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हिरण को खाद्य सामग्री खिलाने के मामले में फंसे मंत्रीजी वन्यप्राणियों के जानकार अजय दुबे

Posted on: 01 May 2018 08:54 by Ravindra Singh Rana
हिरण को खाद्य सामग्री खिलाने के मामले में फंसे मंत्रीजी वन्यप्राणियों के जानकार अजय दुबे

भोपाल: मप्र राज्य लघु वनोपज संघ के अध्यक्ष (राज्यमंत्री का दर्जा) महेश कोरी हिरन को सेव (नमकीन) और मुरमुरे खिलाने के मामले में फंस गए हैं। नौरादेही अभयारण्य में 20 साल बाद पहुंची बाघिन को देखने गए कोरी के परिजनों ने उनकी उपस्थिति में न सिर्फ हिरन को नमकीन खिलाया, बल्कि एक सदस्य उससे लिपट तक गया।इतना ही नहीं, परिजनों ने हफ्तेभर पहले पहुंची बाघिन का वीडियो भी बनाया।

वन्यप्राणी विशेषज्ञ इसे वन्यप्राणी कानून का उल्लंघन मानते हैं। इसे लेकर वन्यप्राणियों के जानकार अजय दुबे ने कोरी के खिलाफ मामला दर्ज करने की मांग की है।नौरादेही अभयारण्य 20 साल बाद आबाद हुआ है। पहले अभयारण्य में 15 से ज्यादा बाघ थे। पन्ना नेशनल पार्क के बाद अभयारण्य में बाघों की पुनर्स्थापना का यह दूसरा प्रयास है। इसके तहत बांधवगढ़ नेशनल पार्क से एक बाघिन और रविवार को एक बाघ अभयारण्य में छोड़े गए हैं।

कोरी परिजनों के साथ बाघिन को देखने अभयारण्य गए थे। इस दौरान उनकी उपस्थिति में बाघिन के कई वीडियो बनाए गए, जबकि हाल ही में बांधवगढ़ से भेजी गई बाघिन के लिए अभयारण्य नई जगह है। ऐसे में उसे दर्शकों के सामने नहीं लाया जा सकता है। इस मामले में अभयारण्य के अधिकारी भी बराबर के जिम्मेदार हैं।

इसके बाद परिजनों ने हिरन को पकड़ लिया और उसे सेव और मुरमुरे भी खिलाए। कोरी के परिवार के एक सदस्य का हिरन के बच्चों (छौनों) को खिलाते हुए फोटो वायरल हुआ है। ज्ञात हो कि हिरन शेड्यूल एक का प्राणी है। इसे नुकसान पहुंचाने पर कठोर सजा का प्रावधान है।

शारीरिक नुकसान पहुंच सकता है
वन विहार नेशनल पार्क के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुदेश वाघमारे कहते हैं कि जंगली जानवरों को तैलीय पदार्थ नहीं खिलाए जा सकते हैं। इसे वन्यप्राणी अधिनियम में प्रतिबंधित किया गया है। ऐसा करने पर सजा का भी प्रावधान है। वैसे भी जंगली जानवरों को ऐसे पदार्थ शारीरिक नुकसान पहुंचा सकते हैं। अभी गर्मी भी पड़ रही है। वहीं वन विभाग लगातार अपील करता है कि बंदरों को खाद्य पदार्थ न दें। जब विभाग में ही उच्च पदों पर बैठे लोग ऐसा करेंगे तो विभाग की अपील को कौन मानेगा। यह तो लोगों को प्रोत्साहित करना है।

वह पालतू जैसा है
बाघिन की वीडियो बनाया है। हिरन के साथ वाला फोटो अभयारण्य का नहीं है। वहां से 30 किमी दूर सिराड़ी गांव के पास छौला तालाब का फोटो है। वहां से निकलते हुए रुके थे, वह नजदीक आ गया तो सेव और मुरमुरे खिला दिए। वह पालतू जैसा ही है।

– महेश कोरी, अध्यक्ष, मप्र राज्य लघु वनोपज संघ
कार्रवाई की जाए
विभाग में वरिष्ठ पद पर होते हुए कानून के विपरीत कृत्य किया गया है। इस मामले में कोरी पर वन्यप्राणी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जाना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो दूसरे लोग ऐसा करने के लिए प्रोत्साहित होंगे।

– अजय दुबे, वन्यप्राणियों के जानकार

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