सुशील सर को सम्मान आदर सहित मेरे उदगार

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sushil

मुझे आज भी 40 साल पहले का वो वाकिया याद है कि जब टीवी  नही हुआ करते थे और रेडियो सीलोन से क्रिकेट की कॉमेंट्री आ रही थी रेडियो के सिग्नल मिलाने के लिए रेडियो को तिरछा बाका करना पड़ता था।

आपकी आवाज के हम दीवाने थे क्या बोलने की शैली थी ऐसा लगता था कि आखो के सामने क्रिकेट का ग्राउंड और प्लेयर आ जाते थे ।इंग्लैंड और भारत का मैच था और अंतिम दिवस अंतिम समय की कॉमेंट्री में आपके बोल की दिल के मरीज रेडियो सेट से हट जाये।

पूरा देश आपके कॉमेंट्री का तब भी प्रशंसक था और आज भी रहेगा।उस वक्त अंग्रेजी में जसदेव सिंह और नरोत्तम पूरी जी छा रहे थे और एक तरफ आपकी कॉमेंट्री के डंके बजते थे।आपको पद्मशी मिली ये शहर के लिए भी गौरव की बात रही।

40 वर्षपूर्व सुरेश काका ने मुझे तब क्रिकेट के टिकिट के लिए आपके पास भेजा था।तब मैं आपसे मिला था।इतने सौम्य शांत सरल अचंभित करने वाले सुशील सर को कोटि कोटि नमन।आप दीर्घायु हो ये ही कामना है।

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