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राहुल गांधी पप्पू ही नहीं… ढक्कन भी हैं! | Rahul Gandhi is not only Pappu … there are lid too!

Posted on: 09 Apr 2019 17:21 by shivani Rathore
राहुल गांधी पप्पू ही नहीं… ढक्कन भी हैं! | Rahul Gandhi is not only Pappu … there are lid too!

राजनीति में जब तक दमदार विपक्ष न हो स्वस्थ लोकतंत्र की कल्पना नहीं की जा सकती… साम, दाम, दंड, भेद से लेकर तमाम धूर्तताओं में भाजपा कई कोस कांग्रेस से आगे है… यही कारण है कि परम्परागत मीडिया से लेकर सोशल मीडिया(socialmedia) में 24 ही घंटे कांग्रेस को महाभ्रष्ट से लेकर पाकिस्तान मुस्लिम परस्त पार्टी घोषित कर दिया गया है… मुझे तो आश्चर्य होता है कि कांग्रेस ने 55-60 साल देश पर राज कैसे किया..?

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मोदी-शाह की जोड़ी से कांग्रेस को आज की राजनीति कैसे की जाती है इसकी ट्रेनिंग लेना चाहिए… राहुल जहां फैसले लेने में कमजोर हैं वहीं भाषण प्रवीणता भी हासिल नहीं कर पाए… बोटी-बोटी को बेटी-बेटी से जोडऩे जैसे नारे मोदी जी बखूबी उछालकर तालियां पिटवाते हैं, तो राहुल आडवाणी जी को जूते मारकर बाहर करने जैसी मूर्खतापूर्ण बातें करते दिखते हैं… अभी लोकसभा चुनाव में ही कांग्रेस ने न तो ठीक तरह से अधिकांश राज्यों में गठबंधन किया और न ही ठोस रणनीति बनाई…

72 हजार की न्याय योजना को भी भाजपा ने बड़ी चतुराई से अफस्पा और धारा 124-ए के प्रचार में दबा दिया… संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करते हुए इनका इस्तेमाल मोदी सरकार अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को ठिकाने लगाने में जोरदार तरीके से कर रही है… अगस्ता वेस्टलैंड से लेकर पड़े अभी आयकर छापों में यह बात स्पष्ट भी हो गई..

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तमाम राजनीतिक पंडितों का स्पष्ट मानना है कि 2019 का ये चुनाव मोदी-शाह की जोड़ी ने अगर एकतरफा जीत लिया तो कांग्रेस सहित अन्य दलों के लिए आने वाले कई वर्षों तक सत्ता में आने के अवसर तो समाप्त हो ही जाएंगे वहीं इनके ज्यादातर नेता जेल में नजर आएंगे… कांग्रेस के लिए ये चुनाव अस्तित्व की लड़ाई से जुडा हैं, बावजूद इसके वह एक के बाद एक गलतियां करती दिख रही है… ऐसा लगता है कि राहुल को मोदी जी से ज्यादा अखिलेश, मायावती, केजरीवाल से लेकर ममता बैनर्जी से लडऩा है…

यही कारण है कि केरल के पूर्व मुख्यमंत्री वीएस अच्युतानंदन ने एक बार फिर राहुल को अमूल बेबी की संज्ञा दी, क्योंकि केरल में वह माकपा के खिलाफ लड़ रही है… ऐसे तमाम फैसलों से राहुल पप्पू के साथ खुद को ढक्कन भी साबित करते हैं… आज जिस तरह की राजनीति मोदी-शाह की जोड़ी कर रही है उसी तरह की विपक्षी दलों को भी जवाब में करनी पड़ेगी… हालांकि सत्ता में कोई भी दल रहे, मगर असली चिंता संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर होना चाहिए, जो फिलहाल सबसे ज्यादा खतरे में है…
: राजेश ज्वेल की कमल से :

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