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इडली की ट्रायसिकल से शुरुआत कर राम गुप्ता बने उद्योगपति

Posted on: 09 Jun 2018 11:25 by Praveen Rathore
इडली की ट्रायसिकल से शुरुआत कर राम गुप्ता बने उद्योगपति

इंदौर। एमबीए तक पढ़ाई कर दोस्त रजत मित्तल के साथ महज 85 हजार रुपए की पूंजी से ट्रायसिकल पर इडली बेच कर करयिर की शुरुआत करने वाले राम गुप्ता आज एक सफल उद्योगपति बन चुके हैं। मध्यमवर्गीय परिवार में पले-बड़े हुए राम ने विभिन्न प्रकार के फ्लेवर में इडली का स्वाद इंदौरियंस को परोसा। धीरे-धीरे वे इडली के आटा और फिर केटरिंग व्यवसाय से जुड़े हैं। अच्छा खाना और अच्छा खिलाने के शौकीन गुप्ता फूड इंडस्ट्रीज में इतने रच-बस गए कि उन्होंने अपने कारोबार का विस्तार भी फूड इंडस्ट्रीज में ही किया। आज वे रोस्टेड चना और चना सत्तू के प्लांट का सफलतापूर्वक संचालन कर रहे हैं। ये उनका पार्टनरशिप बिजनेस है। घमासान डॉटकॉम से उन्होंने अपने बिजनेस की कहानी साझा की। प्रस्तुत है चर्चा के मुख्य अंश…

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सवाल : आपने बिजनेस का सफर कैसे और कब शुरू किया?
जवाब : शुरुआत में ब्रिजस्टोन कम्पनी में कुछ माह नौकरी की. फिर नौकरी छोड़ कर मैंने  और मेरे दोस्त रजत मित्तल ने दिसंबर 2010 में कारोबार की शुरुआत की। रजत बॉम्बे में जॉब करता था, वहां नाश्ते में इडली का चलन है। हमने सोचा कि इंदौर में पोहे, जलेबी, कचोरी-समोसा ही चलन ही में है, इसलिए सोचा कि सुबह लाइट नाश्ते का विकल्प देना चाहिए। हमने 56 दुकान में इडली विथ चटनी से स्टार्ट किया। जावरा कम्पाउंड में हमने एक किराये का मकान लिया, जहां किचन था और एक ट्रायसिकल बनवाई, जिसमें खाना गरम रहता था, वह ट्रायसिकल से ५६ दुकान पर इडली बेचने लगे। ये काम जब शुरू किया, तब हमने घर वालों को नहीं बताया था। फिर हमारा जम गया, तब घर वालों को बताया। चूंकि उन दिनों हमारी शादी नहीं हुई थी, तो घर वालों ने इस बिजनेस का विरोध किया। उनका कहा था कि यही काम करना है तो अपनी शॉप शुरू करें। फिर हमने ट्रायसिकल बंद कर खातीवाला टैंक पर इडली की शॉप डाली। चूंकि यह शॉप रेंटल थी, इसलिए खर्च बढ़ गया। फिर हमने पंजाबी, मंचुरियन, बर्गर इडली, जैसी इडली शुरू किया। काउंटर चलने लगा तो फिर चाइनीज की डिमांड आने लगी। फिर हमने चाइनीज आयटम्स एड किए। 2011 में हमने इंदौर में फ्रेंचाइजी शुरू की। एक शॉप मुंबई और एक शॉप पुणे में भी शुरू की। इडली का आटा हमें नहीं मिलता था, तो हमने इडली का आटा भी स्वयं बनाना शुरू किया। फिर हमने इडली का आटा केटरिंग वालों को सप्लाय करना शुरू किया। धीरे-धीरे हमारा बिजनेस स्टेबलिश हो गया। इसके बाद हमने विस्तार किया और केटरिंग वालों के साथ टायअप कर शादियों में इडली और चाइनीज के स्टॉल लगाना शुरू किया। ये बिजनेस की लाइन भी हमें जम गई फिर हमने केटरिंग का व्यवसाय शुरू कर दिया। इडली हट को हम अपनी मातृ संस्था मानते हैं। 2013 में टॉवर चौराहे वाली शॉप बंद हो गई। फिर हमने सपना-संगीता रोड पर नई शॉप डाली। नवंबर 2017में इस इडली हट को रिनोवेट कराया।  फिलहाल हम यहीं से इडली हट का संचालन कर रहे है। राम गुप्ता बताते हैं कि इस स्टार्टअप के बाद हमारी रेसिपी जैसे खमण, इडली-डोसा, उत्पमा आदि रेसिपी का कई मीडिया संस्थानों ने प्रकाशित की। वहीं स्थानीय एफएम रेडियो 93.4 ने भी हमारी रेसिपी के बारे में बताया और बेस्ट साउथ इंडियन डिश का हमे अवॉर्ड भी दिया।

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सवाल : आगे क्या एक्सपांशन कर रहे हैं?
जवाब : हमने पिछले आठ सालों में फूड इंडस्ट्रीज में काम करना शुरू किया है और लगातार प्रोग्रेस भी हुई। मैं और रजत फूड इंडस्ट्रीज में कुछ नया करना चाहता था। फिर मैं फूड इंडस्ट्रीज में किसी व्यक्ति से मिलने गया फिर उन्होंने मुझे दो लोगों से मिलवाया जो इन्वेस्टमेंट करना चाहते थे, फिर हमने तीनों ने मिलकर पालदा में स्मार्ट मिक्स के नाम से प्रोडक्ट लांच किया। हम अभी चना रोस्टेड और चने का सत्तू बना रहे हैं। आगे हमारी योजना रेडी टू मिक्स प्रोडक्ट लांच करने की है।

सवाल : आपका फैमिली बिजनेस क्या है?
जवाब : पापा और अंकल का राजगढ़ ब्यावरा के मलावड़ में किराना और चना-सोयाबीन की कारोबार है। वैसे हमारे पूर्वज मारवाड़ी हैं। हम संयुक्त परिवार में रहे हैं। अब मैं इंदौर में बिजनेस कर रहा हूं।

सवाल : आपकी हॉबी क्या है?
जवाब : अच्छा खाने का शौक है। इसके अलावा फूड इंडस्ट्रीज में न्यू इन्टरप्रोन्योर को गाइड करना मेरी हॉबी है। मैंने अभी तक कई लोगों को व्यापार संबंधी सलाह भी दी है।

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