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सायबर कैफे से शुरुआत कर सचिन जैन बने फ्लैक्स और इंटीरियर प्रिंटिंग के किंग

Posted on: 02 May 2018 12:27 by Praveen Rathore
सायबर कैफे से शुरुआत कर सचिन जैन बने फ्लैक्स और इंटीरियर प्रिंटिंग के किंग

इंदौर। मन में कुछ करने की चाहत और लगन हो तो व्यक्ति शून्य से शिखर तक पहुंच सकता है। सचिन जैन ने ये साबित कर दिखाया है। सागर में जन्मे सचिन जैन ने 2002 में छोटे से सायबर कैफे से अपने करियर की शुरुआत कर अल्प समय में फ्लैक्स और इंटीरियर प्रिंटिंग में खास मुकाम बना लिया है। इनकी फर्म जी-9 के पास आज न सिर्फ मध्यप्रदेश बल्कि छत्तीसगढ़, गुजरात और राजस्थान के क्लाइंटों की लंबी फेहरिस्त है। घमासान डॉटकॉम से हुई बातचीत के प्रमुख अंश…

सवाल : सायबर कैफे से प्रिंटिंग बिजनेस में आने का विचार कैसे आया?
जवाब : 2002 में रामबाग स्थित रघुनाथ टॉवर में छोटे से सायबर कैफे से इंदौर में करियर की शुरुआत की। प्रारंभिक समय में छोटे भाई नितिन जैन को सायबर पर बैठाया और मैं एक फ्लैक्स मटेरियल बनाने वाली कंपनी में नौकरी करता था। थोड़ा समय यूं ही गुजरा, मैं बिजनेस करने के बारे में हमेशा सोचता रहा, लेकिन पूंजी की कमी खलती रही। मैंने खुद फ्लेक्स मटेरियल का काम शुरू किया। मटेरियल का काम ठीक-ठाक चल रहा था लेकिन व्यापार में आने वाली समस्याएं वहां भी थीं। लोग मटेरियल लेने के बाद पैसों के लिए चक्कर लगवाते थे। इसका असर व्यापार पर भी पड़ रहा था। एक दिन भाई के साथ ही विचार-विमर्श के दौरान समझ आया कि व्यापार को बढ़ाने से ही इसे मुनाफे में तब्दील किया जा सकता है क्योंकि हम सिर्फ मटेरियल उपलब्ध करवा रहे थे। लोगों को प्रिंटिंग2018-03-24-PHOTO-00012809 सॉल्यूशन नहीं दे रहे थे। उसी क्षण दिमाग में आया कि हमें प्रिंटिंग भी शुरू करनी चाहिए। सायबर कैफे बंद किया। कुछ पैसे खुद के, कुछ दोस्तों से उधार लिए और कुछ बाज़ार से ब्याज पर लेकर 2006-07 प्रिंटिंग मशीन डाली और कारोबार चल निकला। काम बढ़ा तो एक और प्रिंटिंग यूनिट पोलोग्राउंड पर लगाई। प्रिंटिंग के साथ ही हमने इंस्टॉलेशन का काम भी शुरू किया।

सवाल : अभी आप क्या सेवाएं दे रहें है?
जवाब : फ्लैक्स से शुरू हुआ सफर आज फ्लैक्स और इंटीरियर की एडवांस प्रिंटिंग तक जा पहुंचा है। उस दौर में मकानों में इंटीरियर का काम काफी होने लगा था। उसमें वॉल पेपर प्रिंटिंग सहित कई अन्य काम थे जो हम कर सकते थे। बाज़ार की नब्ज समझते हुए हमने वॉलपेपर प्रिंटिंग के साथ ही एक्रिलिक कटिंग और एमडीएफ कटिंग भी चालू किया। चूंकि हमने भविष्य के डिमांड प्रोडक्ट को पहचान लिया था, इसलिए जी-९ का नाम शहर में पहचान बनाने लगा। फ्लैक्स, ग्लोसाइन और विनाइयल, फ्रेम बोर्ड प्रिंटिंग के साथ ही इंडोर-आउटोर, इनशॉप ब्रांडिंग में जी9९ आज किंग है।

सवाल : आपने क्या स्टे्रटेजी अपनाई कि अल्प समय में बाजार में अपनी पकड़ मजबूत कर ली?
जवाब : एक ही छत के नीचे सारे सॉल्यूशन उपलब्ध कराने की सोच के साथ हमने इंटीरियर सॉल्यूशन भी देना शुरू किया।

सवाल : मार्केट में इतनी प्रतिस्पर्धा है, इससे कैसे निपटते हैं?
जवाब : हम लोगों को बताते हैं कि इंटीरियर में कौन सी चीज़ बेहतर हो सकती है। आज मैं कह सकता हूं कि गो ग्रीन और ईको कार्ड का सर्टिफिकेशन वाली एडवांस मशीन से प्रिंट करने वाले चुनिंदा लोगों में से हम एक हैं। ये मशीनें फ्लेक्स प्रिंटिंग की एडवांस टेक्नालॉजी है क्योंकि देशभर में ऑर्डिनरी फ्लेक्स बंद होने जा रहे हैं। अब सिर्फ रिसाइक्लेबल फ्लेक्स का ही उपयोग किया जा सकेगा। हालांकि मध्यप्रदेश में अभी बेन नहीं लगा है लेकिन हम अपने ग्राहकों को अभी से ही इस एडवांस प्रिंटिंग की सुविधा मुहैया करवा रहे हैं। क्वालिटी और एडवांस टेक्नालॉजी अपनाने से आज जी-9 के अलावा शायद ही कोई संस्थान इंदौर में नजऱ आएगा।

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