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हनुमान का तो मान रख लेते

Posted on: 30 Nov 2018 18:57 by Surbhi Bhawsar
हनुमान का तो मान रख लेते

मुकेश तिवारी
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सत्ता के लिए राजनेता सारी मर्यादाएं तोड़ने पर उतारू नजर आ रहे हैं। पहले एक-दूसरे को अपशब्द कहे फिर भाषा का स्तर गाली-गलौज जैसा हो गया। जब इससे भी पेट भर गया तो माता- पिता पर गंदी जुबान चलाने लगे। अब भगवान तक पहुंच गए हैं। भगवान की जाति बताई जा रही है। इससे ज्यादा शर्मनाक तो शायद कुछ हो ही नहीं सकता।

सत्ता का यह सेमीफाइनल यानी 2018 का विधानसभा चुनाव भारत के राजनीतिक इतिहास में शायद इसलिए काले पन्नों पर दर्ज होगा क्योंकि इसमें नेताओं की भाषा का स्तर सबसे ज्यादा गिर गया। गुजरात के चुनाव से एक-दूसरे को अपशब्द कहने का नेताओं ने  जो सिलसिला शुरू किया  था वह छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान के चुनाव में भी नहीं थमा। उल्टे इसमें खासी बढ़ोतरी ही हुई। पहले राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाते थे, छींटाकशी करते थे, बाद में उनके  नेता एक-दूसरे पर जुबानी हमले बोलने लगे। इस हमले के दौरान भाषा का स्तर घटिया हो गया था। 2018 के चुनावी रण में दो-दो हाथ करने उतरी भाजपा और कांग्रेस के नेताओं ने अपनी बदजुबानी से इस स्तर को घटिया से बेहद घटिया तक पहुंचा दिया। मां और पिता तक पर छींटाकशी की गई। महिलाओं को भी अपनी गंदी जुबान से नेताओं ने नहीं बख्शा।

छोटे नेता तो पहले ही भाषा की मर्यादा को तार-तार कर चुके थे। इस बार तो बड़े नेता उनसे भी नीचे उतर आने को आतुर दिखे। मध्यप्रदेश का विधानसभा चुनाव कवर करने के दौरान मेरी कई वरिष्ठ पत्रकार साथियों से चर्चा हुई। निष्कर्ष यह निकला कि राजनीतिक दलों और नेताओं के पास बताने के लिए कुछ खास है नहीं, वह मुद्दा  विहीन होकर घूम रहे हैं। ऐसे में एक-दूसरे पर गंदे शब्दबाण छोड़कर वह जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से हटाना चाहते हैं।  नेताओं की  जाति और गोत्र पर पहले ही चर्चा हो चुकी  अब नेता  भगवान हनुमान की जाति बताने में जुट गए हैं। सत्ता और वोट पाने की खातिर इससे ज्यादा निचला स्तर और कुछ हो ही नहीं सकता। देश में जातिवाद की राजनीति बहुत पहले से चली आ रही है पर शायद यह पहला मौका है जब भगवान की भी जाति बताई जा रही है। क्या कहें बस यही कह सकते हैं नेताजी हनुमान जी का मान तो रख लेते। हम किसी भी भगवान को जाति के बंधन में कैसे बांध सकते हैं? भगवान तो सब का है और सर्वव्यापी भी।

लेखक, Ghamasan.com के संपादक हैं।

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