राजनीति का बस एक चरित्र है खुद का फायदा

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11-11-19 का दिन राजनीति के कई चरित्रों के कई पहलुओं को उजागर करने वाला रहा। महाराष्ट्र में सरकार के लिए 30 साल पुराना भाजपा शिवसेना का गठबंधन सुबह खत्म हुआ और 2 बजते-बजते भाजपा के वो नेता और कार्यकर्ता जो कल तक बालासाहेब ठाकरे और शिवसेना के गुणगान करते नहीं ठकते थे वे शिवसेना को शेर (पार्टी का प्रतिक चिन्ह) की जगह बिल्ली, लोमड़ी और न जाने क्या-क्या निरोपित करते हुए कोसने लगे। इनमें से अधिकांश को तो 19 जून 1966 में शिवसेना के गठन और उसके पहले की शिवसेना के विचार की उत्पत्ति का कारक बनी मार्मिक की कहानी भी नहीं पता है। इन्हें इमरजेंसी का शिवसेना को समर्थन और शरद पवार और बाल ठाकरे सहित मीनाताई ठाकरे से पारिवारिक रिश्तों के बारे में भी कोई ज्यादा जानकारी नहीं है।

लेकिन भाई लोगों ने सोशल मीडिया पर जमकर कहर बरपाया हुआ है। शिवसेना और उद्धव ठाकरे भी लगभग देशद्रोही घोषित हो ही गए हैं। राष्ट्रीय स्तर की इस राजनीति के बीच एक छोटी सी घटना ओर हुई। ये घटना हुई इंदौर में। सोमवार को इंदौर में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की सुरक्षा कम करने को लेकर कांग्रेस के नेता प्रदर्शन कर रहे थे। उनके प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने इन कांग्रेस नेताओं के साथ गाली-गलौच, धक्का-मुक्की, मारपीट सबकुछ किया, यही नहीं कांग्रेस के 10 कार्यकर्ताओं पर निषेधाज्ञा उल्लंघन का मामला भी दर्ज किया। इसमें कांग्रेस नेता देवेंद्रसिंह यादव भी शामिल हैं। ये वही शख्स है जिसने 15 सालों तक जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी और उस समय जब कांग्रेस को भाजपा ने लगभग खत्म घोषित कर दिया था। उस समय कांग्रेस के लिए सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करता था। कहा जाए तो इंदौर में कांग्रेस को जिंदा रखने वाले चंद लोगों में ये एक नाम है।

सोमवार को प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों को कांग्रेस दफ्तर के नीचे 188 का आरोपी बना दिया गया। निषेधाज्ञा का उल्लंघन इसके पहले रविवार को नेहरू स्टेडियम में नहीं हुआ था, शायद। रविवार को आईटीए अवार्ड नाइट नेहरू स्टेडियम जहां हाई कोर्ट ने खेल गतिविधि के अतिरिक्त किसी भी आयोजन पर रोक लगा रखी है वहां हुआ। इसमें प्रदेश के मंत्रियों सहित टीवी इंडस्ट्री की हस्तियां भी शामिल थी। जब पूरे जिले में 144 लागू थी तो नेहरू स्टेडियम उससे कैसे बाहर था ये समझ नहीं आ रहा है। शायद शहर के बीच आने वाला नेहरू स्टेडियम शहर की परिधी से बाहर का हिस्सा है। या फिर इसके आयोजकों की मुख्यमंत्री कमलनाथ से नजदिकी होने से आयोजन 144 की परिधी से बाहर हो गया था। मेरे हिसाब से राजनीति के बेहद घिनौने चरित्र की दूसरी तस्वीर थी।

जिसमें कांग्रेसी मुख्यमंत्री के नजदीक होने के चलते हजारों की भीड़ के आयोजन पर निषेधाज्ञा 144 लागू नहीं होती, लेकिन दूसरी ओर कांग्रेस अध्यक्ष के लिए प्रदर्शन करने वाले कांग्रेस के छोटे नेताओं पर ये लागू होती है। राजनीति के दो गंदे चेहरे राजनीतिक दलों पर अंधआस्था रखने वालों के चश्मे उतारने के लिए वैसे तो काफी हैं, लेकिन उसके बाद भी राजनीति के चलते अपनों से ही कटूता पालने वालों को इन पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि राजनीति का सिर्फ एक मतलब होता है मजबूत और मौके का फायदा। इसमें कोई किसी का सगा नहीं है। इसलिए अपने रिश्तों को मत खराब करो।
बाकलम – नितेश पाल

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