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अर्थव्यवस्था सुधार के लिए आरबीआई का कदम | RBI steps to improve Economy…

Posted on: 09 May 2019 17:14 by rubi panchal
अर्थव्यवस्था सुधार के लिए आरबीआई का कदम | RBI steps to improve Economy…

आरबीआई द्वारा जून की मौद्रिक नीति मे रेपों रेट कम करने की आंशका जताई जा रही है। जिससे महंगाई और राजकोषीय घाटे होने के अनुमान से साल में दौबारा रेपो रेट में कटौती की संभावना कम हो जाएगी। विश्व स्तरीय फर्म आईएचएस ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि आरबीआई के रेपों रेट कम करने से अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिलेगी क्योंकि खपत को तगड़ा सपोर्ट मिलेगा।

अब तक दो बार रेपो रेट हुए कम

इसी साल में आरबीआई आर्थिक वृद्धि में तेजी के लिए फरवरी और अप्रैल में रेपो दर में 0.25-0.25 प्रतिशत की कटौती कर चुका है। फिलहाल आरबीआई में 6 प्रतिशत वार्षिक दर है। जिस पर वह बैंकों को एक दिन के लिए नकद धन उधार देता है। वैश्विक मौद्रिक नीति कार्रवाई तथा उसके आर्थिक प्रभाव के बारे में लंदन की आईएचएस मार्किट ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि आरबीआई 2020 की शुरूआत से मध्य के बीच मौद्रिक नीति को कड़ा कर सकता है।

आईएचएस की रिपोर्ट कहा गया है कि घरेलू और वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दरों में कमी और देश में महंगाई दर के आरबीआई के मुद्रास्फीति के कम होने से संभावना है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत दर में और कटौती कर सकता है। इसमें कहा गया है, जून के बाद मुद्रास्फीति दबाव तथा राजकोषीय घाटा बढ़ने की आशंका होने से नीतिगत दर में और कटौती की गुंजाइश कम होगी। फर्म का अनुमान है कि जून के बाद 2019 में नीतिगत दर में कटौती नहीं होगी जबकि 2020 की शुरूआत से मध्य के बीच मौद्रिक नीति को कठोर हो सकती है।

पेट्रोल और डीजल के दामों में होगा असर

फर्म के अनुसार मानसून के सामान्य से कमजोर रहने के अनुमान को देखते हुए खाद्य पदार्थ और पेट्रोल व डीजल जैसे ईंधन की किमतें बढ़ने की संभावना है इससे सकल महंगाई दर के 5 प्रतिशत से ऊपर निकलने की आंशका जताई जा रही है। 2019 में इसके औसतन 4.2 प्रतिशत तथा 2020 में 5.3 प्रतिशत रहने की संभावना है।

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