अमेठी का सियासी इतिहास, सिर्फ दो बार मिली मात | Amethi is the fort of congress

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आज यानी बुधवार को अमेठी से चौथी बार अपना नामांकन भरने जा रहे है। नामांकन भरने से पहले वह रोड शो करेंगे। इस दौरान उनकी बहन प्रियंका गांधी और मां सोनिया गांधी उनके साथ रहेंगी। यह सीट कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती है। यहां की राजनीतिक मिट्टी केवल कांग्रेस के चुनाव चिन्ह को ही पहचानती है और शायद यही वजह है कि 2014 में मोदी लहर होने के बाद भी भाजपा अपना कमल यहां नहीं खिला पाई थी।

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने एक बार फिर स्मृति ईरानी को राहुल गांधी के सामने उतारा है। अमेठी के सियासी इतिहास में केवल दो बार ऐसा हुआ है जब कांग्रेस को मात खानी पड़ी हो। इसके अलावा बाकी चुनावों में गांधी परिवार के सदस्य यहां रिकॉर्ड मतों से जीतकर संसद में पहुंचते रहे हैं।

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बसपा-सपा नहीं खोल पाई खाता

अमेठी लोकसभा सीट कांग्रेस का दुर्ग मानी जाती है। यहां 18 बार हुए चुनावों में कांग्रेस को केवल दो बार मात खानी पड़ी है। 1977 में जनता पार्टी और 1998 में बीजेपी को जीत मिली है जबकि सपा और बसपा अभी तक यहां अपना खता भी नहीं खोल पाई है।

अमेठी का समीकरण

अमेठीलोकसभा सीट पर दलित और मुस्लिम मतदाता कींगमेकर की भूमिका निभाते है। यहां मुस्लिम मतदाता की आबादी करीब 4 लाख और दलित वोटर करीब साढ़े तीन लाख है। इनमें पासी समुदाय के वोटर काफी अच्छे हैं। इसके अलावा यादव, राजपूत और ब्राह्मण भी इस सीट पर अच्छे खासे हैं।

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अमेठी सीट का इतिहास

अमेठी कांग्रेस की परंपरागत सीट रही है। इस सीट पर हुए 18 चुनावों में से 16 बार कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। 1967 में अस्तित्व में आई अमेठी में पहली बार कांग्रेस के विद्याधर वाजपेयी सासंद बने। 1971 में भी वाजपेयी ने जीत दर्ज की। 1977 में कांग्रेस ने संजय सिंह को प्रत्याशी बनाया था लेकिन वह हार गए और लोकदल ने इस सीट परे जीत दर्ज की।

हालांकि 1980 के चुनाव में इस सीट से इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी मैदान में उतरे इस सीट को गांधी परिवार की सीट में तब्दील कर दिया। इसी साल विमान दुर्घटना में मौत हो गई थी। 1981 में हुए उपचुनाव में इंदिरा गाँधी बड़े बेटे राजीव गांधी यहां से सांसद बने। 1984 में इंदिरा गांधी की ह्त्या के बाद हुए चुनाव में राजीव गांधी ने फिर जीत हासिल की। ऐसे राजीव गांधी 1989 और 1991 में चुनाव जीते लेकिन 1991 के नतीजे आने से पहले उनकी हत्या हो गई।

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राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस के कैप्टन सतीश शर्मा चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे। 1996 में शर्मा ने जीत हासिल की लेकिन 1998 में बीजेपी के संजय सिंह ने उन्हें हरा दिया। 1999 में राजनीति में आने के बाद सोनिया गांधी भी अमेठी से चुनाव मैदान में उतरीं और जीत दर्ज की। 2004 में राहुल गांधी यहां से लड़े और भाजपा की स्मृति ईरानी को हराकर लोकसभा पहुंचे।

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