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शहादत को सलाम, औरंगजेब तुमने ‘औरंगजेब’ शब्द के मायने बदल दिए

Posted on: 30 Jun 2018 16:00 by krishnpal rathore
शहादत को सलाम, औरंगजेब तुमने ‘औरंगजेब’ शब्द के मायने बदल दिए

औरंगजेब शब्द सुनते ही जेहन में क्रुर बादशाह की छवि आती थी लेकिन कश्मीर के इस लाल और फौजी औरंगजेब ने इस शब्द के मायने ही बदल दिए। अब औरंगजेब का मतलब है देश प्रेम, वतन परस्ती और बहादुरी। जैसी अदभूत वीरता, अदम्य साहस और देश के लिए समर्पण औरंगजेब ने दिखाया ऐसा उदाहरण देखने को नहीं मिलता। कायर आतंकवादियों ने देश के इस लाल को अगवा कर पेड़ से बांध दिया फिर भी आंख से आंख मिलाकर जवाब दिया इससे तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।

भारतीय सेना के शहीद जवान औरंगज़ेब के पिता को भी सलाम… जवान बेटे को आतंकियों के हाथों गंवाने के बाद देशप्रेम की भावना से की ऐसी बात वतन से बेइंतहा मोहब्‍बत करने वाला कोई शख्‍स ही कर सकता था. सेना में तैनात औरंगज़ेब परिवार के साथ ईद मनाने के लिए जम्‍मू-कश्‍मीर के पुलवामा जिला स्थित अपने घर जा रहा था, तभी आतंकियों ने उसका अपहरण कर लिया था. औरंगज़ेब को बर्बरतापूर्वक मौत के घाट उतारने से पहले आतंकियों ने उससे पूछताछ का वीडियो भी बनाया था. इस वीडियो में औरंगज़ेब आतंकियों की आंख से आंख मिलाकर सवालों का जवाब दे रहा था. ऐसा लगा, मानो, मौत का उसे कोई खौफ ही नहीं है. सेना के इस जवान की शहादत को सैल्‍यूट करने सेनाप्रमुख जनरल बिपिन रावत और रक्षामंत्री निर्मला सीतारमन उसके पिता मोहम्‍मद हनीफ से मिलने पहुंचे थे. हनीफ का पूरा परिवार ही भारतीय सेना से जुड़ा है. बेटे के ‘बलिदान’ पर हनीफ ने जो कुछ कहा, वह देश के उन कथित राष्‍ट्रवादियों के मुंह पर करारा तमाचा था, जो देशप्रेम को किसी धर्म-संप्रदाय विशेष की बपौती मानते हैं.

हनीफ ने कहा, ‘बेटे को गंवाने का मुझे कोई पछतावा नहीं है, एक न एक दिन तो सबको ही मरना है. अगर वह घर में भी रहता, तो भी एक न एक दिन उसकी मौत होती…’ बेटे को खोने का कोई भाव अपने चेहरे पर नहीं लाते हुए जांबाज़ हनीफ ने कहा, ‘औरंगज़ेब तभी तक मेरा बेटा था, जब तक मेरी गोद में था… उसके बाद वह मेरा नहीं, भारत देश का बेटा था…’ उन्‍होंने कहा कि इस घटना के बाद भी लोगों को अपने बेटों को सेना में भेजना बंद नहीं करना चाहिए. हनीफ के शब्‍दों पर गौर करेंगे, तो आपकी आंखें भर आएंगी. अफसोस की बात है कि उनके ये शब्‍द उस तरह मीडिया की सुर्खियां नहीं बन पाए, जिसके वे हकदार थे. आतंकियों को मुजाहिद का नाम देने वालों पर भी हनीफ जमकर बरसे. उन्‍होंने कहा, ‘मुजाहिद वे हैं, जो इस्‍लाम का पालन करते हैं और इस्‍लाम को मानने वाला ऐसा काम कर ही नहीं सकता…’

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