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विपरीत परिस्थितियों में निखर कर मोदी को कड़ी चुनोती दे रहे है राहुल गांधी | Rahul Gandhi really giving a Tough Challenge to Modi…

Posted on: 05 May 2019 15:33 by Surbhi Bhawsar
विपरीत परिस्थितियों में निखर कर मोदी को कड़ी चुनोती दे रहे है राहुल गांधी | Rahul Gandhi really giving a Tough Challenge to Modi…

नीरज राठौर

इस बार के लोकसभा चुनावों में राहुल गांधी से कड़ी टक्कर मिलने से पीएम मोदी ने कल कांग्रस अध्यक्ष राहुल गांधी पर व्यक्तिगत हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उनके पिता राजीव गांधी का जीवन एक नंबर वन भ्रष्ट नेता के तौर पर खत्म हो गया। राहुल गांधी पर बार बार निजी हमला करते हुए मोदी ने कहा कि आपके पिता जी को मिस्टर क्लीन कहा जाता था लेकिन उनका जीवन एक नंबर वन भ्रष्ट नेता के तौर पर खत्म हो गई।

इसके बाद पीएम मोदी ने बोफोर्स मामले का भी जिक्र किया औऱ कहा कि 1980 में राजीव गांधी की कांग्रेस सरकार इस घोटाले के बाद गिर गई थी। हालांकि इस मामले पर बाद में कोर्ट ने राजीव गांधी को भ्रष्टाचार के आऱोपों पर क्लीन चिट दे दिया था। कोर्ट ने कहा था कि राजीव गांधी ने किसी से कोई रिश्वत नहीं ली है। फिर भी मोदी का राहुल गाँधी पर बार बार बोखलाकर निजी हमले करना इस बात का संकेत है की मोदी जी को राहुल गाँधी कड़ी टक्कर दे रहे है।

अब थोडा पीछे चलते है, बीजेपी राहुल गाँधी जी को कुछ नहीं समझती थी. राहुल गांधी नाम आते ही बोलते थे हाँ वही, पप्पू..
कितना आसान है ना क्रिटिसिज्म की राजनीति करना, दुसरो को नीचा दिखाना और खुद को समझदार साबित करना…
राहुल गाँधी को पप्पू बोलने के पहले आपको पता है कि ये राहुल गांधी कौन है??? शायद नही पता।

ये वो इंसान है जिसने 21 वर्ष की उम्र में अपने पिता को खो दिया था, उसकी माँ एक इटेलियन है जिसे ठीक से हिंदी भी बोलना नही आती। जब राजनीति सीखने की उम्र थी तब इस बच्चे के सिर पर ना तो पूर्व प्रधानमंत्री दादी जी का हाथ था, और ना पिता का।

माँ कभी राजनीतिज्ञ रही ही नही। बिना किसी राजनैतिक गुरु के भी इस बालक ने अपने परिवार की परंपरा को निभाते हुए देश सेवा में खुद को झोंक दिया। अच्छा पढ़ा लिखा नौजवान था, पैसा भी खूब था, कही लंदन पेरिस स्विट्ज़रलैंड में भी आजीवन के लिए शिफ्ट हो सकता था, और पूरी जिंदगी मौज कर सकता था मगर नही… उस ने देशसेवा का मार्ग चुना।
राहुल गांधी ने कभी क्रिटिसिज्म की राजनीति नही की। चाहे मोदी जी प्रधानमंत्री पद पर रहते हुए उसे पप्पू कहे, चाहे मूर्ख कहे चाहे सदन में उसकी नादानियों का मख़ौल सारे आम उड़ाए, मगर मैंने कभी राहुल के मुंह से मोदी जी के लिए अपशब्द नही सुने।

उस भोळे बच्चे पर मुझे उस वक्त हंसी नही आई बल्कि प्यार आया जब उसने सदन में खुद को पप्पू कहा जाना स्वीकार किया। वो बालक मोदी जी के पास गया और उन्हें गले से लगा लिया। मीडिया, और भाजपा वाले उसके इस व्यवहार की भी हंसी उड़ाते रहे।

मीडिया ने और अंदभक्तो ने उसे बेवकूफ साबित करने में कोई कसर नही छोड़ी मगर मैं दाद देता हूँ उसके हौसलों की, कि इतनी विषम परिस्थितियों के रहते भी वो बस मुस्कुराता रहा।
लगातार हार का सामना, और वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं द्वारा हार का ठीकरा राहुल के माथे फोड़ना भी इस नौजवान को अपने कर्तव्य पथ से डिगा नही पाया।

आजकल के बच्चे एक एग्जाम में कम नंबर आ जाने पर आत्महत्या कर लेते है। सोचो राहुल पर क्या बीतती होगी।
राहुल ने एक सभा मे कहा था, कि दादी और खासकर पापा को खो देने के बाद मैं अवसाद में चला गया था। मगर मैने बड़ी मुश्किल से खुद को संभाला।

विदेश की धरती पर एक बार राहुल ने कहा था, कि मैंने मेरे पापा और दादी के हत्यारों को दिल से माफ़ कर दिया है, और मैं उन्हें गले से लगा सकता हूँ। ये सुनकर पूरी सभा तालियों की गड़गड़ाहट से गुंजायमान हो गयी थी।

राहुल गांधी के भाषणों में मैंने एक बात गौर की है कि यह युवक सिर्फ प्रश्न पूछता है कि मोदी जी बताइए राफेल डील में आपने महंगे जहाज क्यों खरीदे? या मोदी जी यह बताइए कि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स के होते हुए आपने सौदा रिलायंस को क्यों दिलवाया, जिसे विमान निर्माण का कोई अनुभव नहीं था? आपने क्यों बीएसएनएल के होते हुए 4जी स्पेक्ट्रम जियो को दिलवाया? और क्यों प्राइवेट कंपनी को फायदा पहुंचाया?
यह लड़का बहुत सम्मान के साथ हमेशा प्रश्न पूछता है और इसके प्रश्न बहुत सटीक होते हैं मैंने आज तक नहीं देखा कि मोदी जी ने इसका जवाब दिया हो मोदी जी को अक्सर में इसकी हंसी उड़ाते हुए पाता हूं।

उन सभी नौजवानों को जो छोटी छोटी असफलताओं पर निराश हो जाते है, मैं यही सलाह देना चाहूंगा कि वो राहुल से प्रेरणा लें।
कि कितनी कठिन परिस्थितियों में भी वो आज किस तरह अपनी पार्टी को जिंदा रखे हुए है। किस तरह अपने सफल मैनेजमेंट से आज कांग्रेस को फिर से उबारकर लाया है।
उसने हार नही मानी। उसने क्रिटिसिज्म का बुरा नही माना। उसने कभी अपना पेशन् नही खोया।

आज कांग्रेस की 3 बड़े राज्यो में वर्षो बाद पुनर्वापसी का श्रेय कार्यकर्ताओं की वफादारी के साथ साथ राहुल गांधी के मैनेजमेंट को जाता है। राहुल गाँधी देखते ही देखते युवाओं के लिए प्रेरणा बन गए है । जिन विपरीत परिस्थितियों में राहुल गाँधी ने संघर्ष करते हुए दृढनिश्चय से सफलता प्राप्त की है, निश्चित ही एक दिन विश्वस्तरीय नेता के रूप में स्थापित होंगे। हो सकता है कि केंद्र में इस बार राहुल गाँधी जी के नेतृत्व में सरकार बन जाए.

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