का अंदाज भी। कम उम्र में ही बहुत कुछ सीखने को मिला। फिर वह भाजपा से जुड़े और पीछा पलटकर नहीं देखा। टीवी पर दहाड़ मारकर सामने वाले को डॉमिनेट करके अपनी बात रखने के सवाल पर बोले कि मैं अपनी बात ताकत से क्यों नहीं कहूंगा। कोई गलत सवाल करेगा, तो मैं कैसे सुनूंगा। जब उनसे पूछा कि आप कई बार अचानक टीवी बहस से उठकर चल दिए, तो वह कहने लगे ऐसा नहीं किया कभी मैंने। आप बताइये में कौन से शो से बाहर निकला। गलत बात न मीडिया को करना चाहिए न हम करेंगे।

मध्यप्रदेश में ब्यूरोक्रेसी के हावी होने के सवाल पर संबित कहने लगे वाकई अफसर हावी हैं, लेकिन ये दो-चार साल में नहीं किया जा सकता। मुझे मध्यप्रदेश का नहीं पता, लेकिन दिल्ली की अफसरशाही को पता चल गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने उनकी गलत बात नहीं चलेगी, तो आप देखिए कि वहां पर सुधार होते जा रहा है। पात्रा ने कहा कि हम चार दिन में सब कुछ ठीक नहीं कर सकते। ब्यूरोक्रेसी जानती है कि कुछ बदलाव हुआ है। कुछ मामले में सख्ती के साथ आगे बढऩा जरूरी है। प्रधानमंत्री मोदी के कामकाज को लेकर उठते सवालों पर कहने लगे कि मोदी को काम के लिए अभी और समय देना पड़ेगा। लोगों की मानसिकता है कि हमारा पड़ोसी टैक्स भरे, हम नहीं भरें। टोटल बजट केंद्र सरकार का चार-पांच लाख करोड़ रुपए के आसपास होता है। उसमें से आधे से ज्यादा पैसा तो सरकार चलाने पर ही खर्च हो जाता है। पब्लिक के लिए जो योजनाएं बनती हैं, उस पर सरकार थोड़ा कम-ज्यादा करती रहती है। जब तक टैक्स ज्यादा नहीं मिलेगा, तब तक देश का निकाल कैसे होगा। विकास के लिए बजट चार-पांच गुना करना पड़ेगा, तब कहीं जाकर देश का विकास होगा। जब पात्रा से पूछा कि वो विवाहित हैं, तो कहने लगे कि नहीं मैंने शादी नहीं की है और शायद करूंगा भी नहीं। मेरा कोई बैंक अकाउंट नहीं है। मैं अपने जीवन से खुश हूं। मुझे इतना मान-सम्मान मिल गया और क्या चाहिए। हिंदुस्तानी राजनीति की तासीर के बारे में बोले कि मैं राहुल गांधी के खिलाफ इसलिए बोलता हूं कि वह सीरियस नेता नहीं हैं। टीवी और अखबारों में कभी विकास कार्यों पर बहस नहीं होती लेकिन कुछ गलत हो जाता है, तो हल्ला मच जाता है। आयुष्मान योजना में दस करोड़ लोगों को फायदा मिला, यह कोई नहीं छापेगा। राहुल के खिलाफ तो मैं ही हमेशा बोलता हूं।

पेशे से सर्जन हैं पात्रा-
बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ संबित पात्रा का जन्म 13 दिसंबर, 1974 को हुआ। पात्रा पेशे से सर्जन हैं और उन्होंने 2002 में एससीबी मेडिकल कॉलेज कटक, उत्कल विश्वविद्यालय से जनरल सर्जरी में मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस) किया है। उन्होंने 2003 में संघ लोक सेवा आयोग संयुक्त चिकित्सा सेवा में योग्यता प्राप्त करके एक चिकित्सा अधिकारी के रूप में हिंदू राव अस्पताल में कार्यभार ग्रहण किया। पात्रा ने 1997 में वीएसएस मेडिकल कोलेज बुर्ला संबलपुर विश्वविद्यालय से एम.बी.बी.एस किया है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में भाजपा की केंद्रीय समिति में ओडिशा राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं और 2010 से अब तक भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता के रूप में कार्य कर रहे हैं।

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