कृषि एक्सपोर्ट पॉलिसी लाने की तैयारी

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इंदौर। दाल-दलहनों में चल रही मंदी को लेकर व्यापारियों के साथ सरकार भी चिंतित है। सरकार नई कृषि एक्सपोर्ट पॉलिसी लाने की तैयारी कर रही है। इससे पहले वाणिज्य मंत्रालय में एग्री एक्सपोर्टर्स और प्रोसेसर्स की बैठक बुलाई गई थी, जहां कारोबारियों ने दाल, चावल और चीनी का एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए सरकार से मदद की मांग की है। सरकार पहले ही दाल के एक्सपोर्ट से पाबंदी हटा चुकी है। हालांकि इसके बावजूद उम्मीद के मुताबिक दाल का एक्सपोर्ट नहीं हो पा रही है। ऐसे में दाल मिल एसोसिएशन ने सरकार से दाल एक्सपोर्ट पर 15 फीसदी सब्सिडी की मांग की है। आपको बता दें इस साल अप्रैल-जुलाई के दौरान करीब 1.25 लाख टन दाल का एक्सपोर्ट हुआ है जो पिछले साल के मुकाबले करीब 2 गुना है। हालांकि ये मात्रा बेहद कम है। दाल एक्सपोर्ट में दिक्कतों की बात करें तो ग्लोबल मार्केट में भाव घरेलू बाजार से नीचे हैं। सबसे बड़े कंज्यूमर भारत में इस साल दाल की बंपर पैदावार होने की संभावना है। इस साल करीब 2.5 करोड़ टन दाल पैदावार संभव है। भारत में कम मांग से ग्लोबल मार्केट में भी दाल के भाव गिर गए हैं। ऐसे में सब्सिडी के बिना ज्यादा दाल एक्सपोर्ट संभव नहीं है। स्थानीय बाजार में ग्राहकी कम होने से मिलों ने तुवरदाल के भाव 50 रुपए घटाए है. गेहूं में एफसीआई की बिकवाली जारी है. 6 लाख क्विंटल गेहूं का टैंडर 1905-2020 रुपए तक रहा.

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