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राजकिशोर जी वैचारिक लेखन के मसीहा थे, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

Posted on: 04 Jun 2018 08:56 by Ravindra Singh Rana
राजकिशोर जी वैचारिक लेखन के मसीहा थे, वरिष्ठ पत्रकार अर्जुन राठौर की टिप्पणी

राजकिशोर जी हमारे बीच नहीं रहे लेकिन उनका वैचारिक लेखन हमारे बीच हमेशा जिंदा रहेगा रविवार पत्रिका जो कोलकाता से निकलती थी उसमें वैचारिक लेखन के प्रमुख स्तंभ थे राजकिशोर जी l देश के तमाम राजनीतिक सामाजिक आर्थिक और वैचारिक मामलों में राजकिशोर जी की लेखनी का कोई जोड़ नहीं था वे अपनी वैचारिक टिप्पणी के माध्यम से उन तमाम मौकों पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराते थे जिनमें ऐसा लगता था कि यहां पर वैचारिक हस्तक्षेप बेहद जरूरी है चाहे मामला आपातकाल का हो या उसके बाद हुए तमाम राजनीतिक परिवर्तनों का राजकिशोर जी का लेखन हमेशा मौजूद रहता था ।

रविवार से लेकर देश की तमाम पत्र-पत्रिकाओं में राज किशोर जी के वैचारिक लेखन की धूम मची रहती थी उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हुई है जो उनके वैचारिक लेखन पर आधारित है राजकिशोर जी पिछले कुछ वर्षों से इंदौर से प्रकाशित रविवार पत्रिका से जुड़ गए थे वे उसके संपादक थे और रविवार पत्रिका को उन्होंने एक नया तेवर ओर एक नई दिशा प्रदान की थी रविवार के प्रधान संपादक श्री सुभाष खंडेलवाल जी के साथ वे लंबे समय तक जुड़े रहे । रविवार पत्रिका के तेवर देखकर यह लगता था कि राजकिशोर जी इस के संपादक हैं राजकिशोर जी ने लेखकों की अपनी एक टीम बनाई थी जो वैचारिक लेखन के लिए जानी जाती है।राजकिशोर जी के लेखन में तीखापन रहता था और वह समाज के यथार्थ को पूरी सच्चाई के साथ व्यक्त करते थे ।

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