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नक्सलियों की चुनौती के बीच पुलिस अधिकारी ने ऐसे बयां की होली की खुशियां

Posted on: 21 Mar 2019 20:38 by Surbhi Bhawsar
नक्सलियों की चुनौती के बीच पुलिस अधिकारी ने ऐसे बयां की होली की खुशियां

मध्यप्रदेश का बालाघाट इलाका नक्सली गतिविधियों के लिए देशभर में कुख्यात है। रेड कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले इस इलाके में लांजी आता है जो छत्तीसगढ़ के सबसे संवेदनशील जिले सुकमा और महाराष्ट्र के खतरनाक नक्सली क्षेत्र गढ़चिरोली को जोड़ता है। नक्सली खतरों से जूझते और देश की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत रखने के लिए इस इलाके में तेज तर्रार पुलिस अधिकारी की नियुक्ति की जाती है। इस समय यहां पर एसडीओपी नितेश भार्गव तैनात हैं। वे अपनी ड्यूटी तो मुस्तैदी से करते ही हैं, मौका मिलने पर कविताएं भी लिख देते हैं। जंगल में नक्सलियों की चुनौती के बीच होली की खुशियों को उन्होंने कुछ इस अंदाज में कविता के माध्यम से बयां किया है।

भ्रम भय भेद बिसारो सारे,
भेदभाव की सब दीवार-ओ-दर,
तोड़ चले हम, तोड़ चले हम।
सौहार्द भाव के हुरियारे है हम,
जन को जन से जोड़ चलें हम।
मन मालिन्य.बहा कर सारा,
बिखराया ‘रंग भाईचारा’।
यही शोर फागुन हर ओर,
गाता आए हर हुरियारा।

सहिष्णु भाव की पुण्य वाहिनी,
मैं भ्रातृभाव की अविरल बोली।
जन उत्सव की गर्वित बेला,
मैं निश्छल प्रेम पगी, हूं होली।

विगत भूल मैं, हुई नवेली,
शुभ आगत की सखी सहेली|
आज खिली हूं हर घर आंगन,
तू मुझ सा, मैं तुझ सी हो ली|

दुर्भाव सभी है बिसरा आए,
फागुन में है ज्यों, टेसू छाए|
मिल जुल सब एक हुए हम,
हाथ माथ रंग वासंती भाए|

पुलवामा के शौर्य रंग की,
हर कंठ गा रहा गौरव गाथा|
मैं भारत हूं,आज, अभी का,
कोई मुझ सा ना है, ना था|

श्रम, संयम के रंग सजाए,
नित नितेश ये मंगल गाए|
भ्रम, भय, भेद बिसारो सारे,
आओ सब मिल राष्ट्र बनाएं|

बहरहाल होली का रंग बिरंगा उत्सव ही कुछ ऐसा है कि हम सब कुछ भूलकर आनंदित हो जाते हैं। फिर वह आम इंसान हो, नक्सलियों के बीच पुलिस अधिकारी या सरहद पर तैनात हमारे सैनिक।

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