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पढ़े डॉ. प्रतिभा सिंह की भावुक कविता | Read Dr. Pratibha Singh’s passionate poem.

Posted on: 04 Apr 2019 11:35 by shivani Rathore
पढ़े डॉ. प्रतिभा सिंह की भावुक कविता | Read Dr. Pratibha Singh’s passionate poem.

क्या
मुझसे
दूर रहना चाहते हो ?

क्यों
मैं
कोई ‘संक्रमण’ हूँ ?
जो
तुम्हारे भीतर फैल जाऊँगी,
रोग बन नसों में बह जाऊँगी ?

या
मैं,
‘अतिक्रमण’ हूँ
जो
कर लेता हो अवैध-अधिकार,
स्वयं को, सब सीमाओं से पार,

या
कि फिर
मैं,
‘व्याकरण ‘हूँ
जो
तुम्हें जरा भी नहीं भाती,
कितने मनके फेरो नहीं आती ?

सच कहूँ
मैं,
‘संक्रमण’ हूँ,
‘अतिक्रमण’ हूँ
और
‘व्याकरण ‘ ही तो हूँ ।

‘संक्रमण’,
जो
बिध जाना चाहता है,
तुम्हारी नसों में,
‘प्रेम’ बनकर ।

‘अतिक्रमण’
जो,
देह की सीमाओं से हो जाए बाहर,
आत्मा से आत्मा का, ‘ साक्षात्कार’ ।

और
‘व्याकरण’
जो
समझ न आए तुम्हें,
और ,
तब
नियमों से ‘निर्बाध’
तुम
मेरे साथ,
जीवन का आनंद ले सको ।

डॉ. प्रतिभा सिंह परमार राठौड़

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