अमेठी में इस वजह से हारे राहुल गांधी, जानिए क्या रहे कारण

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rahul gandhi

गांधी परिवार का गढ़ अमेठी संसदीय क्षेत्र से इस बार कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को हार का सामना करना पड़ा। कांग्रेस ने हार के कारणों का पता लगाने के लिए दो सदस्यीय समिति की बनाई थी। समिति द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में हार के कारण जानकार पार्टी हैरान हो गई। समिति ने बताया कि अमेठी संसदीय क्षेत्र में सपा और बसपा ने सहयोग नहीं दिया, बल्कि भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी को भरपूर मदद की, इस वजह से पार्टी को हार मिली।

यूपीए की अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में उनके प्रतिनिधि कांग्रेस सचिव जुबेर खान और के. एल. शर्मा को स्पष्ट तौर पर बताया गया कि सपा और बसपा की इकाइयों ने कांग्रेस को सहयोग नहीं किया और उनके एक बड़े वर्ग का वोट भाजपा को गया है।

समिति के मुताबिक 2014 के लोकसभा चुनाव में राहुल गांधी को चार लाख 80 हजार वोट मिले थे, जबकि इस बार चार लाख 13 हजार ही वोट मिले। वहीं बसपा प्रत्याशी ने 2014 में 75,716 वोट हासिल किए थे। यदि इस चुनाव में यह वोट कांग्रेस को मिलते तो कांग्रेस की जीत पक्की थी। भाजपा प्रत्याशी स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी को 55,000 वोटों के अंतर से शिकस्त दी।

अमेठी के जिला कांग्रेस अध्यक्ष योगेंद्र मिश्रा ने सपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके पार्टी के पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति के पुत्र अनिल प्रजापति ने खुलेआम स्मृति ईरानी के पक्ष में प्रचार किया। इतना ही नहीं, अन्य सपा नेताओं ने समर्थन देने के बाद भी कांग्रेस के साथ दगाबाजी करते हुए भाजपा के पक्ष में काम किया। वहीं गौरीगंज से सपा विधायक राकेश सिंह अपने ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत सदस्यों को बचाए रखने के लिए भाजपा के साथ गए।

रिपोर्ट के मुताबिक राहुल को अमेठी के चार विधानसभा क्षेत्रों में हार मिली और गौरीगंज में हार का अंतर सबसे ज्यादा 18,000 था, जबकि अमेठी में वह आगे रहे, मगर तिलाई, जगदीशपुर और सलोन विधानसभा क्षेत्रों में पिछड़ गए।

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