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आम जनता के बीच सर्वाधिक 18.5 लाख करोड़ रुपए की करंसी पहुंचना नोटबंदी के तुगलकी फैसले पर एक और तमाचा है,देवप्रिय अवस्थी की कलम से….

Posted on: 11 Jun 2018 12:02 by krishnpal rathore
आम जनता के बीच सर्वाधिक 18.5 लाख करोड़ रुपए की करंसी पहुंचना नोटबंदी के तुगलकी फैसले पर एक और तमाचा है,देवप्रिय अवस्थी की कलम से….

रिजर्व बैंक द्वारा जारी यह आंकड़ा डिजिटल लेन-देन को प्रोत्साहित किए जाने की कलई भी उघेड़ता है। जैसी कि आशंका जताई जाती रही थी, 2000 रुपए के ज्यादातर नोट दो नंबर का धंधा करनेवाले लोगों की तिजोरियों में पहुंच चुके हैं। वे अब इन तिजोरियों में निश्चिंत होकर आराम कर सकेंगे।

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बैंकों के रोज-ब-रोज बदलते नियमों और घोटालों की खबरों के मद्देनजर उन पर मध्य वर्ग का भरोसा भी रसातल में पहुंच रहा है। जो लोग हर माह महज रोजमर्रा की जरूरत भर के रुपए बैंक से निकालते वे भी अब ज्यादा से ज्यादा रकम घर पर रखने लगे हैं।

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यह तो अर्थशास्त्र के विद्वान ही बता सकेंगे कि ज्यादा मुद्रा का प्रचलन में होना अर्थव्यवस्था पर क्या असर डालता है, लेकिन मेरी अल्पबुद्धि में तो यह समानांतर अर्थव्यवस्था को ही मजबूत करता है। वह समानांतर अर्थव्यवस्था किस के हित साधती है, यह हर किसी को पता है।

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नोटबंदी की घोषणा करते समय प्रधानमंत्री ने कुछ दिन की परेशानी का उल्लेख किया था। वह परेशानी अब लोगों के जीवन का स्थाई हिस्सा बन गई है।

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