फिर SC में Rafale पर सुनवाई, AG का डॉक्यूमेंट चोरी का आरोप| Rafale deal: Documents Were Stolen from Defence Ministry, Govt Tells SC

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लड़ाकू विमान राफेल डील में हुए घोटाले को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई की गई। राफेल मामले में अब एक नया मोड़ आया है। कोर्ट में सुनवाई के दौरान मोदी सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने SC को कहा कि जिन कागजात को अखबार ने छापा है। वह रक्षा मंत्रालय से चोरी किया गए थे।

इसको लेकर आन्तरिक जांच की जा रही है। न्यायमूर्ति केएम जोसेफ ने सुनवाई के दौरान कड़ी टिप्पणी करते हुए बोले कि अगर सबूत पुख्ता हैं और भ्रष्टाचार हुआ है तो जांच अवश्य होनी चाहिए।

अटॉर्नी जनरल बोले की जिन गुप्त कागजों को अखबार में छपा गया है उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। आगे कहा- कुछ डॉक्यूमेंट को रक्षा मंत्रालय से चोरी किया गया और आगे बढ़ाए गए। वे यह भी बोले की यह मामला काफी अहम् है। अखबारों ने रक्षा मंत्रालय की गुप्त सूचना को सार्वजनिक कर दिया है।

केके वेणुगोपाल ने आगे बताया कि दूसरे देशों से सरकार के रिश्ते RTI के ACt से भी बाहर हैं, लेकिन अखबार ने सभी बातों को सार्वजनिक किया जो कि एक अपराध है।

राफेल राहुल गांधी ने उठाए सवाल

12 फरवरी को एक प्रेस कांफ्रेंस करके कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि राफेल सौदे में एक ईमेल सामने आया है, जिसमे अनिल अंबानी के नाम का जिक्र किया गया। ईमेल का जवाब दें प्रधानमंत्री। फ़्रांस के रक्षा मंत्री अंबानी से कैसे मिले ? पीएम ने अनिल अंबानी के लिए बिचौलियों की तरह काम किया। मोदी घोटाले में शामिल है इस लिए JPC से बच रहे है।

पहले ये भ्रष्टाचार का मामला था, अब ये ऑफिशियल सीक्रेट एक्ट का मामला हो गया है। इस पर कार्रवाई शुरु हो जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने देश की सुरक्षा से समझौता किया है। उन्होंने रक्षा मामले की जानकारी एक ऐसे व्यक्ति को दी जिसके पास ये जानकारी नहीं होनी चाहिए। राफेल घोटाले में अब और कितना सबूत चाहिए, अभी और सबूत निकलेगा।

राफेल एक लड़ाकू विमान है। जिसकी मोदी सरकार द्वारा डील की गई थी। यह डील अनिल अंबानी को दिलवाई गई है। इसको लेकर कांग्रेस अध्यक्ष ने कई बार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण पर हमलावर हुए है। अक्सर कई सभाओं में चौकीदार चोर है के नारे भी लगाए जाते है।

इससे भी फैसला दिया था

राफेल मामले पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा बीते वर्ष 13 दिसम्बर 2018 को फैसला सुना दिया था। कोर्ट ने कहा था कि राफेल डील में किसी भी तरह की कोई गड़बड़ी नहीं हुई है। हालांकि, तब कुछ लोगों ने सवाल खड़े किए थे कि केंद्र सरकार ने SC सुप्रीम कोर्ट के सामने सही डॉक्यूमेंट पेश नहीं किए इसलिए फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

कोर्ट से फैलसा के तुरंत बाद केंद्र सरकार कि और से संशोधन याचिका दाखिल की थी. इसके बाद प्रशांत भूषण ने याचिका दाखिल कर मांग की कि सरकार के दिए नोट में कोर्ट को गुमराह करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई हो। 26 फरवरी 2019 को कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि राफेल मामले को लेकर दिए अपने फैसले पर खुली अदालत में फिर से विचार किया जाएगा।

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