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उच्च शिक्षा में प्रोफेसरों की नियुक्ति को लेकर अखिलेश यादव को लिखा पत्र

Posted on: 27 Jan 2019 18:46 by Surbhi Bhawsar
उच्च शिक्षा में प्रोफेसरों की नियुक्ति को लेकर अखिलेश यादव को लिखा पत्र

कृषि वैज्ञानिक एवं यादव शक्ति पत्रिका के संपादक चंद्रभूषण सिंह जी यादव ने उच्च शिक्षा में प्रोफेसरों की नियुक्ति को लेकर आज यूपी के पूर्व सीएम अखिलेश यादव को पत्र भेजा, पत्र की एक प्रति मीडिया को भी भेजी है।

आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी!
आपके “सामाजिक न्याय” का आशय क्या है?

आदरणीय श्री अखिलेश यादव जी!

सवाल उठना लाजमी है कि “आपके सामाजिक न्याय का आशय क्या है?”जब आपकी जबान पर “सामाजिक न्याय” लफ्ज आता है तो थोड़ा सकून मिलता है लेकिन जब सामाजिक न्याय से जुड़ा सवाल आता है और आप मौन रहते हैं तो वह सकून दिल-दिमाग को बेचैन कर देता है और तरह-तरह के सवाल तैरने लगते हैं।

संसद में जब 10 प्रतिशत गरीब सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण का बिल आया तो समाजवादी पार्टी सपोर्ट कर बैठी।बड़ी पीड़ा हुई कि आखिर समाजवादी पार्टी दोराहे पर क्यो खड़ी हो जाती है?आखिर समाजवादी पार्टी का स्टैंड क्लियर क्यो नही हो पाता है?

अखिलेश यादव जी!जो व्यक्ति या कोई संस्था/संगठन स्पष्ट राय नही रखता है वही दुर्घटना का शिकार होता है।

आप यह सोचते हो कि किसी बर्निंग इशू पर आपकी चुप्पी आपको सबका प्रिय बना देगी तो यह दिवास्वप्न समझिए।ऐसा कत्तई सम्भव नही है कि आप किसी ज्वलन्त मुद्दे पर कोई राय न व्यक्त करें तो आप सर्वप्रिय बने रहेंगे तो यह एक भूल ही होगी क्योकि जिन्हें आर या पार रहना है वे आरपार बोलने वालों की तरफ हो जाएंगे जबकि वे लोग जो दुविधा में रहेंगे वे शून्य में समाहित हो जाएंगे।

अखिलेश यादव जी! हर पहलू के दो पक्ष महत्वपूर्ण होते हैं एक समर्थक दूसरा विरोधी।तीसरा पक्ष नोटा या कामन जेंडर वाला होता है जिसकी कोई न गिनती होती है और न कोई पहचान या मतलब रहता है।

अखिलेश यादव जी! आप पिछड़े वर्ग में पैदा हैं।आपकी राजनीति पिछड़े वर्गों की है, आपका वोटर,सपोर्टर,कार्यकर्ता,बूथ एजेंट आदि पिछड़ा वर्ग/वंचित समाज है,आपके समाजवादी पुरखे भले सवर्ण थे लेकिन हिमायती पिछडो के थे फिर आप को पिछड़े वर्गों के पक्ष में किल्ला गाड़कर रहना चाहिए जिन्हें सँविधान भी संरक्षण देता है लेकिन आप आरक्षण जैसे बर्निंग इशू पर या तो अभिजात्य वर्गों के पक्ष में खड़े हो जाते हैं या मौन हो जाते हैं।यह निहायत ही गलत है और आपकी दूरगामी राजनीति के लिए नुकसानदेह भी।

अखिलेश यादव जी!आप चाहे जितना न साबुन-तेल-इत्र लगा लें लेकिन अहीर से कुछ और नही बन पाएंगे।अभिजात्य तबकों की आप जितनी तरफदारी कर लें पर वे भाजपा-कांग्रेस की बजाय आपको कभी नही स्वीकारेंगे।अहीर या किसी वंचित का नेतृत्व अभिजात्य वर्ग किसी मजबूरी में ही स्वीकारता है।आप समझते हो कि वह आपकी तटस्थता,सर्वजनवादी नीति से आत्मसात कर लेगा तो सर्वथा गलत है।2017 के इलेक्शन से यदि सीख न मिली हो तो कोई बात नही क्योकि यदि 2017 से भी नही सीखे हों तो कौन समझायेगा?

अखिलेश यादव जी! आर्थिक आधार पर आरक्षण की हिमायत समाजवादी पार्टी द्वारा क्यो?क्या देश का सँविधान कहीं भी आर्थिक आधार पर आरक्षण की हिमायत करता है?यदि नही तो क्या यह देश के सँविधान की मूल भावना को तार-तार करना नही है?यदि इस बात को राष्ट्रीय जनता दल के श्री प्रोफेसर मनोज झा जी समझ रहे हैं तो समाजवादी पार्टी या बहुजन समाज पार्टी क्यो नही समझ रही है?यदि भारतीय जनता पार्टी रामनाथ कोविद जी व नरेंद्र मोदी जी को आगे कर देश के सँविधान, बाबा साहब डा अम्बेडकर व पिछड़े/वंचित समाज के गर्दन पर छुरा चला रही है तो उसका समर्थन कर क्या आप भी वही काम नही कर रहे हैं?

क्या इस देश मे इस बात का सर्वे हुवा कि सवर्ण जातियां कितनी शिक्षा में पीछे हैं,वे कितना कच्चे घरों में रहती हैं,उनके वहां कितने भूमिहीन हैं,वे कितने प्रतिशत नौकरी में हैं,देश की पूंजी,ब्यापार,कल-कारखानों पर उनका कितना कब्जा है?सवर्णों में सामाजिक पिछड़ापन होने का तो सवाल ही नही है फिर किस आधार पर आपने सवर्ण आरक्षण की हिमायत कर दी?

अखिलेश यादव जी 1931 की जनगणना कहती है कि पिछड़ी जातियां 54 प्रतिशत हैं तो उन्हें आरक्षण 27 प्रतिशत,जबकि सवर्ण जातियां 15 प्रतिशत से भी कम हैं तो उन्हें आरक्षण 10 प्रतिशत?क्या अनुपात है यह?आपका समर्थन आखिर किस आधार पर?अखिलेश यादव जी!आपको 15 प्रतिशत सवर्ण से डर है लेकिन 54 प्रतिशत पिछडो की फिक्र नही है जो आपका वोटर है?
अखिलेश यादव जी! आप लैपटॉप लेकर बैठते हैं,बूथों की समीक्षा करते हैं तो क्या आपने कभी उन बूथों व विधानसभाओं की समीक्षा कभी किया है जहां आपका उम्मीदवार पिछड़ा या मुस्लिम है तथा बूथ सवर्ण का है?क्या आप कोई ऐसा बूथ पूरे प्रदेश में दिखा सकते हैं जहां सवर्ण बहुलता हो और आपके पिछड़ा/मुसलमान उम्मीदवार जीते हों?

अखिलेश यादव जी!आपके पास पूरे प्रदेश का सपा बूथ प्रभारियों व बूथों के दस-दस सक्रिय नामों का लिस्ट मौजूद है।क्या आप उसमे यह नही देख सकें हैं कि मैक्सिमम बूथ प्रभारी यादव, मुसलमान,पिछड़ा हैं?सवर्ण नाम मात्र के हैं,वे भी वही जिनके नात-रिश्तेदार चुनाव लड़ रहे हैं।

अखिलेश यादव जी!आप समाजवादी पार्टी के पूरे प्रदेश के सक्रिय सदस्यों की सूची निकलवाईये।मैं दावे के साथ कहता हूं कि यदि 01 प्रतिशत भी सवर्ण आपके दल के सक्रिय सदस्य बने हुये मिल गए तो मैं कभी सवाल नही उठाऊंगा।आपके सारे सक्रिय सदस्य यादव, पिछड़ा,वंचित व मुसलमान हैं और आपको डर सवर्ण से है।

गजब का कॉन्सेप्ट है आपका और गजब के आपके परामर्श दाता हैं।

अखिलेश यादव जी!मैं बार-बार कहता हूं कि यह ऑस्ट्रेलिया,इंग्लैंड या अमेरिका नही है,यह भारत है भारत, जहां विकास,तरक़्क़ी, योग्यता,नेकनीयती काम नही करती,यहां काम जाति व धर्म करते हैं।भारत का सबसे बड़ा सच जाति है।यदि ईमानदारी की बात करूं तो मेरे इतना लिखने के पीछे समाजवादी विचार के साथ-साथ जाति भी है।यह जाति का नशा या बीमारी माँ के गर्भ में जाने के साथ व मरने के बाद क्रिया-कर्म तक रहता है इसलिए जब आप जातिनिरपेक्ष बनने की कुचेष्टा करेंगे दुर्घटना के शिकार होंगे।राजनीति करना है तो जाति को पकड़े रखना पड़ेगा।वैसे भारतीय सँविधान भी हमें जातिगत शोषण से मुक्ति हेतु उन्हें विभिन्न सहूलियतें देने की इजाजत देता है जिसे बदलने की कुचेष्टा जारी है और जाने-अनजाने या सवर्णपरस्ती या उनके डर-भय में हम भी उस सँविधान बदलने की कुचेष्टा में शामिल हैं।

अखिलेश यादव जी!अभी 13 प्वाइंट रोस्टर का ज्वलन्त इशू आया हुवा है जिस पर आपकी चुप्पी सबको खल रही है।यह अलग बात है कि सांसद धर्मेंद्र यादव जी या सांसद(राज्यसभा) रामगोपाल यादव जी इस पर बोल व लिख चुके हैं लेकिन अधिकृत राय लोकतंत्र में किसी भी दल के मुखिया की ही मानी जाती है।आप समाजवादी पार्टी के मुखिया हैं इसलिए इस मुद्दे पर आपकी जुबान खुलनी चाहिए,ट्विटर पर राय दिखनी चाहिए।

अखिलेश यादव जी!कभी-कभी जाने-अनजाने इंसान गलती कर देता है।गलती करना गलत नही है,गलती कर उसी पर अडिग रहना या यह जानने के बाद भी कि गलती हो गयी है सुधार न करना गलत है।मैं मानता हूं कि 13 प्वाइंट रोस्टर हो,त्रिस्तरीय आरक्षण हो या पदोन्नति में आरक्षण का सवाल,समाजवादी पार्टी ने गलती की है और खामियाजा भी भुगता है लेकिन पुनः इस मुद्दे पर मुखर न होना,मौन साधे रहना आत्महत्या करने सरीखा है।

अखिलेश यादव जी!आप उच्च शिक्षा प्राप्त राजनेता हैं।आप उच्च शिक्षा की महत्ता से वाकिफ हैं फिर 13 प्वाइंट रोस्टर पर आपकी चुप्पी बहुजन समाज को पिंच कर रही है।अखिलेश यादव जी!आप पढ़ने गए तो विधायक,मंत्री, मुख्यमंत्री,रक्षामंत्री के बेटा थे।शायद इस नाते आपसे जाति वाला भेदभाव न हुवा हो लेकिन सोचिए जब आप मुख्यमंत्री आवास छोड़े तो उसे धुला गया,किस तरह का समाज है और आपकी सामाजिक प्रतिष्ठा क्या है?

अखिलेश यादव जी! देश भर में जाति के बीमारी की खुमारी इस कदर ब्याप्त है कि बहुजन समाज को कदम-कदम पर अपमानित होना पड़ता है।उच्च शिक्षा में तो पूछना ही नही है वरना रोहित बेमुला को क्यो मरना पड़ता?एकलब्य व शम्बूक आदि की कथा तो बहुत पुरानी हो चुकी है।अखिलेश यादव जी!जब विश्वविद्यालयो में केवल द्रोणाचार्य ही रहेंगे तो रोजाना एकलब्य शिकार बनाये जाएंगे।यह 13 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली द्रोणाचार्य बनाने का साँचा है जबकि 200 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली समता वादी व्यवस्था लाने की एक उम्दा सोच,फिर आपका मौन क्यों?

अखिलेश यादव जी!गिरते-पड़ते हमारे जैसे कुछ लोग 1990 के मण्डल आंदोलन के बाद उच्च शिक्षा ग्रहण कर लिए तो पीएचडी आदि कर कुछ लिखने-पढ़ने लगे,200 प्वाइंट रोस्टर के जरिये प्रोफेसर आदि बन गए जो अभिजात्य जनों के पेट मरोड़ का कारण है।यदि आप और आपके जैसी पार्टियां ऐसे ही चुप रहीं तो आगे आने वाली पूरी बहुजन पीढ़ी उच्च शिक्षा से महरूम हो गूंगी व चुप ही नजर आएगी फिर आप और आप जैसों की पार्टियां अतीत के पन्नो में समाहित हो जाएंगी और देश मे दो ही दल कांग्रेस-भाजपा रह जाएंगे।पूरा बहुजन समाज देवासुर संग्राम में जो दुर्गति हुई थी कि अमृत अर्थात शिक्षा असुर अर्थात यहां के बहुजनो से छीन लिया गया था और वे हजारो वर्ष तक गुलाम बने रहे,फिर इसकी पुनराबृत्ति हो जाएगी।

हे अखिलेश यादव जी!गणतंत्र दिवस के अवसर पर मैं आपसे अपील करता हूँ कि सवर्ण परस्ती छोड़िये।सँविधान के अनुरूप देश के बहुजनो के अधिकारों की हिमायत करिए।दस प्रतिशत सवर्ण आर्थिक आधार पर आरक्षण हो,13 प्वाइंट रोस्टर प्रणाली हो,आउट सोर्सिंग से बिना आरक्षण को फॉलो किये नियुक्तियां हो,प्राइवेट सेक्टर में आरक्षण का सवाल हो,उच्च न्यायपालिका में आरक्षण हो या पदोन्नति में आरक्षण,खुलकर बोलिये,आंदोलन चलाइये फिर देखिए आपकी सोई,बंटी बहुजन जमात कैसे आपको सर-आंखों पर बिठाती है।लालू प्रसाद यादव जी या तेजस्वी यादव जी पूरे देश के बहुजनो के आज पूज्य हैं जिसका कारण उनका अपने समाज का आवाज बनना है।

अस्तु यूपी में बहुजन समाज के मुद्दों पर अखिलेश यादव जी!आपका मुखर होना नितांत जरूरी है।एक साथ शोषक व शोषित,बहुजन व अल्पजन,अर्जक व अनर्जक, सामी व असामी,कमेरा व लुटेरा,अभिजात्य व पिछड़ा/दलित/अल्पसंख्यक साधा नही जा सकता है।लाइन आर-पार खींचनी होगी अन्यथा बार-बार दुर्घटना का शिकार होते रहना पड़ेगा और आपके समक्ष सवाल उठता रहेगा कि “आपके सामाजिक न्याय का आशय क्या है?”

अखिलेश यादव जी!क्षमा सहित उक्त मुद्दों पर विचार की अपेक्षा के साथ आपको क्रांतिकारी भीम/मण्डल सलाम है।

भवदीय-
चन्द्रभूषण सिंह यादव
(एम एस-सी कृषि,एमए-राजनीति शास्त्र,एमए-प्राचीन इतिहास,बीएड)
संयोजक-सामाजिक न्याय मंच,देवरिया
कंट्रीब्यूटिंग एडिटर-“सोशलिस्ट फैक्टर”
प्रधान संपादक-“यादव शक्ति”
पूर्व जिला प्रवक्ता/जिला सचिव/जिला मीडिया प्रभारी-समाजवादी पार्टी,देवरिया
पूर्व जिलाध्यक्ष-युवा जनता दल,देवरिया

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