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लघुकथा के भावों को अभिव्यक्त करते पोस्टर्स – किशोर बागरे और अनघा जोगलेकर

Posted on: 05 Jun 2018 16:49 by Praveen Rathore
लघुकथा के भावों को अभिव्यक्त करते पोस्टर्स – किशोर बागरे और अनघा जोगलेकर

इंदौर।क्षितिज अखिल भारतीय लघुकथा सम्मेलन -2018 में क्षितिज द्वारा एक अभिनव प्रयोग कलाकर्मी किशोर बागरे और अनघा जोगलेकर के संयुक्त प्रयास से किया गया. देश के प्रसिद्ध लघुकथाकारों के साथ ही अन्य चुनिन्दा लघुकथाकारों की लघुकथाओं पर इनके द्वारा पोस्टर्स बनाए गए थे.

इनमें सूर्यकान्त त्रिपाठी ‘निराला ‘की जंगल और कुल्हाड़ी, हरिशंकर परसाई की जाति, बलराम की मौत, मधुदीप की अन्तरात्मा और भय, सतीशराज पुष्करणा की भावनाओं का अर्थ, अशोक भाटिया की इतिहास का परिचय और बेपर्दा, श्यामसुन्दर अग्रवाल की औरत का दर्द, किशोर काबरा की तीन बंदर, डॉ.रामकुमार घोटड़ की लरजते पेड़, शरद जोशी की मैं वही भागीरथ हूँ शामिल है.

इंदौर के लघुकथाकारों में डॉ.सतीश दुबे की खेल वाली मां, सुरेश शर्मा की राजा नंगा है और बँटवारा, चैतन्य त्रिवेदी की समुद्र की तरफ जाने का रास्ता, डॉ. जवाहर चौधरी की सूर्य नमस्कार, सतीश राठी की समाजवाद और जन्मदिन, डॉ. योगेन्द्रनाथ शुक्ल की रूदन, अशोक शर्मा ” भारती ” की कल क्या होगा आदि लघुकथाएँ भी सम्मिलित है। 7 किशोर बागरे ने बताया कि लघुकथाओं के पोस्टर्स में कहीं इलेस्ट्रेशंस, रेखांकन, मैगजीन के फोटो काटकर बनाये गये कोलाज भी शामिल थे 7 पोस्टर प्रदर्शनी में चालीस से अधिक पोस्टर्स लगाये गये थे।

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